केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज मंगलवार को कहा कि देश और राज्यों की वित्तीय नीतियां राजनीति से अलग होनी चाहिए। उन्होंने नई दिल्ली में ‘नीति-एनसीएईआर स्टेट्स इकोनॉमिक फोरम’ पोर्टल के लॉन्च के दौरान यह बात कही। वित्त मंत्री ने जोर दिया कि जीएसटी काउंसिल संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए काम कर रही है, जहां विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्री मिलकर राजस्व बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करते हैं, लेकिन इसका भार आम जनता पर न पड़े, इसका भी ध्यान रखा जाता है।
सीतारमण ने कहा कि राजस्व बढ़ाना महत्वपूर्ण है ताकि देश के विकास से जुड़े कार्यक्रमों को सही तरीके से लागू किया जा सके, लेकिन इसके साथ जिम्मेदार ऋण प्रबंधन भी जरूरी है। उन्होंने दुनिया भर में बढ़ते कर्ज के मुद्दे पर चिंता जताई और कहा कि भारत भले ही सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है लेकिन कर्ज प्रबंधन आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा, “पूरी दुनिया में तेजी से आर्थिक विकास हासिल करने की कोशिशों के साथ-साथ कर्ज नियंत्रण की भी एक बड़ी चुनौती है। कई देश भारी कर्ज में डूब चुके हैं।”
वहीं वित्त मंत्री ने जीएसटी काउंसिल के कामकाज की सराहना की और कहा कि यहां राजनीतिक मतभेदों से हटकर आंकड़ों के आधार पर फैसले लिए जाते हैं। उन्होंने कहा, “जीएसटी काउंसिल के माध्यम से हम साबित कर पा रहे हैं कि सच्चाई पर आधारित निर्णय ही सबसे व्यावहारिक होते हैं। जब विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्री एक साथ बैठकर आंकड़ों का अध्ययन करते हैं, तो सभी मतभेद समाप्त हो जाते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि कई बार लोग सोचते हैं कि जीएसटी काउंसिल में तीखी बहस होती है, लेकिन यह जरूरी है क्योंकि अंततः सभी लोग तथ्यों के आधार पर सामूहिक रूप से निर्णय लेते हैं।
इस कार्यक्रम में नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के. बेरी, नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम और एनसीएईआर की महानिदेशक पूनम गुप्ता भी मौजूद रहीं। इस अवसर पर एक नया पोर्टल लॉन्च किया गया, जो 30 वर्षों (1990-91 से 2022-23) के आर्थिक, सामाजिक और वित्तीय आंकड़ों का व्यापक संग्रह प्रदान करता है। यह पोर्टल न केवल नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं को उपयोगी जानकारी देगा, बल्कि राज्यों की आर्थिक स्थिति को राष्ट्रीय स्तर पर तुलनात्मक दृष्टि से देखने में भी मदद करेगा।