एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, एफएमसीजी (FMCG), आईटी (IT), ऑटोमोबाइल (Automobile), ऑयल एंड गैस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर साल 2009 के वैश्विक आर्थिक संकट (Global Financial Crisis) के बाद से भारत में लगातार अच्छा रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) दे रहे हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट?
डीएसपी म्यूचुअल फंड (DSP Mutual Fund) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये सेक्टर शेयर बाज़ार में एक-तिहाई से ज़्यादा हिस्सेदारी रखते हैं और बाकी सेक्टरों की तुलना में 50% ज़्यादा ROE कमाते हैं।
एफएमसीजी कंपनियों ने निफ्टी 50 (Nifty 50) में औसतन 35.5% का ROE दिया, जबकि 2008-09 के संकट के बाद से यह 45.4% रहा है।
आईटी (28.6%), ऑटोमोबाइल (22.8%), ऑयल एंड गैस (22.3%) और फाइनेंसियल सर्विसेज (15.9%) भी इस दौरान सबसे ज़्यादा ROE देने वाले सेक्टर्स में से थे।
इसकी वजह से ही लंबे समय से भारतीय शेयर बाज़ार की वैल्यूएशन प्रीमियम पर बनी हुई है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महामारी के बाद से मेटल, माइनिंग और कंस्ट्रक्शन जैसे चक्रीय (cyclical) सेक्टरों में तेज़ी आई है, जबकि इनकी लंबे समय की ROE कमजोर है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब भी अच्छी कंपनियों (हाई ROE वाली) का वैल्युएशन कम होगा, तो उनमें निवेश का अच्छा मौका मिलेगा।
सोने की मांग में बढ़ोतरी
रिपोर्ट में सोने के बारे में भी कुछ बातें बताई गई हैं। सोने की कीमत पर अमेरिकी डॉलर, एसएंडपी 500, फेडरल रिज़र्व की पॉलिसी मूल्यों और महंगाई का असर होता है। हाल के सालों में, इन सब ने सोने के लिए मुश्किलें पैदा की हैं, फिर भी सोने की कीमत में स्थिरता बनी हुई है।
इसकी सबसे बड़ी वजह साल 2022 से सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी में आई तेज़ी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका द्वारा दूसरे देशों पर अपनी करेंसी का इस्तेमाल कर प्रतिबंध लगाने के बाद, कई देशों के सेंट्रल बैंकों ने अमेरिकी बॉन्ड्स के बजाय सोने को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है, जिसे रिपोर्ट में ‘गोल्ड पुट’ कहा गया है। यह सोने की लगातार और बिना कीमत की परवाह किए खरीदारी को दर्शाता है।
— आईएएनएस


