पराली जलाने पर रोक के लिए युद्ध स्तर पर जुटें राज्य, किसानों को सस्ते विकल्प देना जरूरी: शिवराज सिंह चौहान

धान की कटाई और रबी फसलों की बुवाई के बीच कम समय को देखते हुए केंद्र सरकार ने पराली प्रबंधन को लेकर राज्यों को युद्ध स्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की सह-अध्यक्षता में मंगलवार को कृषि भवन में उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी समीक्षा बैठक हुई। इसमें पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने, कृषि मशीनों का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने और फसल अवशेषों को जैविक खाद, बिजली, बायो-सीएनजी तथा पशु चारे में बदलकर किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया।

पराली समस्या नहीं, किसान की आय बढ़ाने का माध्यम

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसे विकल्प उपलब्ध कराने होंगे, जो सस्ते, सुलभ और व्यावहारिक हों। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी के लाभकारी जीवों के साथ उसके पोषक तत्व भी नष्ट होते हैं। इसके विपरीत, फसल अवशेषों को खेत में मिलाने से जैविक खाद तैयार हो सकती है, जबकि खेत से बाहर ले जाकर उनका इस्तेमाल बायो-सीएनजी, बायो-इथेनॉल, बिजली और पशु चारे के उत्पादन में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल पराली की आग रोकना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें किसान को फसल अवशेष जलाने की जरूरत ही न पड़े और पर्यावरण अनुकूल खेती के जरिए कार्बन क्रेडिट जैसी संभावनाओं का लाभ भी मिले।

हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कमी, मध्य प्रदेश और राजस्थान पर चिंता

बैठक में पेश आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 53.3% और उत्तर प्रदेश में करीब 32% की कमी दर्ज की गई। पंजाब में भी घटनाओं में गिरावट आई है। हालांकि, मध्य प्रदेश और राजस्थान में पराली जलाने के मामलों में वृद्धि को लेकर चिंता जताई गई। चौहान ने दोनों राज्यों को प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान कर तत्काल विशेष कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धान की कटाई का बड़ा हिस्सा अभी बाकी है, इसलिए जिन राज्यों में घटनाएं कम हुई हैं, वहां भी निगरानी और कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

3.54 लाख से अधिक मशीनें उपलब्ध, पुरानी मशीनों की मरम्मत के निर्देश

चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार अब तक राज्यों को 3.54 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध करा चुकी है। वित्त वर्ष 2026-27 में 26,109 नई मशीनें भी दी गई हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि नई मशीनें वितरित करने के साथ पुरानी और बंद पड़ी मशीनों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें दोबारा चालू किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मशीनें केवल कागजों में उपलब्ध नहीं रहनी चाहिए, बल्कि खेतों में उनका शत-प्रतिशत उपयोग होना चाहिए। कस्टम हायरिंग सेंटर्स को सक्रिय करने और छोटे तथा सीमांत किसानों को रियायती दरों पर मशीनें उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया, ताकि संसाधनों की कमी के कारण किसान पराली जलाने को मजबूर न हों।

4,266 करोड़ रुपए से अधिक की केंद्रीय सहायता, पंजाब से यूसी जल्द भेजने को कहा

बैठक में बताया गया कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत वर्ष 2018-19 से 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को 4,266.47 करोड़ रुपए जारी किए। इसमें पंजाब को 2,056.50 करोड़ रुपए, हरियाणा को 1,171.71 करोड़ रुपए, उत्तर प्रदेश को 868.67 करोड़ रुपए और मध्य प्रदेश को 59 करोड़ रुपए मिले। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 592.57 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जिसमें से 430.87 करोड़ रुपए जारी हो चुके हैं। राशि के उपयोग की धीमी गति पर चिंता जताते हुए चौहान ने कहा कि किसानों तक समय पर संसाधन पहुंचना जरूरी है। उन्होंने पंजाब सरकार से पहले जारी धनराशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) तत्काल भेजने का आग्रह किया, ताकि योजना की अगली किस्त जारी करने में देरी न हो।

पराली से चारा, बिजली और जैव ईंधन बनाने पर जोर

कृषि मंत्री ने सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में पराली को पशु चारे के रूप में सुरक्षित संग्रहित कर जरूरतमंद पशुपालकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने थर्मल पावर प्लांटों में पराली से बने पेलेट्स के इस्तेमाल, कंप्रेस्ड बायो गैस और दूसरी पीढ़ी के बायो-इथेनॉल संयंत्रों के साथ किसानों की सीधी आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया। राज्यों से कहा गया कि स्वीकृत परियोजनाओं को बिना देरी जमीन पर उतारा जाए। साथ ही, पूसा-44 जैसी लंबी अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों के स्थान पर पूसा 2090 और पीआर126 जैसी कम अवधि वाली किस्मों को बढ़ावा देने की बात कही गई, ताकि धान की कटाई के बाद खेत खाली करने और अगली फसल बोने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

कलेक्टर मैदान में उतरें, माइक्रो-प्लानिंग से हो निगरानी

शिवराज चौहान ने कहा कि पराली प्रबंधन के लिए जिला स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। जिलाधिकारियों और कलेक्टरों को तत्काल बैठकें कर प्रभावित गांवों की पहचान, मशीनों की उपलब्धता, फसल अवशेषों के संग्रह और उनके उपयोग की सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी राज्यों की है, लेकिन केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक सहायता देने के लिए उनके साथ खड़ी है। कृषि विज्ञान केंद्रों, संबंधित मंत्रालयों और जिला प्रशासन से इस अभियान को साझा राष्ट्रीय संकल्प के रूप में आगे बढ़ाने की अपील की गई।

पंजाब और हरियाणा के संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी

भूपेंद्र यादव ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने पंजाब के संगरूर, तरनतारन, अमृतसर, पटियाला और गुरदासपुर तथा हरियाणा के कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और फतेहाबाद जैसे जिलों में विशेष निगरानी करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि फसल कटाई के रुझानों का आकलन कर संभावित घटनाओं का पहले से अनुमान लगाया जाए, ताकि समय रहते रोकथाम के उपाय किए जा सकें। पराली जलाने से संबंधित आंकड़ों को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के साथ जोड़कर निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर भी बल दिया गया।

दोपहर 3 बजे के बाद सैटेलाइट निगरानी के अंतराल पर नजर

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि पराली जलाने की निगरानी केवल उपग्रह आंकड़ों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। जिला कलेक्टरों को मौके पर जाकर आकलन करना चाहिए और प्रवर्तन कार्रवाई मजबूत करनी चाहिए। उपग्रह निगरानी में दोपहर 3 बजे के बाद उपग्रह के उपलब्ध न होने से पैदा होने वाले अंतराल के दौरान विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। इस अवधि में ग्राउंड पेट्रोलिंग और फ्लाइंग स्क्वॉड के जरिए निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया। यादव ने आगामी दिनों में फसल कटाई के संभावित समय और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली मौसम संबंधी परिस्थितियों पर नजर रखने की जरूरत भी बताई, ताकि कार्रवाई को परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी बनाया जा सके। (इनपुट: पीआईबी)