आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से फैलते प्रभाव, रहने-सहने की बढ़ती लागत और फ्लेक्सिबल काम की मांग भारत की जेनरेशन Z को पारंपरिक नौकरी मॉडल से दूर ले जा रही है। युवा अब एक ही एम्प्लॉयर पर निर्भर रहने की बजाय कमाई के कई ज़रिया बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। इंटरनेशनल वर्कप्लेस ग्रुप (IWG) की नई रिपोर्ट में इस ट्रेंड को साफ तौर पर रेखांकित किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z प्रोफेशनल्स “पोर्टफोलियो करियर” बना रहे हैं, जिसमें फुल-टाइम जॉब के साथ-साथ फ्रीलांसिंग, गिग प्रोजेक्ट्स और साइड इनकम के अन्य रास्ते शामिल हैं। AI को लेकर चिंता, स्किल्स को लेकर सक्रियतारिपोर्ट में पाया गया कि 55 प्रतिशत Gen Z का मानना है कि AI उनके करियर को पूरी तरह बदल देगा।
इस अनिश्चितता के जवाब में कई युवा सक्रिय रूप से नई स्किल्स सीख रहे हैं और अपनी इनकम को विविधतापूर्ण बना रहे हैं, ताकि जॉब मार्केट में बदलाव आने पर वे खुद को आसानी से ढाल सकें। इंटरनेशनल वर्कप्लेस ग्रुप (IWG) ने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत की गिग और प्लेटफॉर्म इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2020-21 में इसमें 7.7 मिलियन वर्कर्स थे, जो 2029-30 तक बढ़कर 23.5 मिलियन होने की उम्मीद है।
फ्लेक्सिबिलिटी अब प्राथमिकता
रिपोर्ट में Gen Z के करियर फैसलों के पीछे मुख्य वजहों का भी जिक्र है:
– 30 प्रतिशत ने पिछले तीन साल में नौकरी बदलने का कारण ज्यादा सैलरी बताया।
– 43 प्रतिशत ने इसी दौरान 2-3 बार अपनी भूमिकाएं बदलीं।
– 24 प्रतिशत ने कहा कि हाइब्रिड वर्क से बचने वाला समय उन्हें पर्सनल प्रोजेक्ट्स और अतिरिक्त कमाई पर लगाने का मौका देता है।
– 20 प्रतिशत ने मुख्य नौकरी छोड़े बिना नए अवसर आजमाने की बात कही।
IWG के अनुसार, AI रूटीन और दोहराव वाले कामों को संभाल रहा है, जिससे क्रिएटिविटी, इमोशनल इंटेलिजेंस और ह्यूमन स्किल्स की अहमियत बढ़ गई है। इसी बदलते माहौल में Gen Z ज्यादा वित्तीय सुरक्षा और फ्लेक्सिबिलिटी चाहती है।
AI, महंगाई और गिग इकोनॉमी के संयुक्त प्रभाव से भारत का कामकाजी माहौल तेजी से बदल रहा है। Gen Z अब लंबे समय तक एक ही कंपनी पर निर्भर रहने की पुरानी सोच को छोड़कर, अनुकूलनशीलता और बहु-आय स्रोतों पर भरोसा कर रही है। यह ट्रेंड न सिर्फ युवाओं के करियर पैटर्न को नया रूप दे रहा है, बल्कि पूरे रोजगार इकोसिस्टम को भी नया आकार देने जा रहा है। (इनपुट-एजेंसी)


