भारत-ईयू एफटीए से निर्यात और नवाचार को नई गति, आईटी समेत कई क्षेत्रों में अवसर: वीर सागर

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला समझौता है। यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर कई देशों के साथ इस तरह का करार हुआ है, जो भारत के एक्सपोर्ट, इनोवेशन और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा। ये बातें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले एक्सपोर्ट प्रमोशन से जुड़े संगठन ईएससी (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल) के चेयरमैन वीर सागर ने बताई।

वीर सागर ने कहा कि इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भारत और ईयू अब बराबरी के आधार पर साथ काम करेंगे। खासतौर पर आईटी सेक्टर के नजरिए से यह डील बेहद अहम है। अब भारत सिर्फ मैनपावर या सप्लाई देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इनोवेशन, डिजाइनिंग, डेवलपमेंट, ऑटोमेशन और एआई जैसे क्षेत्रों में यूरोपीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करेगा।

उन्होंने बताया कि पहले काम या पढ़ाई के लिए यूरोप जाने में काफी दिक्कतें आती थीं। जरूरी परमिशन और अप्रूवल की प्रक्रिया जटिल थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी। इससे लोगों का आना-जाना आसान होगा और भारत-ईयू के बीच वर्क और एजुकेशन कोलेबोरेशन को मजबूती मिलेगी।

वीर सागर के अनुसार, यह समझौता मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लिए भी अहम साबित होगा, लेकिन यह एकतरफा नहीं होगा। दोनों पक्ष मिलकर काम करेंगे। कुछ हिस्से यूरोप में बनेंगे, कुछ भारत में और फिर मिलकर फाइनल प्रोडक्ट तैयार किया जाएगा। इससे संयुक्त उत्पादन और साझा जिम्मेदारी का मॉडल मजबूत होगा।

ईएससी चेयरमैन ने आगे कहा कि पहले भारत को कई बार केवल काम सौंपा जाता था, जैसा कि अमेरिका जैसे बाजारों में होता रहा है। अब भारत खुद डिजाइन, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट में बराबरी की भूमिका निभाएगा। यह बदलाव सिर्फ आईटी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऑटोमोबाइल, फार्मा, एग्रीकल्चर, बैंकिंग समेत कई सेक्टरों में देखने को मिलेगा।

उन्होंने कहा कि यह ट्रेड डील इसलिए भी संभव हो पाई, क्योंकि भारत अब वैश्विक सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बन चुका है। पहले भारत को ज्यादातर चीजें आयात करनी पड़ती थीं, लेकिन अब देश में ही बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग हो रही है। इसी वजह से यूरोपीय देश भारत को एक भरोसेमंद पार्टनर के रूप में देख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और ईयू की यह साझेदारी ज्ञान साझा करने, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देगी, जिससे न केवल भारत का एक्सपोर्ट बढ़ेगा, बल्कि देश की वैश्विक पहचान एक इनोवेशन हब और मैन्युफैक्चरिंग पावर के रूप में और मजबूत होगी।(इनपुट-आईएएनएस)

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