केंद्र सरकार गन्ना अनुसंधान के लिए ICAR में विशेष टीम का करेगी गठन : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मंगलवार को घोषणा की कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) में गन्ना अनुसंधान और नीति के लिए एक अलग टीम बनाई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य किसानों और चीनी उद्योग के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा। शिवराज सिंह ने गन्ने के विकास से जुड़ी एक सेमिनार में बताया कि गन्ने की 238 किस्म उच्च चीनी उत्पादन देती है, लेकिन यह लाल सड़न रोग के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने एकल फसल के खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया, जैसे कि मिट्टी के पोषक तत्वों की कमी और नाइट्रोजन संधारण में कमी, और सुझाव दिया कि दाल और तिलहन जैसी फसलों के साथ इंटरक्रॉपिंग (साथ में उगाना) पर विचार किया जाए।

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने उत्पादन लागत कम करने, मशीनरी बढ़ाने, चीनी वसूली दर सुधारने, “per drop, more crop” के सिद्धांत के तहत कुशल सिंचाई अपनाने, बायोप्रोडक्ट्स और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने, और प्राकृतिक खेती अपनाकर उर्वरक पर निर्भरता कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने किसानों को भुगतान में देरी जैसी पुरानी समस्याओं को भी उजागर किया और कहा कि चूंकि मिलों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसका मुख्य प्रभाव किसानों पर पड़ता है। उन्होंने कृषि मजदूरों की कमी पर भी चिंता जताई और प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और मशीनरी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कृषि मंत्री ने कहा, “मैं ICAR से आग्रह करता हूं कि गन्ना अनुसंधान के लिए एक विशेष टीम बनाई जाए, जो व्यावहारिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे। अनुसंधान का लाभ किसानों और उद्योग दोनों को मिलना चाहिए। ऐसा अनुसंधान जो किसानों के काम न आए, उसका कोई अर्थ नहीं है।” ICAR के महानिदेशक और DARE सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने चार मुख्य अनुसंधान प्राथमिकताओं को उजागर किया। इसके तहत अनुसंधान एजेंडा तय करना, विकास और उद्योग से जुड़ी चुनौतियों से निपटना, और नीति संबंधी सुझाव देने पर चर्चा हुई। उन्होंने उर्वरक की दक्षता बढ़ाने, सूक्ष्म-सिंचाई (micro-irrigation) को बढ़ाने और फसल विविधीकरण पर जोर दिया, जिससे स्थिरता और किसानों की आय मजबूत हो।

वहीं डॉ. देवेंद्र कुमार यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), ने कहा कि 238 किस्म प्रारंभ में लोकप्रिय थी, लेकिन इससे एकल फसल के खतरे बढ़ते हैं। उन्होंने नई किस्मों के लिए तीन साल के परीक्षण चक्र और पैदावार अंतर (yield gaps) का विश्लेषण करने की आवश्यकता पर बल दिया। ICAR के डॉ. राजबीर सिंह ने भी सेमिनार में अपने विचार साझा किए। सेमिनार के अंत में यह आश्वासन दिया गया कि भविष्य की गन्ना अनुसंधान रणनीतियों में किसान-केंद्रित सिफारिशों को शामिल किया जाएगा।-(PIB)

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