भारत में स्मॉल और मीडियम रीट्स मार्केट के 75 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान : रिपोर्ट

भारत में स्मॉल एवं मीडियम रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (SM REITs) का बाजार 75 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है, जिसमें 500 मिलियन वर्ग फुट से ज्यादा के पात्र ऑफिस, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट शामिल होंगे। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

प्रीमियम ग्रेड-A प्लस ऑफिस एसेट निवेशकों की पहली पसंद

रियल एस्टेट कंसल्टिंग फर्म CBRE ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रीमियम ग्रेड-A प्लस ऑफिस एसेट निवेशकों की पहली पसंद बने रहेंगे। SM REITs फ्रैक्शनल ओनरशिप के लिए एक संरचित, पारदर्शी और स्केलेबल ढांचा उपलब्ध कराकर भारत के रियल एस्टेट निवेश परिदृश्य को नया रूप दे रहे हैं।

संगठित व कुशल रियल एस्टेट इकोसिस्टम के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका

CBRE के इंडिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के CEO अंशुमान मैगजीन ने कहा, “इस सेगमेंट से भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट के इंस्टीट्यूशनलाइजेशन को और मजबूत होने का अनुमान है। छोटे और मध्यम आकार के एसेट्स को एक विनियमित ढांचे के तहत लाने से SM REITs प्रॉपर्टी मैनेजमेंट के उच्च मानकों को बढ़ावा देने, ESG कंप्लायंस को प्रोत्साहित करने और अंततः एक अधिक संगठित व कुशल रियल एस्टेट इकोसिस्टम के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”

REITs कई सेक्टरों में आय उत्पन्न करने वाली रियल एस्टेट का स्वामित्व, संचालन या वित्तपोषण करते हैं। ये कम निवेश में यूनिट खरीदने की सुविधा देकर छोटे निवेशकों को उच्च-मूल्य वाले कमर्शियल रियल एस्टेट तक पहुंच प्रदान करते हैं। SM REITs आमतौर पर 50 करोड़ से 500 करोड़ रुपए मूल्य वाली मध्यम आकार की संपत्तियों को शामिल करते हैं।

उच्च-गुणवत्ता वाले पोर्टफोलियो की बुनियाद बनाते हैं

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निवेश-ग्रेड ऑफिस, जिनमें ग्रेड-A प्लस विशिष्टताओं वाले एसेट शामिल होते हैं, उच्च-गुणवत्ता वाले पोर्टफोलियो की बुनियाद बनाते हैं। CBRE इंडिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में कंसल्टिंग एवं वैल्यूएशन सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर रामी कौशल ने कहा कि SM REITs, डायरेक्ट ओनरशिप और बड़े पैमाने के REITs के बीच मौजूद महत्वपूर्ण अंतर को पाट सकते हैं।

उन्होंने कहा, “यह संरचना निवेशकों को स्थिर किराये की आय प्राप्त करने में मदद कर सकती है और उच्च गुणवत्ता वाले एसेट्स पर पूंजी वृद्धि से लाभ दिला सकती है। जैसे-जैसे बाजार विकसित हो रहा है, रेगुलेटरी वातावरण को समझने और उसका सही ढंग से उपयोग करने की क्षमता स्टेकहोल्डर्स के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।” (इनपुट: आईएएनएस)