Print

मजबूत ग्रोथ के साथ महंगाई में बड़ी राहत, 2025-26 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर रही महंगाई: इकोनॉमिक सर्वे

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, भारत ने महंगाई के मोर्चे पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान औसत खुदरा महंगाई दर घटकर 1.7 प्रतिशत रह गई, जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला की शुरुआत के बाद सबसे निचला स्तर है। यह जानकारी संसद में वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए सर्वे में दी गई।

सर्वे में कहा गया है कि खुदरा महंगाई में यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन कीमतों में आई नरमी के कारण हुई है। ये दोनों श्रेणियां मिलकर भारत के CPI बास्केट का करीब 52.7 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं।

इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, 2025 में भारत ने प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज हेडलाइन महंगाई में गिरावट दर्ज की है, जो करीब 1.8 प्रतिशत अंकों की रही। खास बात यह है कि यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब 2025-26 की पहली छमाही में देश की GDP ग्रोथ 8 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि भारत ने महंगाई को काबू में रखते हुए मजबूत आर्थिक वृद्धि बनाए रखी है।

वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भी भारत की महंगाई प्रबंधन क्षमता की सराहना की है। S&P ने कहा कि महंगाई लक्ष्यीकरण नीति अपनाने से भारत को बड़ा लाभ मिला है और महंगाई अपेक्षाएं अब पहले की तुलना में बेहतर तरीके से नियंत्रित हैं। हाल के महीनों में CPI दर RBI के 2 से 6 प्रतिशत के लक्ष्य दायरे के निचले स्तर पर बनी हुई है।

वैश्विक स्तर पर भी महंगाई में नरमी देखी गई है। वर्ष 2022 में 8.7 प्रतिशत के शिखर से गिरकर 2025 में वैश्विक महंगाई दर 4.2 प्रतिशत पर आ गई। अमेरिका और यूरोप में भी ऊर्जा, खाद्य और कमोडिटी कीमतों में कमी से महंगाई दबाव घटा है। वहीं चीन में कमजोर घरेलू मांग के कारण डिफ्लेशन की स्थिति बनी रही।

देश के भीतर खुदरा महंगाई पिछले चार वर्षों में लगातार घटी है। 2022-23 में यह 6.7 प्रतिशत थी, जो दिसंबर 2025 तक घटकर 1.7 प्रतिशत पर आ गई। अक्टूबर 2025 में महंगाई दर 0.3 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इसका मुख्य कारण सब्जियों और दालों की कीमतों में भारी गिरावट रही, जिसे बेहतर मौसम, अधिक उत्पादन और सरकारी नीतिगत हस्तक्षेप का समर्थन मिला।

हालांकि, कोर महंगाई (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) में हल्की बढ़ोतरी देखी गई है। इसका बड़ा कारण सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में तेज उछाल है, जो वैश्विक अनिश्चितता के चलते सुरक्षित निवेश विकल्प बने हुए हैं। इन धातुओं को हटाने पर कोर महंगाई में भी नरमी का रुझान दिखता है।

खाद्य महंगाई जून 2025 से लगातार गिरते हुए कई महीनों तक नकारात्मक रही। आलू, प्याज, टमाटर और लहसुन जैसी सब्जियों की कीमतों में 20 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। साथ ही, दालों के मामले में बफर स्टॉक प्रबंधन और व्यापार नीतियों ने कीमतों को स्थिर रखने में मदद की। खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क घटाने से भी महंगाई पर नियंत्रण मिला।

क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो ग्रामीण महंगाई शहरी महंगाई से कम रही, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक दबाव घटा है। हालांकि ग्रामीण इलाकों में खाद्य वस्तुओं का हिस्सा ज्यादा होने के कारण उतार-चढ़ाव बना रहता है।

आगे के अनुमान को लेकर इकोनॉमिक सर्वे ने कहा है कि 2026-27 में महंगाई में हल्की बढ़ोतरी संभव है, लेकिन यह RBI के 2 से 6 प्रतिशत के लक्ष्य दायरे में ही रहेगी। मजबूत कृषि उत्पादन, स्थिर वैश्विक कमोडिटी कीमतें और सतर्क नीतियां महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद करेंगी। हालांकि मुद्रा उतार-चढ़ाव, धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक अनिश्चितताओं से जुड़े जोखिमों पर नजर बनाए रखने की जरूरत बताई गई है।