भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम के बीच मोबाइल डिवाइस और दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। जुलाई 2026 में देश में सक्रिय वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबरों की संख्या 1,204.01 मिलियन तक पहुंच गई। मोबाइल नेटवर्क अब डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन सेवाओं और नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस का अहम आधार बन चुके हैं। ऐसे में डिवाइस की पहचान और उसकी अखंडता सुनिश्चित करना सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल इकोसिस्टम के लिए जरूरी है। IMEI से छेड़छाड़ इसी संदर्भ में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती है।
IMEI से छेड़छाड़ क्यों चिंता का विषय
IMEI यानी इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी मोबाइल डिवाइस की पहचान से जुड़ा एक विशिष्ट नंबर है। इसमें छेड़छाड़ या इसके गलत इस्तेमाल से बदली हुई पहचान वाले डिवाइस का नेटवर्क पर इस्तेमाल संभव हो सकता है और डिवाइस की वास्तविक पहचान करना मुश्किल हो सकता है। इससे कानून लागू करने वाली एजेंसियों, उपभोक्ता सुरक्षा और दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा के सामने चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
IMEI के साथ गैर-कानूनी छेड़छाड़
किसी मोबाइल डिवाइस के IMEI को जानबूझकर हटाना, मिटाना या बदलना गैर-कानूनी है। इसी तरह ऐसे हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर का निर्माण, इस्तेमाल, तस्करी, नियंत्रण या कब्जा रखना भी अपराध की श्रेणी में आ सकता है, जिसके बारे में संबंधित व्यक्ति को पता हो कि उसे IMEI में इस तरह की छेड़छाड़ के लिए कॉन्फिगर किया गया है।
IMEI को समझना क्यों जरूरी
IMEI आम तौर पर 15 अंकों का विशिष्ट नंबर होता है, जिसके जरिए दूरसंचार नेटवर्क पर मोबाइल डिवाइस की पहचान की जाती है। इसके शुरुआती आठ अंक टाइप एलोकेशन कोड (TAC) होते हैं, जो डिवाइस के मॉडल या प्रकार की पहचान करते हैं।
IMEI का आवंटन कैसे होता है
ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (GSMA) TAC के वैश्विक आवंटन की देखरेख करता है। GSMA निर्माताओं और ब्रांड मालिकों को TAC आवंटित करता है। इसके बाद विनिर्माता अलग-अलग डिवाइस को विशिष्ट IMEI नंबर देते हैं।
डुअल-सिम फोन में कितने IMEI
डुअल-सिम मोबाइल फोन में आम तौर पर दो IMEI नंबर होते हैं। प्रत्येक सिम स्लॉट के लिए अलग IMEI नंबर होता है। उपयोगकर्ता अपने मोबाइल डिवाइस पर *#06# डायल करके IMEI नंबर देख सकते हैं।
IMEI को कैसे वेरिफाई करें
डिवाइस की जानकारी और IMEI को वेरिफाई करने के लिए उपयोगकर्ता संचार साथी पोर्टल या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा 14422 पर SMS के जरिए ‘KYM <15-अंकों का IMEI नंबर>’ भेजकर भी डिवाइस की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
डिवाइस सुरक्षा में सभी की जिम्मेदारी
सुरक्षित दूरसंचार इकोसिस्टम के लिए डिवाइस के पूरे लाइफसाइकिल यानी निर्माण से लेकर रोजमर्रा के इस्तेमाल तक सभी पक्षों की जिम्मेदारी जरूरी है। विनिर्माताओं, आयातकों, ब्रांड मालिकों, विक्रेताओं और नागरिकों को IMEI की अखंडता बनाए रखने में अपनी भूमिका निभानी होती है।
विनिर्माताओं की जिम्मेदारी
भारत में निर्मित संबंधित दूरसंचार डिवाइस के IMEI नंबरों को पहली बिक्री, टेस्टिंग, रिसर्च या किसी अन्य इस्तेमाल से पहले सरकार के पास पंजीकृत करना होता है। यह प्रक्रिया डिवाइस सेतु-इंडियन काउंटरफीटेड डिवाइस रिस्ट्रिक्शन (ICDR) पोर्टल के जरिए पूरी की जाती है। विनिर्माताओं को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि डिवाइस को सही, विशिष्ट और बिना छेड़छाड़ वाले IMEI नंबर दिए जाएं।
