एक समय भारत के मध्य वर्ग को उसके सतर्क खर्चों, सीमित विकल्पों और छोटी महत्वाकांक्षाओं से पहचाना जाता था। आज यह वास्तविकता बदल चुकी है। बढ़ती आय, डिजिटल पहुंच और फैलते अवसरों के साथ ही आकांक्षाएं उपलब्धियों में बदल रही हैं। भारतीय समाज का यह तबका सरकार के समर्थन से लगातार सशक्त हो रहा है। वर्ष 2014 से आयकर छूट सीमाओं में रिकॉर्ड वृद्धि से लेकर जीएसटी सुधारों तक से उसकी बचत और खर्च करने योग्य आय बढ़ी है। अब यह मध्य वर्ग ज्यादा आत्मविश्वास के साथ सशक्त होकर भारत की विकास गाथा के केंद्र में खड़ा है।
किसे कहते हैं मध्य वर्ग?
मध्य वर्ग की परिभाषा क्रय शक्ति, शिक्षा के स्तर, सामाजिक सेवाओं और धन की अवधारणा के हिसाब से विभिन्न देशों के लिए अलग-अलग है। इस संबंध में विश्व बैंक के पैमाने को व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। विश्व बैंक प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) के आधार पर हर वर्ष अर्थव्यवस्थाओं का वर्गीकरण करता है। वित्त वर्ष 2026 के लिए देशों की आय का वर्गीकरण इस प्रकार है-
निम्न आयः 1135 डॉलर या इससे कम
निम्न मध्य आयः 1136 डॉलर से 4495 डॉलर तक
उच्च मध्य आयः 4496 डॉलर से 13935 डॉलर तक
उच्च आयः 13935 डॉलर से अधिक
यह वर्गीकरण वैश्विक अर्थव्यवस्था के अंदर मध्य वर्ग समेत आय समूहों के निर्धारण के लिए फ्रेमवर्क मुहैया कराता है।
भारतीय मध्य वर्ग का बदलता चेहरा
2010 में विश्व में मध्य वर्ग की आबादी का ज्यादातर हिस्सा आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) की अर्थव्यवस्थाओं में रहता था मगर इसमें तेजी से बदलाव आया है। वर्ष 2009 और 2017 के बीच मध्य वर्ग की आबादी 1.8 अरब से बढ़ कर 3.5 अरब हो गई है। इसका लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा मुख्यतः भारत और चीन समेत एशिया में है। वर्ष 2011 और 2019 के बीच भारत के प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 53 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इस दौरान (1995 और 2021 के बीच) भारत के मध्य वर्ग का प्रति वर्ष 6.3 प्रतिशत की दर से विस्तार हुआ। वर्तमान में देश में मध्य वर्ग कुल आबादी का लगभग 31 प्रतिशत है।
इस रुझान के बढ़ते जाने की उम्मीद है। ओईसीडी के अनुमानों के अनुसार 2030 और 2035 के बीच मध्य वर्ग की आबादी के लिहाज से चीन को भारत पीछे छोड़ देगा। यह स्थिति करोड़ों भारतीयों की बढ़ती आय, विस्तृत होते आर्थिक अवसरों और जीवन स्तर में सुधार को प्रतिबिंबित करती है। यह मजबूत उपभोक्ता मांग, खर्च करने की बढ़ती शक्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत के बढ़ते रसूख का संकेत भी है।
यह बढ़ता मध्य वर्ग वैश्विक मांग को नया आकार दे रहा है। यह शहरीकरण और उदीयमान शहरों के उभार से नजदीक से जुड़ा है जो वैश्विक जीडीपी विकास को संचालित करते हैं। स्वस्थ अर्थव्यवस्था और सामंजस्यपूर्ण समाज के लिए मजबूत मध्य वर्ग महत्वपूर्ण है। यह उपभोग को बढ़ाने के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और आवासन में निवेश करता है। यह टैक्स में योगदान और बेहतर सेवाओं की मांग के जरिए सार्वजनिक प्रणालियों को मजबूत करता है। मध्य वर्ग शिक्षा को प्राथमिकता देकर मानव पूंजी का निर्माण करने के साथ ही दीर्घकालिक उत्पादकता और आय में वृद्धि में मददगार है। यह उद्यमिता, नवोन्मेष और छोटे व्यवसायों के विकास को भी प्रेरित करता है।
