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पारंपरिक चिकित्सा पर वैज्ञानिक शोध के लिए त्रिपक्षीय समझौता

पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) के केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान और ए एंड यू तिब्बिया कॉलेज एवं अस्पताल के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया गया है।

यह समझौता 6 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हस्ताक्षरित किया गया। इसके तहत “वसंतिक वमन का चयापचय, सूजन और माइक्रोबायोम संकेतकों पर प्रभाव” विषय पर एक संयुक्त शोध परियोजना शुरू की जाएगी।

अध्ययन का उद्देश्य

इस शोध का उद्देश्य स्वस्थ वयस्कों में वसंतिक वमन नामक आयुर्वेदिक उपचार पद्धति के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन करना है। इसके तहत शरीर के चयापचय, सूजन से जुड़े संकेतकों और माइक्रोबायोम में होने वाले बदलावों का विश्लेषण किया जाएगा।

यह अध्ययन आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समारोह में मौजूद रहे विशेषज्ञ

समझौते के दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की ओर से केदार सिंह, अरुण खरात और अमल चंद्र मौजूद रहे। वहीं केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान की ओर से हेमंत पाणिग्रही, बबीता यादव, शैज़ी लईक और रेनु रानी भी उपस्थित थीं।

इस साझेदारी से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के वैज्ञानिक अध्ययन को मजबूती मिलने और समेकित स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई गई है।