केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए भारत की सुरक्षा मंजूरी प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि नई तकनीक अपनाने की तैयारी के बीच देश की सुरक्षा और हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने अरबपति एलन मस्क को संबोधित सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि किसी भी नए विकल्प को अपनाने से पहले देश को अपने हितों के अनुसार योजना बनानी चाहिए।
चंद्रशेखर ने कहा कि सैटेलाइट संचार सेवाएं देने वाली तीनों कंपनियां सुरक्षा मंजूरी हासिल करने की प्रक्रिया में लगभग एक ही चरण में हैं। उनके मुताबिक, स्पेक्ट्रम आवंटित करने से पहले सुरक्षा और भरोसे से जुड़े पहलुओं की जांच जरूरी है।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने पोस्ट में चंद्रशेखर ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र में उद्यमी और नीति-निर्माता के रूप में काम करने के अनुभव के आधार पर वह इस मुद्दे पर अपनी राय साझा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का प्रौद्योगिकी क्षेत्र, जिसमें दूरसंचार और इंटरनेट भी शामिल हैं, तीन सिद्धांतों पर आधारित है- खुलापन, सुरक्षा एवं भरोसा और जवाबदेही।
उन्होंने कहा कि बाजार में किसी एक या दो कंपनियों का एकाधिकार नहीं होना चाहिए और सभी कंपनियों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। साथ ही, बुनियादी ढांचे, नेटवर्क और डिजिटल मंचों को सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाना जरूरी है। चंद्रशेखर के अनुसार, इस क्षेत्र में काम करने वाले प्रत्येक पक्ष की सुरक्षा और भरोसे से जुड़े मामलों में कानूनी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
चंद्रशेखर ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत को पड़ोसी देशों में मौजूद शत्रुतापूर्ण तत्वों के समर्थन से होने वाले आतंकवाद और उग्रवाद का सामना करना पड़ा है। उन्होंने 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों और पहलगाम में हुए हालिया हमले का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आतंकवादी संचार के लिए सैटेलाइट संचार सेवाओं को प्राथमिकता देते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सैटेलाइट आधारित इंटरनेट प्रोटोकॉल पर वॉयस कॉल और एन्क्रिप्शन जैसी तकनीकों से सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त चुनौतियां पैदा होती हैं। हालांकि, उनके मुताबिक इन चुनौतियों का समाधान संभव है, लेकिन इसके लिए सुरक्षा और भरोसा सुनिश्चित करने की नई क्षमताएं विकसित करनी होंगी।
चंद्रशेखर ने मस्क की कंपनी स्टारलिंक की तकनीक की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद स्टारलिंक का इस्तेमाल किया है और यह बेहतरीन तकनीक है, जो मोबाइल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नवाचार के नए दौर का प्रतिनिधित्व करती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अब सरकार में नहीं हैं और सरकार की ओर से नहीं बोल रहे हैं। इसके बावजूद, उन्होंने कहा कि नई तकनीकों का आकलन करते समय भारत को अपने हितों और सुरक्षा की रक्षा करनी होगी।
उनकी यह टिप्पणी भारत में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत और संबंधित कंपनियों को सुरक्षा मंजूरी देने की प्रक्रिया पर जारी बहस के बीच आई है।
-(इनपुटः आईएएनएस)


