कॉरपोरेट जगत गांवों और किसानों के कल्याण में योगदान दे: शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘डूइंग गुड फॉर भारत अवॉर्ड्स 2026’ और तीन दिवसीय ‘वन पर्पस इंडिया फोरम’ (ओपीआईएफ) के समापन समारोह में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय दर्शन, गांधीवादी ट्रस्टीशिप, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण सशक्तिकरण को समाज सेवा तथा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) की मूल भावना बताया। उन्होंने कॉरपोरेट जगत से शहरों की चकाचौंध के बीच गांव, गरीब और खेती को नहीं भूलने तथा समाज के वंचित वर्गों के कल्याण में योगदान देने का आह्वान किया।

भारतीय दर्शन में निहित है समाज कल्याण का संदेश

शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय चिंतन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति का मूल मंत्र ‘आत्मवत सर्वभूतेषु’, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो’ रहा है। महाभारत के यक्ष प्रश्न का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि मनुष्य यह जानते हुए भी कि संसार स्थायी नहीं है, सब कुछ केवल अपने लिए जुटाने में लगा रहता है। उन्होंने कहा कि हम इस दुनिया में एक धर्मशाला की तरह ठहरे हैं, इसलिए समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझना जरूरी है।

सीएसआर केवल कानूनी बाध्यता नहीं, सामाजिक दायित्व

महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि कॉरपोरेट जगत और संपन्न वर्ग को अपनी अर्जित संपत्ति को केवल स्वयं की संपत्ति नहीं समझना चाहिए। ईश्वर द्वारा बनाए गए जल, जंगल, जमीन और खनिज जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर पूरे समाज का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) केवल 2% खर्च करने की कानूनी मजबूरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व और प्रेम से उपजी सेवा भावना है। उन्होंने उद्योग जगत से समाज की संपत्ति के ‘ट्रस्टी’ के रूप में काम करने और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए आगे आने का आग्रह किया।

10 करोड़ महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं

ग्रामीण विकास की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए चौहान ने बताया कि देश में महिला स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) से 10 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं। इनमें से 3 करोड़ महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में बैंकों के माध्यम से इन समूहों के लिए 10 लाख करोड़ रुपए का लिंकेज सुनिश्चित किया गया है। इन महिला समूहों का गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात भी महज 1% के आसपास है। उन्होंने कॉरपोरेट जगत और परोपकारी संस्थाओं से अपील की कि वे सीएसआर के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ने में सहयोग दें, ताकि महिलाएं अपने उत्पादों की गुणवत्ता और बिक्री बढ़ाकर आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बन सकें।

पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण का आह्वान

शिवराज चौहान ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर देते हुए लोगों से जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और पूर्वजों की स्मृति में पेड़ लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर जताई चिंता

कृषि भूमि की बिगड़ती सेहत पर चिंता व्यक्त करते हुए चौहान ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि स्थिति यह है कि जमीन को उपजाऊ बनाने वाले केंचुए तक गायब हो रहे हैं। उन्होंने कृषि को स्वास्थ्य से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि वैज्ञानिकों के शोध को प्रयोगशालाओं से सीधे खेतों तक पहुंचाना होगा। ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा के जरिए वैज्ञानिक अनुसंधान को किसानों तक पहुंचाने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह अभेद्य और आत्मनिर्भर है।

‘असली हिंदुस्तान गांवों में बसता है’

कॉरपोरेट जगत से ग्रामीण भारत की जरूरतों को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए चौहान ने कहा, “शहरों की चमक-दमक में हमें गांव, गरीब और खेती को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि असली हिंदुस्तान हमारे गांवों में बसता है।” उन्होंने सामुदायिक कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, जल सुरक्षा और सामाजिक नवाचार के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए सरकार, उद्योग जगत और सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग आवश्यक है।

कॉरपोरेट और सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधि रहे मौजूद

समारोह में सीएसआरबॉक्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी भौमिक शाह, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अश्विन महालिंगम और नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल सहित कॉरपोरेट जगत, सामाजिक संस्थाओं और परोपकारी क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधि तथा विशेषज्ञ मौजूद रहे। तीन दिवसीय वन पर्पस इंडिया फोरम का समापन विकसित भारत के निर्माण में जनभागीदारी और संस्थागत सहयोग को लगातार मजबूत करने के साझा संकल्प के साथ हुआ। (इनपुट: आईएएनएस)