प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ के उद्घाटन के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश आज एक नया इतिहास बनते देख रहा है। उन्होंने इसे भारत की विकास यात्रा में नए आरंभ का शुभ दिन बताया और कहा कि यह क्षण विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है।
विकसित भारत के संकल्प के साथ सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन में प्रवेश
नरेंद्र मोदी ने कहा कि शास्त्रों में विजया एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन लिए गए संकल्प में विजय की दैवीय शक्ति जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प के साथ सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन में प्रवेश करना देश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे बढ़ता भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आजादी के बाद साउथ और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अहम नीतियां बनीं, लेकिन ये भवन ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के रूप में निर्मित किए गए थे। उनका उद्देश्य भारत पर लंबे समय तक औपनिवेशिक शासन की छाप बनाए रखना था।
राजधानी परिवर्तन और रायसेना हिल्स का संदर्भ
नरेंद्र मोदी ने कहा कि 1905 के बंगाल विभाजन के बाद कोलकाता ब्रिटिश विरोधी आंदोलन का केंद्र बन गया था। इसके बाद 1911 में राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया गया। अंग्रेजी शासन की जरूरतों के अनुरूप नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का निर्माण कराया गया। उन्होंने बताया कि रायसेना हिल्स का चयन इसलिए किया गया ताकि इमारतें अन्य भवनों से ऊंची रहें और सत्ता का प्रतीक बनें। इसके विपरीत सेवा तीर्थ का परिसर जमीन से जुड़ा हुआ है, जो 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
आधुनिक सुविधाओं की जरूरत और खर्च में कमी
प्रधानमंत्री ने कहा कि 100 साल पुराने भवन आधुनिक टेक्नोलॉजी और कार्य प्रणाली के अनुकूल नहीं रह गए थे। दिल्ली में 50 से अधिक स्थानों पर चल रहे मंत्रालयों के किराए पर हर साल 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो रहा था। रोज 8 से 10 हजार कर्मचारियों के आवागमन में भी अतिरिक्त लॉजिस्टिक खर्च होता था। उन्होंने कहा कि नए भवनों के निर्माण से खर्च में कमी आएगी, समय बचेगा और कार्यक्षमता बढ़ेगी।
गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का अभियान
मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए जरूरी है कि देश गुलामी की मानसिकता से मुक्त हो। 2014 के बाद औपनिवेशिक प्रतीकों से मुक्ति का अभियान शुरू किया गया। वीरों के सम्मान में नेशनल वॉर मेमोरियल और पुलिस स्मारक का निर्माण हुआ तथा रेसकोर्स का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। उन्होंने कहा कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि सत्ता के मिजाज को सेवा भावना में बदलने का प्रयास है।
सेवा ही शासन का मूल मंत्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक संकल्प है। शासन का अर्थ सेवा और दायित्व का अर्थ समर्पण है। उन्होंने ‘सेवा परमो धर्मः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यही भारतीय संस्कृति और सरकार का विजन है।
नागरिक केंद्रित शासन मॉडल
नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में शासन का ऐसा मॉडल विकसित हुआ है, जिसमें हर निर्णय के केंद्र में नागरिक है। “नागरिक देवो भवः” हमारी कार्य संस्कृति का मार्गदर्शक सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ में लिया गया हर निर्णय और संसाधित हर फाइल 140 करोड़ देशवासियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित होनी चाहिए। सेवाभाव से संचालित शासन के कारण ही 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले और अर्थव्यवस्था ने नई गति पकड़ी है। (इनपुट: आईएएनएस)