आयातकों के लिए जरूरी सावधानी
भारत में संबंधित दूरसंचार उपकरणों के आयात से पहले उनके IMEI नंबर केंद्र सरकार के पास पंजीकृत करने होते हैं। बिक्री, टेस्टिंग, आरएंडडी या अन्य उद्देश्यों के लिए आयात किए जाने वाले डिवाइस का पंजीकरण डिवाइस सेतु-ICDR पोर्टल के जरिए किया जाता है। आयातकों को यह सुनिश्चित करना होता है कि आयात किए गए डिवाइस पर सही और अधिकृत IMEI नंबर मौजूद हों।
विक्रेताओं और रीसेलर्स की भूमिका
रीसेलर्स और रिटेलर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिक्री के लिए रखे गए दूरसंचार डिवाइस पर सही और बिना छेड़छाड़ वाले IMEI नंबर हों। इस्तेमाल किए गए डिवाइस का कारोबार करने वालों को लेनदेन पूरा करने से पहले निर्धारित शुल्क देकर सरकारी केंद्रीय डेटाबेस से IMEI की जांच करनी चाहिए। इस डेटाबेस में छेड़छाड़ किए गए और ब्लैकलिस्टेड डिवाइस की जानकारी उपलब्ध होती है। छेड़छाड़ किए गए या कॉन्फिगर किए जा सकने वाले IMEI वाले डिवाइस की बिक्री या व्यापार पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
ब्रांड मालिकों की जिम्मेदारी
ब्रांड मालिकों को यह सुनिश्चित करना होता है कि उनके ब्रांड के तहत बेचे जाने वाले डिवाइस IMEI पंजीकरण और साइबर सुरक्षा से जुड़ी जरूरी शर्तों को पूरा करें। उनके ब्रांड के डिवाइस डिवाइस सेतु-ICDR पोर्टल पर सही तरीके से पंजीकृत होने चाहिए और संबंधित GSMA TAC से जुड़े होने चाहिए। बाजार में उतारे जाने वाले डिवाइस पर असली और अधिकृत IMEI होना भी जरूरी है।
नागरिक किन गतिविधियों से बचें
दूरसंचार विभाग नागरिकों को टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर और संसाधनों के साथ छेड़छाड़ या उनके गलत इस्तेमाल से जुड़ी गतिविधियों से बचने की सलाह देता है। इसमें कॉन्फिगर किए जा सकने वाले या छेड़छाड़ किए गए IMEI वाले मॉडेम, मॉड्यूल, सिम बॉक्स या अन्य उपकरणों का इस्तेमाल, उन्हें हासिल करना या असेंबल करना शामिल है।
सिम के गलत इस्तेमाल से बचना जरूरी
नागरिकों को नकली दस्तावेज, धोखाधड़ी, जालसाजी या किसी और की पहचान का इस्तेमाल कर सिम कार्ड हासिल नहीं करना चाहिए। अपने नाम पर जारी सिम कार्ड को ऐसे दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित, बेचने या सौंपने से भी बचना चाहिए, जो उसका गलत इस्तेमाल कर सकता है।
टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर में बदलाव से बचें
कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी (CLI) या अन्य टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर में बदलाव करने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन, वेबसाइट या किसी अन्य माध्यम का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे बदलाव नेटवर्क की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
संचार साथी से डिवाइस की जांच
नागरिक अपने मोबाइल हैंडसेट को वेरिफाई और सुरक्षित करने के लिए संचार साथी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह प्लेटफॉर्म डिवाइस के IMEI से जुड़ी जानकारी, जैसे ब्रांड, मॉडल और निर्माता, को वेरिफाई करने की सुविधा देता है। इससे डिवाइस की असलियत की जांच करने और संभावित जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है।
मोबाइल खरीदते समय बरतें सावधानी
उपभोक्ताओं को मोबाइल डिवाइस अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदना चाहिए और खरीद से पहले IMEI की जानकारी की जांच करनी चाहिए। डिवाइस को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत पासवर्ड, PIN या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करना चाहिए।
