केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार की बहुवर्षीय और समग्र सेमीकंडक्टर नीति अब ज़मीनी स्तर पर ठोस नतीजे देने लगी है। उन्होंने बताया कि भारत धीरे-धीरे एक मजबूत और आत्मनिर्भर चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है।
सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना में शामिल सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन कंपनियों से बातचीत के बाद मंत्री ने कहा कि बैठक में कंपनियों की प्रगति, उनके तकनीकी नवाचार और घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमता को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर चर्चा की गई।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सेमीकंडक्टर कार्यक्रम की शुरुआत 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीर्घकालिक विज़न के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य केवल अलग-अलग योजनाएं लागू करना नहीं, बल्कि पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण करना है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को केवल सेवा आधारित अर्थव्यवस्था से आगे ले जाकर एक उत्पाद आधारित राष्ट्र बनाना है, जहां महत्वपूर्ण तकनीकों में देश की अपनी मजबूत क्षमता हो।
DLI योजना की सफलता का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि शुरुआत में इस योजना से सीमित उम्मीदें थीं, लेकिन अब इसके तहत 24 स्टार्टअप्स को समर्थन दिया जा रहा है। इनमें से कई कंपनियां अपने चिप डिज़ाइन का “टेप-आउट” पूरा कर चुकी हैं, उत्पादों को वैलिडेट कर चुकी हैं और बाजार में अपनी जगह बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह सफलता सरकार के उस दृष्टिकोण को साबित करती है, जिसमें स्टार्टअप्स की बड़ी चुनौतियों को दूर करने पर जोर दिया गया। सरकार ने उन्हें एडवांस डिजाइन टूल्स, आईपी लाइब्रेरी, वेफर सपोर्ट और टेप-आउट सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
मंत्री ने यह भी बताया कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत दिया जा रहा समर्थन दुनिया के सबसे व्यापक कार्यक्रमों में से एक है। अब सरकार इस योजना का विस्तार करने और अगले चरण में कम से कम 50 फैबलेस सेमीकंडक्टर कंपनियों को सक्षम बनाने की योजना बना रही है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी फैबलेस सेमीकंडक्टर कंपनियां तैयार करने में सफल होगा।
DLI योजना से जुड़ी कंपनियां कई क्षेत्रों में काम कर रही हैं, जिनमें निगरानी, नेटवर्किंग और एम्बेडेड सिस्टम के लिए स्वदेशी सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) और एप्लिकेशन-स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड सर्किट (ASIC) शामिल हैं।
इसके अलावा, ये कंपनियां RISC-V आधारित प्रोसेसर, IoT और एज कंप्यूटिंग के लिए AI-सक्षम कम बिजली खपत वाले चिप्स, टेलीकॉम और वायरलेस चिपसेट, पावर मैनेजमेंट आईसी और ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, अंतरिक्ष और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए समाधान विकसित कर रही हैं।
-(इनपुटःएजेंसी)


