प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस आत्मनिर्भर भारत का आह्वान कर रहे हैं, उसका मूल उद्देश्य केवल आर्थिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है। यह संदेश देश की घरेलू क्षमताओं को सशक्त बनाने, आयात पर निर्भरता घटाने और स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ विकास की दिशा को व्यापक सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ता है, जिसमें महात्मा गांधी की ‘स्वदेशी अपनाओ’ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की ‘अंत्योदय’ की परिकल्पना स्पष्ट तौर पर समाहित है।

आत्मनिर्भर भारत की यह यात्रा जब गहराई से देखी जाए तो इसके केंद्र में ‘स्वदेशी’ का गौरव और ‘अंत्योदय’ का दर्शन स्पष्ट दिखाई देता है। यानी विकास की रफ़्तार केवल बड़े उद्योगों और आधुनिक तकनीक तक सीमित न रहकर, हर नागरिक के बुनियादी कल्याण, शिक्षा और सामाजिक न्याय को भी साथ लेकर चलती है।

बीते एक दशक में भारत की अनथक विकास यात्रा में वंचितों और पिछड़े हुए लोगों को ध्यान में रखकर जो योजनाएं बनाई गईं और उन्हें धरातल पर उतारा गया, वह इस दृष्टिकोण का सशक्त प्रमाण है। यही सोच हमारे देश को ‘अंत्योदय से आत्मनिर्भर भारत’ तक पहुंचाने की शक्ति देती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दिशा में ठोस सुधारों और नीतियों का मार्ग प्रशस्त किया है। 2017 में लागू जीएसटी और टैक्स सुधार ने दशकों पुरानी जटिल कर व्यवस्था को सरल कर दिया और हर भारतीय को राहत पहुंचाई। इसके बाद जीएसटी 2.0 ने गरीब, किसान, मध्यमवर्ग और उद्योगों को और अधिक लाभ दिया।

‘ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस’ सुधारों ने भारत के उद्योग जगत को नई रफ्तार दी। वर्ष 2014 में विश्व बैंक की रैंकिंग में भारत 190 देशों में 142वें स्थान पर था लेकिन नियामकीय सुधारों और परमिट, टैक्सेशन, बिजली कनेक्शन और कॉन्ट्रैक्ट एनफोर्समेंट जैसी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के बाद 2020 तक भारत 63वें स्थान पर पहुंच गया। इसका नतीजा यह हुआ कि निवेशकों का भरोसा बढ़ा और उद्योगों की गति तेज़ हुई।

मेक इन इंडिया पहल ने देश को सिर्फ उपभोग के बाज़ार से उत्पादन और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाया। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रक्षा उपकरण जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश आए। मोबाइल उद्योग इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है। 2014 तक भारत में मोबाइल निर्माण नगण्य था और बाज़ार पूरी तरह आयातित उपकरणों पर निर्भर था। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माण केंद्र बन चुका है। एप्पल, सैमसंग और शाओमी जैसी कंपनियां प्रमुख मॉडल भारत में बना रही हैं। इससे आयात पर निर्भरता घट गई, लाखों रोजगार पैदा हुए और 2023-24 में मोबाइल निर्यात 15 बिलियन डॉलर से अधिक रहा और 2024-25 में 24 बिलियन डॉलर तक पहुंच।

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी के विज़न में ‘चिप से लेकर शिप तक’ सब कुछ देश में बनाने की महत्वाकांक्षा शामिल है। सेमीकंडक्टर निर्माण और डिफेंस इंडस्ट्री में तेजी से आत्मनिर्भर होते भारत की कहानी प्रधानमंत्री मोदी के इस विजन को साकार होने की गवाही देती है। 2014 तक भारत सबसे बड़ा हथियार आयातक था लेकिन 2023-24 में रक्षा निर्यात 21,000 करोड़ तक पहुंच गया। तेजस लड़ाकू विमान, आकाश मिसाइल और पिनाका रॉकेट लॉन्चर अब भारत की ताक़त का प्रतीक हैं।

शिपबिल्डिंग में भी भारत आत्मनिर्भर हो रहा है। कोचीन शिपयार्ड में स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत का निर्माण इस दिशा की बड़ी उपलब्धि है। उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना से मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन और ऑटोमोबाइल उद्योगों को मजबूती मिली। एप्पल जैसी कंपनियों का भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन यह संदेश दे रहा है कि भारत अब वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बन रहा है।

गुणवत्ता पर सख्ती और समझौता न करने का दृष्टिकोण भी आत्मनिर्भर भारत की नींव है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने कई उत्पादों में वैश्विक मानक लागू किए हैं। वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट पहल देश के हर जिले की विशिष्ट पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में है। निर्यातकों को प्रशिक्षण, प्रमाणन और अनुसंधान सहयोग दिया जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत का असली मकसद अंत्योदय है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से जोड़ा है। जनधन योजना के माध्यम से अब तक 55 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए, उज्वला योजना से 10.33 करोड़ महिलाओं को गैस कनेक्शन मिला और पीएम स्वानिधि के तहत लाखों रेहड़ी-पटरी वालों को बिना गारंटी कर्ज़ प्रदान किया गया। गति शक्ति योजना के ज़रिए ग्रामीण और छोटे कस्बों तक विकास पहुंचा है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत अब अकेला नहीं बल्कि अग्रणी है। 2022-23 में भारत का माल निर्यात 451.07 बिलियन डॉलर से अधिक रहा। फार्मा सेक्टर में भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा निर्माता और टीका आपूर्तिकर्ता है। स्टार्टअप इंडिया के तहत भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। डिजिटल इंडिया और UPI की सफलता इसे और प्रमाणित करती है।

कुल मिलाकर, यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी का आत्मनिर्भर भारत केवल आर्थिक स्वतंत्रता का संदेश नहीं है बल्कि सामाजिक न्याय, अंत्योदय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संतुलन का विज़न है। मेक इन इंडिया से लेकर INS विक्रांत तक, सेमीकंडक्टर मिशन से लेकर उज्ज्वला और जनधन योजना तक हर पहल भारत को ‘निर्भरता’ से ‘सशक्तता’ की ओर ले जा रही है।

-(वरिष्ठ पत्रकार अमित शर्मा की राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे प्रसार भारती न्यूज सर्विस के साथ जुड़े हैं।)