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पीएम मोदी और शी जिनपिंग की वार्ता में व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन और बाजार पहुंच पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को नई दिल्ली में हुई मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं और एक-दूसरे के बाजारों तक सार्थक एवं पूर्वानुमेय पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय ने बैठक के बाद बताया कि दोनों नेताओं ने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को संतुलित एवं टिकाऊ बनाने से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

लोगों के बीच संपर्क और व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने पर जोर

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संपर्क में हुई प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संबंधों और दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही को और बढ़ावा देने की जरूरत पर भी जोर दिया।

संरचनात्मक व्यापार असंतुलन दूर करने पर सहमति

आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं और एक-दूसरे के बाजारों तक बेहतर, भरोसेमंद और पूर्वानुमेय पहुंच सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों के समाधान की आवश्यकता पर सहमति जताई।

सात साल बाद भारत आए हैं शी जिनपिंग

यह द्विपक्षीय बैठक नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई। करीब सात वर्षों बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा है। साथ ही, यह लगातार तीसरा वर्ष है जब पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी की मुलाकात हुई है। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात कजान और तियानजिन में हुई थी।

रणनीतिक दृष्टिकोण से संबंध आगे बढ़ाने की बात

बैठक के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत ने द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक विकास को रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद होने के बावजूद वे साझा विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग और समर्थन करने में सक्षम रहे हैं।

पीएम मोदी ने चीन के सहयोग के लिए जताया आभार

पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग और समर्थन के लिए राष्ट्रपति शी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के पास द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा करने का अवसर है।

112 अरब डॉलर से ज्यादा हुआ व्यापार घाटा

भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2024-25 में यह 99.21 अरब डॉलर था। बढ़ते व्यापार घाटे ने दोनों देशों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाने की जरूरत को प्रमुख बना दिया है।

चीन को भारत का निर्यात भी बढ़ा

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन को निर्यात 36.62% बढ़कर 19.47 अरब डॉलर रहा, जबकि चीन से आयात 16.03% बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया। आयात में तेज बढ़ोतरी के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा और बढ़ गया।

151 अरब डॉलर के पार पहुंचा द्विपक्षीय व्यापार

इसी अवधि में भारत और चीन के बीच कुल वस्तु व्यापार 18.31% बढ़कर 151.10 अरब डॉलर पहुंच गया। चीन अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। हालांकि, व्यापार असंतुलन केवल उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़ा मुद्दा नहीं है। भारत चीन से बड़ी मात्रा में औद्योगिक कच्चा माल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कंप्यूटर और पूंजीगत सामान आयात करता है, जिनका इस्तेमाल भारतीय उद्योगों में उत्पादन और रोजगार सृजन के लिए होता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी आयात में चीन की बड़ी हिस्सेदारी

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और ऑर्गेनिक केमिकल्स जैसे चार प्रमुख क्षेत्र भारत के चीन से होने वाले आयात का करीब 66% हिस्सा हैं। भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का करीब 43% और मशीनरी एवं कंप्यूटर आयात का करीब 40% चीन से करता है।

महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता

रिपोर्ट के अनुसार, भारत छह महत्वपूर्ण खनिजों की अपनी जरूरत का 40% से अधिक हिस्सा चीन से आयात करता है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल और रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन चीन पर काफी हद तक निर्भर रहती है। ऐसे में चीन की ओर से इन महत्वपूर्ण निर्यातों पर रोक या प्रतिबंध लगाए जाने की स्थिति में भारत की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।

भारतीय बाजार में निवेश बढ़ाने की चीन की उम्मीद

दूसरी ओर, चीन भारत से निवेश नियमों में ढील की उम्मीद कर रहा है, ताकि उसकी कंपनियां तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में अधिक निवेश कर सकें। ऐसे में दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच, निवेश और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दे द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। (इनपुट: आईएएनएस)