सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाकर ₹2.5 प्रति लीटर किया, डीजल पर घटाया शुल्क

केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल के निर्यात पर शुल्क घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, नई दरें शुक्रवार, 16 अक्टूबर से लागू हो गई हैं।

मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क पहले 0.5 रुपये प्रति लीटर था, जिसे बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल पर निर्यात शुल्क 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में होने वाले बदलावों के आधार पर हर पखवाड़े निर्यात शुल्क की समीक्षा करती है। हाल के महीनों में वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क में कई बदलाव किए गए हैं।

सितंबर में सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर विंडफॉल टैक्स और निर्यात शुल्क घटाए थे। उस समय पेट्रोल पर निर्यात शुल्क कम करके 0.5 रुपये प्रति लीटर किया गया था, जिसमें 0.5 रुपये प्रति लीटर का स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) शामिल था।

इससे पहले 1 सितंबर से लागू संशोधन में डीजल पर निर्यात लेवी 3 रुपये से घटाकर 1 रुपये प्रति लीटर की गई थी, जबकि डीजल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 24 रुपये से घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर किया गया था।

अगस्त में सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 2.5 रुपये से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर किया था। वहीं, डीजल पर कुल शुल्क 15.5 रुपये से बढ़ाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर निर्यात शुल्क 14.5 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर किया गया था।

सरकार ने जुलाई 2022 में पहली बार ईंधन के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते रिफाइनरी कंपनियों को हुए असाधारण मुनाफे पर टैक्स लगाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया था।

इसके बाद मार्च 2026 में अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने पर सरकार ने यह टैक्स दोबारा लागू किया था।

(इनपुट-आईएएनएस)