‘आत्मनिर्भरता अलगाव नहीं, बल्कि सशक्त वैश्विक भागीदारी का संकल्प है’: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ‘आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta)’ का अर्थ दुनिया से अलग-थलग रहना नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत और सक्षम परस्पर निर्भरता (resilient interdependence) है, जो घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ने की क्षमता रखती है।

SBI Conclave 2025 में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना एक ऐसे राष्ट्र की है जो अपने लिए और दुनिया के लिए डिजाइन, उत्पादन और नवाचार करता है — एक ऐसी अर्थव्यवस्था जो आत्मविश्वास, उद्यमिता और संवेदनशीलता से प्रेरित हो।

उन्होंने कहा,

“आत्मनिर्भरता आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता, सामाजिक सशक्तिकरण और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संगम है — जिसका अंतिम लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत (Viksit Bharat) का निर्माण है।”

वित्त मंत्री ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के पाँच प्रमुख आयाम बताए:

  1. आर्थिक आत्मनिर्भरता

  2. सामाजिक आत्मनिर्भरता

  3. तकनीकी आत्मनिर्भरता

  4. सामरिक (Strategic) आत्मनिर्भरता

  5. ऊर्जा आत्मनिर्भरता

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 को आत्मनिर्भरता के माध्यम से हासिल करने का कार्य 2014 से ही शुरू हो चुका है

इसके साथ ही, उन्होंने सभी बैंकों से HR नीतियों पर जोर देते हुए कहा कि भर्ती केवल संख्या बढ़ाने के लिए नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए हो कि हर कर्मचारी अपने ग्राहक को समझे और स्थानीय भाषा (local language) में संवाद कर सके।

उन्होंने स्थानीय भाषा आधारित परफॉर्मेंस-अपरेजल सिस्टम लागू करने की भी वकालत की।

12वें SBI Banking and Economics Conclave 2025 का उद्घाटन करते हुए उन्होंने आगे कहा कि सरकार का उद्देश्य फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग को बंद करना नहीं, बल्कि उसमें मौजूद बाधाओं को दूर करना है।

“जोखिम को समझना निवेशकों की जिम्मेदारी है,” उन्होंने जोड़ते हुए कहा।

हाल ही में SEBI प्रमुख तुहिन कांत पांडे ने कहा था कि वीकली F&O एक्सपायरी को बंद करना कोई समाधान नहीं है क्योंकि कई बाजार सहभागियों के लिए यह जरूरी है। SEBI इन पैटर्न्स पर बड़ा डेटा एकत्र कर विश्लेषण कर रहा है, जिसे सार्वजनिक परामर्श (consultation) के रूप में जारी किया जाएगा।

-(इनपुटःएजेंसी)