महान कथाकार और ‘उपन्यास सम्राट’ मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने प्रेमचंद की कालजयी रचनाओं और उनकी यथार्थवादी लेखनी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने किसान, श्रमिक, वंचित वर्ग और आम जनजीवन की वास्तविकताओं को साहित्य में प्रभावी स्वर दिया। मुंशी प्रेमचंद का निधन 8 अक्टूबर 1936 को हुआ था।
मनोहर लाल ने कालजयी रचनाओं को बताया साहित्य की समृद्ध धरोहर
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों तथा विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रेमचंद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हिंदी साहित्य को अपनी अनुपम कृतियों से समृद्ध करने वाले महान कथाकार और उपन्यास सम्राट की रचनाएं साहित्य जगत के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहेंगी। उन्होंने ‘गोदान’, ‘गबन’, ‘निर्मला’, ‘नमक का दारोगा’ और ‘कर्मभूमि’ जैसी रचनाओं का उल्लेख करते हुए उन्हें साहित्य की अमूल्य धरोहर बताया।
योगी आदित्यनाथ ने ‘कलम के सिपाही’ को किया नमन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुंशी प्रेमचंद को ‘कलम के सिपाही’ बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की कलम ने किसान, श्रमिक और सामान्य जन के जीवन-संघर्षों को स्वर दिया। उनकी रचनाओं में गांव और समाज की वास्तविक तस्वीर बेहद सजीवता से सामने आती है। योगी ने कहा कि मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत उनकी उत्कृष्ट रचनाएं साहित्य प्रेमियों और समाज के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।
केशव मौर्य ने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार को किया याद
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रेमचंद ने सामाजिक विषमता और कुप्रथाओं पर अपनी कलम से करारी चोट की। उनका साहित्य सामाजिक चेतना, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को स्वर देता है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं आज भी समाज के प्रति संवेदनशील बनने और सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
पंकज चौधरी ने ग्रामीण जीवन की सच्चाई को स्वर देने वाला बताया
उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि ‘उपन्यास सम्राट’ प्रेमचंद ने ‘गोदान’, ‘गबन’ और ‘ईदगाह’ जैसी कालजयी रचनाओं के जरिए समाज के वंचित वर्गों और ग्रामीण जीवन की सच्चाई को प्रभावी स्वर दिया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की यथार्थवादी लेखनी साहित्य जगत को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
जगदीश देवड़ा ने साहित्य को जनसरोकारों से जोड़ने की सराहना की
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रेमचंद को हिंदी साहित्य का महान उपन्यासकार और कहानीकार बताते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि ‘गोदान’, ‘गबन’, ‘निर्मला’ और ‘कर्मभूमि’ जैसी रचनाओं के माध्यम से प्रेमचंद ने समाज की वास्तविकताओं को शब्द दिए और साहित्य को जनसरोकारों से जोड़ा।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने आम जन के संघर्षों को किया याद
दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी लेखनी के जरिए समाज की वास्तविकताओं, आम जन के संघर्षों और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से शब्द दिए। उन्होंने ‘गोदान’, ‘गबन’, ‘निर्मला’ और ‘कफन’ जैसी रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कृतियां आज भी समाज को आईना दिखाती हैं। हिंदी साहित्य को समृद्ध करने और उसे जनजीवन से जोड़ने में प्रेमचंद का योगदान अविस्मरणीय है।
भजनलाल शर्मा ने प्रेमचंद के योगदान को बताया अतुलनीय
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रेमचंद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हिंदी साहित्य में उनका योगदान अतुलनीय है। उनकी लेखनी ने आम जनजीवन की सच्चाइयों, संवेदनाओं और सामाजिक परिस्थितियों को प्रभावशाली स्वर दिया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की अमर कृतियां साहित्य जगत को सदैव आलोकित करती रहेंगी और पाठकों को जीवन के मानवीय पक्ष से परिचित कराती रहेंगी।
संजय सेठ ने सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों को रेखांकित किया
भाजपा के राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से समाज की सच्चाइयों, संघर्षों और मानवीय संवेदनाओं को शब्द दिए। उनका साहित्य आज भी लोगों को सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करता है।
पुष्कर सिंह धामी ने सामाजिक चेतना का सशक्त स्वर बताया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रेमचंद को सामाजिक सरोकार और मानवीय दृष्टि के माध्यम से हिंदी साहित्य को नई ऊंचाइयां देने वाला महान साहित्यकार बताया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं सदैव सामाजिक चेतना और नैतिकता का दीप प्रज्ज्वलित करती रहेंगी।
नायब सैनी ने भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रेमचंद के स्मृति दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी कालजयी रचनाओं ने समाज की वास्तविकताओं, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के विविध पक्षों को शब्द दिए। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की सशक्त लेखनी हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है, जो पाठकों और भावी पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
प्रेमचंद की लेखनी आज भी प्रासंगिक
मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं में ग्रामीण जीवन, सामाजिक विषमता, आर्थिक संघर्ष, मानवीय संवेदनाओं और तत्कालीन समाज की वास्तविकताओं का सजीव चित्रण मिलता है। यही कारण है कि उनके साहित्य की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है और उनकी रचनाएं नई पीढ़ी को सामाजिक सरोकारों तथा मानवीय मूल्यों से जोड़ने का काम कर रही हैं। (इनपुट: आईएएनएस)