मध्य वर्ग का सुदृढ़ीकरणः परिवर्तनकारी शासन के 12 वर्ष
सरकार ने पिछले 12 वर्षों में व्यापक सुधारों के माध्यम से भारत के मध्य वर्ग का सशक्तीकरण किया है। सरल कराधान तथा ज्यादा मजबूत बैंकिंग, बीमा और पेंशन प्रणालियों से वित्तीय सुरक्षा में वृद्धि हुई है। विस्तार लेते शहरी विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और अवसंरचना में सुधार से नए अवसर पैदा हुए हैं। बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच में सुधार, सुगम स्वास्थ्यसेवा, सुदृढ़ शिक्षा और कौशल विकास तथा बेजोड़ डिजिटल शासन से रोजमर्रा की सुविधाएं बेहतर हुई हैं। ये सभी कदम मिल कर संपत्ति सृजन और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करते हैं।
कराधान में कमी, बैंकिंग और बीमा में सुधार तथा पेंशन का विस्तार
सरकार ने पिछले 12 वर्षों में भारतीय मध्य वर्ग की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत किया है। कराधान में कमी, बैंकिंग तक पहुंच में सुधार, व्यापक बीमा कवरेज और पेंशन के विस्तार से वित्तीय तनाव में कमी आई है। रियायती ब्याज दरों और डिजिटल सुधारों से बचत, ऋण और वित्तीय योजना निर्माण ज्यादा सुगम और सुविधाजनक हो गया है। सरकार ने जुलाई, 2024 में आयकर अधिनियम, 1961 की विस्तृत समीक्षा की घोषणा की। जुलाई 2017 में लागू किया गया जीएसटी भारत का स्वतंत्रता के बाद का सबसे महत्वपूर्ण परोक्ष कर सुधार है। अप्रैल 2025 से प्रभावी यूपीएस से केद्र सरकार के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद सुरक्षा मजबूत हुई है। भारत प्रीमियम के पैमाने के हिसाब से विश्व के 10वें सबसे बड़े बीमा बाजार के रूप में उभरा है। इससे देश में विस्तृत होती वित्तीय सुरक्षा का पता चलता है। बीमा में मोटे तौर पर जीवन बीमा और गैर-जीवन बीमा शामिल हैं। वर्ष 2015 और 2025 के बीच, भारत में घर के लिए ऋण की ब्याज दरों में उल्लेखनीय गिरावट आई। अप्रैल 2015 में शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, सेवाओं और कृषि संबद्ध गतिविधियों के लिए 20 लाख रुपये तक का बिना गारंटी का ऋण प्रदान करती है।
शहरी विकास और कनेक्टिविटी का विस्तार
पिछले 12 वर्षों में, सरकार ने पूरे भारत में शहरी अवसंरचना और कनेक्टिविटी का विस्तार किया है। बेहतर आवास, तेज़ परिवहन और आधुनिक सार्वजनिक अवसंरचना ने रोज़मर्रा के शहरी जीवन को बेहतर बनाया है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार, रेलवे के आधुनिकीकरण और बढ़ती हवाई कनेक्टिविटी ने मध्यम वर्ग के लिए यात्रा को ज़्यादा सुरक्षित, तेज़ और किफ़ायती बना दिया है। आवास के लिए 2015 में शुरू की गई इस योजना ने करोड़ों लोगों को सुरक्षित आवास देकर उनकी ज़िंदगी बदल दी है। पीएमएवाई-यू 2.0 योजना इस काम को और आगे बढ़ाती है। इसे ‘सभी के लिए आवास’ मिशन के तहत (सितंबर 2024 से प्रभावी) शुरू किया गया था।
भारत के पास अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है, जिसने लाखों लोगों के रोज़ाना के सफ़र को पूरी तरह बदल दिया है। मेट्रो के विस्तार की गति 2014 से पहले के 0.68 किमी प्रति माह से बढ़कर आज लगभग 6 किमी प्रति माह हो गई है।
पिछले 12 सालों में, भारत में ट्रेन से सफ़र करना ज़्यादा सुरक्षित, तेज़, पर्यावरण के अनुकूल और आरामदायक हो गया है। भारतीय रेलवे के लिए बजट में मिलने वाली मदद 2014-15 के 32,000 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.78 लाख करोड़ रुपये हो गई है। भारत में हवाई यात्रा मध्यम-वर्गीय परिवारों के लिए ज़्यादा सुलभ और सुविधाजनक हो गई है। चालू हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 से बढ़कर 2026 में 165 हो गई है।
बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता में ज़बरदस्त बढ़ोतरी
स्वच्छता, बिजली, नल के पानी और खाना पकाने के स्वच्छ ईंधन तक बढ़ी हुई पहुँच ने भारत के मध्यम वर्ग के लिए सुविधा और जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया है। इसके अतिरिक्त, पिछले 12 वर्षों में, मज़बूत सार्वजनिक अवसंरचना ने शहरी और ग्रामीण, दोनों भारत में जीवन स्तर को बेहतर बनाया है। भारत में नल के पानी के कनेक्शन 2019 में 3.23 करोड़ से बढ़कर मई 2026 में 15.85 करोड़ हो गए, जो 390% से ज़्यादा की बढ़ोतरी दिखाता है। तीव्र शहरीकरण ने प्रभावी अपशिष्ट, कचरा और सीवेज प्रबंधन की मांग को बढ़ा दिया है। इस समस्या से निपटने के लिए, सरकार ने अक्टूबर 2014 में ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी’ की शुरुआत की थी।
बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन में हुए बड़े विस्तार से पूरे देश में बिजली की उपलब्धता मज़बूत हुई है। इसके परिणामस्वरूप, ऊर्जा की कमी वित्त वर्ष 2013-14 के 4.2% से तेज़ी से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में सिर्फ़ 0.03% रह गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवा
देश भर में लाखों परिवारों के लिए किफायती स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच में काफी विस्तार हुआ है। पिछले बारह वर्षों में दवाओं की कम कीमतें, व्यापक बीमा कवरेज और बेहतर उपचार सुविधाओं ने स्वास्थ्य सेवा से जुड़े बोझ को कम किया है। निवारक देखभाल, रोग नियंत्रण और मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना ने भी मध्यम वर्ग के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ाया है।
मोटापे और खान-पान से जुड़ी बीमारियों से निपटने के लिए अस्पतालों से इतर कदम उठाने की आवश्यकता है। भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक—एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) शुरुआत से ही इस पर काम कर रहा है, जिससे भोजन के उत्पादन, बिक्री और उपभोग के तौर-तरीकों को नया रूप दिया जा सके। 2015 के बाद इस योजना में काफी बदलाव किए गए। इसका उद्देश्य जन औषधि केंद्रों के ज़रिए काफी कम कीमतों पर, गुणवत्ता पूर्ण जेनेरिक दवाएँ उपलब्ध कराना है। फ़िलहाल, 18,000 से ज़्यादा जन औषधि केंद्र 50-80% कम कीमतों पर अच्छी गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएँ उपलब्ध करा रहे हैं।
शिक्षा, उद्यमिता और कौशल विकास को सुदृढ़ीकरण
पिछले बारह वर्षों में, पूरे देश में शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता के अवसर काफ़ी बढ़े हैं। मज़बूत संस्थानों, ऋणों तक व्यापक पहुँच और उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण ने करियर के अवसरों को बेहतर बनाया है। इन प्रयासों ने नवाचार को बढ़ावा दिया है, स्वरोज़गार को प्रोत्साहित किया है और भारत के मध्यम वर्ग के लिए सामाजिक-आर्थिक उन्नति को मज़बूत किया है।
2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, भारत के लिए सामाजिक और आर्थिक प्रगति के केंद्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है। वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के 14.71 लाख स्कूल 24.69 करोड़ से अधिक छात्रों और 1.01 करोड़ शिक्षकों को सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