मरम्मत के लिए अधिकृत सेंटर चुनें
IMEI से छेड़छाड़ या किसी अन्य गलत गतिविधि के जोखिम को कम करने के लिए मोबाइल डिवाइस की मरम्मत अधिकृत सर्विस सेंटर से ही करवानी चाहिए। अनधिकृत तरीके से डिवाइस में हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर बदलाव कराने से सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
मोबाइल खोने या चोरी होने पर तुरंत कार्रवाई
डिवाइस खोने या चोरी होने की स्थिति में स्थानीय पुलिस के पास तुरंत रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए और शिकायत की एक कॉपी अपने पास रखनी चाहिए। इसके बाद दूरसंचार ऑपरेटर से खोए हुए मोबाइल नंबर के लिए डुप्लीकेट सिम लिया जा सकता है।
डिवाइस को ब्लॉक कराने की प्रक्रिया
संचार साथी के CEIR पोर्टल या मोबाइल ऐप पर डिवाइस को ब्लॉक करने का अनुरोध दर्ज किया जा सकता है। इसके लिए पुलिस रिपोर्ट और वैध पहचान पत्र अपलोड करना होता है, जिसके बाद एक विशेष अनुरोध आईडी मिलती है। ट्राई के नियमों के तहत दोबारा जारी किए गए सिम के एक्टिवेशन के बाद शुरुआती 24 घंटों में SMS सेवाएं सीमित रहती हैं। संचार साथी पर मोबाइल OTP वेरिफिकेशन की आवश्यकता होने के कारण अनुरोध जमा करने के लिए एक्टिवेशन के बाद 24 घंटे इंतजार करना पड़ सकता है।
डिवाइस मिलने पर अनब्लॉक कैसे करें
अगर खोया या चोरी हुआ मोबाइल बाद में मिल जाता है तो पहले स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना देनी चाहिए। इसके बाद संचार साथी पोर्टल पर अपनी अनुरोध आईडी का इस्तेमाल करके हैंडसेट को सुरक्षित तरीके से अनब्लॉक करने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
IMEI से छेड़छाड़ पर कानूनी प्रावधान
भारत में दूरसंचार इकोसिस्टम की सुरक्षा और अखंडता बनाए रखने के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 में टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर्स, जिनमें मोबाइल हैंडसेट और अन्य दूरसंचार डिवाइस के IMEI नंबर शामिल हैं, के साथ छेड़छाड़ पर कार्रवाई का प्रावधान है।
धारा 42 में सख्त प्रावधान
टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 की धारा 42(3)(c) टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर्स के साथ छेड़छाड़ पर रोक लगाती है। वहीं धारा 42(3)(e) धोखाधड़ी, जालसाजी या किसी और की पहचान का इस्तेमाल करके SIM या टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर हासिल करने पर रोक लगाती है।
उल्लंघन पर सजा का प्रावधान
इन प्रावधानों के उल्लंघन पर तीन साल तक की जेल, 50 लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। एक्ट की धारा 42(7) के तहत ऐसे अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हैं। धारा 42(6) के तहत ऐसे अपराधों में मदद या उकसाने वाले लोगों पर भी संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
डिजिटल भविष्य की सुरक्षा साझा जिम्मेदारी
भारत का तेजी से विस्तार करता दूरसंचार नेटवर्क डिजिटल अर्थव्यवस्था और नागरिक सेवाओं की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना बन चुका है। ऐसे में IMEI जैसे डिवाइस आइडेंटिफायर की अखंडता बनाए रखना केवल नियामकीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे डिजिटल इकोसिस्टम की साझा आवश्यकता है। मजबूत कानून, वेरिफिकेशन टूल, उद्योग की जिम्मेदारी और नागरिकों की जागरूकता मिलकर दूरसंचार नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में मदद कर सकते हैं। जागरूक और जिम्मेदार उपयोग से डिवाइस की पहचान से जुड़े गलत इस्तेमाल के जोखिम को कम करने और भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है। (इनपुट: पीआईबी)


