केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वच्छता को केवल निर्धारित अवधि तक चलने वाले अभियान के बजाय जन-जन के व्यवहार और दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक में स्वच्छता गतिविधियों में व्यापक जनभागीदारी, व्यवहार परिवर्तन और मापनीय परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से स्वयं स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने और कार्यालयों, कार्यस्थलों, फील्ड कार्यालयों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति निरंतर जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।
जनभागीदारी से बनेगा स्वच्छता अभियान प्रभावी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वच्छता ही सेवा 2026 की प्रभावशीलता और स्थायित्व के लिए व्यापक जनभागीदारी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए स्वयं पहल करने के निर्देश दिए। ग्रामीण क्षेत्रों, पंचायतों और फील्ड स्तर पर कार्यरत कार्यालयों को स्वच्छता गतिविधियों से प्रभावी रूप से जोड़ने के साथ किसानों, ग्रामीण समुदायों, सफाई कर्मियों, मीडिया और अन्य संबंधित पक्षों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
स्वच्छता गतिविधियों के परिणाम हों स्पष्ट और मापनीय
केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि स्वच्छता गतिविधियां महज औपचारिकता बनकर न रह जाएं, बल्कि उनके स्पष्ट और मापनीय परिणाम सामने आने चाहिए। उन्होंने अभियान के तहत किए गए कार्यों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करने और जहां संभव हो, पहले और बाद के चित्रों के माध्यम से उपलब्धियों को दर्ज करने पर बल दिया, ताकि स्वच्छता अभियानों के वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सके।
विभागों ने दी स्वच्छता गतिविधियों और कार्ययोजना की जानकारी
बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतिश चंद्रा, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक मांगी लाल जाट, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल तथा भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव पी. नरहरि ने अपने-अपने विभागों में संचालित स्वच्छता गतिविधियों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी।
16 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलाए गए कई अभियान
बैठक में कृषि विभाग की ओर से बताया गया कि स्वच्छता ही सेवा 2026 के तहत 16 सितंबर से 2 अक्टूबर तक विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। मुख्यालय और फील्ड कार्यालयों में स्वच्छता शपथ, स्वच्छ पाठशाला, युवाओं की सहभागिता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कार्यालय परिसरों की सफाई तथा कॉरिडोर, कैंटीन और शौचालयों की गहन सफाई जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। इसके साथ ही पुराने फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निस्तारण, सफाई कर्मियों के सम्मान, स्वास्थ्य जांच तथा उनके बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन भी किया गया।
पुराने फर्नीचर और ई-वेस्ट के निस्तारण से मिला राजस्व
बैठक में बताया गया कि पुराने फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निस्तारण तथा नीलामी से करीब 15 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने श्रमदान के माध्यम से सामूहिक स्वच्छता अभियान भी चलाया। इसके अलावा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत गतिविधियों को आगे बढ़ाने की कार्ययोजना भी साझा की गई।
विशेष अभियान में लंबित मामलों के निस्तारण पर जोर
2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक संचालित होने वाले विशेष अभियान को लेकर विभिन्न विभागों ने लंबित फाइलों और मामलों के निस्तारण, लंबित मामलों की संख्या में कमी, स्क्रैप एवं ई-वेस्ट के निस्तारण, कार्यालयीन स्थान के बेहतर उपयोग और अनुपयोगी सामग्री हटाने के लिए निर्धारित लक्ष्यों की जानकारी दी। अभियान के तहत अनुपयोगी कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पहचान कर उनके नियमानुसार निस्तारण की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा करने के साथ उपलब्धियों का समुचित दस्तावेजीकरण किया जाएगा।
पूसा परिसर और ICAR संस्थानों में भी व्यापक अभियान
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग और ICAR की ओर से बताया गया कि पूसा परिसर में व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान संचालित किया जा रहा है। इसमें अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। इसी तरह सभी ICAR संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) में भी स्वच्छता संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों और ग्रामीण समुदायों को स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन तथा पर्यावरणीय जागरूकता से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे स्वच्छता गतिविधियों को संस्थागत स्तर से आगे बढ़ाकर ग्रामीण समुदायों की दैनिक आदतों और व्यवहार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
स्वच्छता का स्थायी प्रभाव व्यवहार परिवर्तन से आएगा
शिवराज सिंह चौहान ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से स्वच्छता को अभियान की निर्धारित अवधि तक सीमित नहीं रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यालयों, गांवों, पंचायतों और कार्यस्थलों पर स्वच्छता को निरंतर व्यवहार का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता अभियान की सफलता केवल परिसरों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहार परिवर्तन, व्यापक जनभागीदारी और स्थायी परिणामों के माध्यम से इसका वास्तविक प्रभाव सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। (इनपुट: पीआईबी)