वर्ष 2014 में भारत में 16 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) थे। बाद के वर्षों में 7 नए आईआईटी जोड़े जाने के साथ, इनकी कुल संख्या बढ़कर 23 (2025) हो गई। पिछले एक दशक में (2025-26 तक) छात्रों की संख्या भी दोगुनी होकर 65,000 से 1.35 लाख हो गई है। 2024 में शुरू की गई यह पहल, मेधावी छात्रों को सहायता प्रदान करने के लिए बनाई गई है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि पैसों की कमी उच्च शिक्षा तक पहुँच में बाधा न बने। चिकित्सा के बुनियादी ढांचे के विस्तार से मध्यम वर्ग के लिए अच्छी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ और किफायती बना दिया है। 31 मार्च 2026 तक 2,045 से अधिक मेडिकल कॉलेज खोले जा चुके हैं—जिनमें 818 एलोपैथी, 323 डेंटल (दंत चिकित्सा) और 942 आयुष कॉलेज शामिल हैं। ‘एम्स’ की संख्या भी तीन गुनी हो गई है—देश भर में 23 एम्स चल रहे हैं।
अधिक सुविधा के लिए निर्बाध डिजिटल शासन
भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) पहचान, बैंकिंग और कनेक्टिविटी के सोच-समझकर किए गए एकीकरण के ज़रिए विकसित हुआ। इसने ‘जैम ट्रिनिटी’ का रूप लिया, जन धन खाते, आधार और मोबाइल की व्यापक पहुँच संभव हुई। इन तीनों ने मिलकर भारत के डिजिटल बदलाव की नींव रखी, जिससे नागरिकों और सरकार के बीच सीधे और सत्यापित किए जा सकने वाले संपर्क स्थापित हो सके। जैम ट्रिनिटी‘- प्रधानमंत्री जन धन योजना को 2014 में ‘वित्तीय समावेशन के लिए राष्ट्रीय मिशन’ के रूप में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य भारत के हर ऐसे वयस्क को, जिसके पास बैंक खाता नहीं है, एक बैंक खाता, एक वित्तीय पहचान और क्रेडिट, बीमा तथा पेंशन जैसी ज़रूरी सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराना है। आधार ने पूरे देश के निवासियों के लिए बायोमेट्रिक पर आधारित एक डिजिटल पहचान प्लेटफ़ॉर्म पेश किया। इसने सेवाओं की कुशल डिलीवरी के लिए विशिष्ट पहचान और सुरक्षित प्रमाणीकरण को संभव बनाया। 2015 में शुरू किए गए ‘डिजिलॉकर’ का उद्देश्य नागरिकों के डिजिटल दस्तावेज़ वॉलेट में प्रामाणिक डिजिटल दस्तावेज़ों तक पहुँच प्रदान करके उनका ‘डिजिटल सशक्तिकरण’ करना है।
‘उमंग‘ ऐप– 2017 में शुरू किया गया ‘उमंग’ (यूनिफाइड मोबाइल एप्लीकेशन फॉर न्यू-एज गवर्नेंस) ऐप भारत में मोबाइल शासन को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
विकास का आधार: मध्यम वर्ग का सशक्तिकरण
पिछले बारह वर्षों में, सरकार मध्यम वर्ग के उत्थान के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध रही है। इसकी नीतियों और सुधारों ने लाखों परिवारों के लिए रोज़मर्रा की चुनौतियों को आसान बनाया है। इन्होंने वित्तीय सुरक्षा, आवास की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवा और कौशल विकास के अवसरों को मज़बूत किया है। ये प्रयास भारत की विकास गाथा में मध्यम वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाते हैं। निष्पक्षता और सुलभता को बढ़ावा देकर, सरकार ने मध्यम-आय वाले परिवारों के बीच अधिक विश्वास जगाया है। इस निरंतर दृष्टिकोण ने लोगों के जीवन को बेहतर बनाया है और भविष्य की प्रगति के लिए एक मज़बूत नींव रखी है।


