केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने त्रिपुरा के लिए 21 एकलव्य विद्यालयों को मंजूरी दी है, जिनमें से 6 बहुत जल्द खुलने वाले हैं, और शेष विद्यालय अगले वर्ष तक तैयार हो जायेंगे। इन 6 स्कूलों के जुड़ने से राज्य में एकलव्य मॉडल विद्यालयों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो जाएगी। पूर्वोत्तर भारत को आगे बढ़ाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
त्रिपुरा के आदिवासी कल्याण मंत्री विकास देबबर्मा ने जानकारी दी है कि अगस्त में त्रिपुरा में 6 नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) शुरू हो जाएंगे। ये विद्यालय विशेष रूप से कक्षा 6 से 12 तक के आदिवासी छात्रों के लिए डिजाइन किए गए हैं, जहां उन्हें निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है।
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय विशेष रूप से आदिवासी समुदायों के छात्रों के लिए डिजाइन किए गए हैं और इनका उद्देश्य उनकी जड़ों से उनके जुड़ाव को मजबूत करना है। देबबर्मा ने कहा कि ‘हम एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं जो सिर्फ नौकरी करने वाले न हों, बल्कि समाज के नेता भी हों। उन्हें अपनी संस्कृति, इतिहास और पहचान का सम्मान करना चाहिए और उस पर गर्व करना चाहिए।’
वर्तमान में 6 मौजूदा ईएमआरएस में 2700 आदिवासी छात्र पढ़ते हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा संचालित तीन ‘आश्रम’ आवासीय विद्यालय भी हैं जिनमें कुल शिक्षा के साथ साथ संस्कृति को संजोने का काम करते हैं और पिछड़ी हुई इन जनजातियों के लिए रोजगार का रास्ता खोलते हैं। ये एवलव्य मॉडल स्कूल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से उनमें आत्म-सम्मान की भावना जगाने में मदद कर रहे हैं।
त्रिपुरा सरकार को आशा है कि आवासीय विद्यालयों की स्थापना से आदिवासी बच्चे अधिक संख्या में स्कूल में दाखिला लेंगे व स्कूल छोड़ने का रेट भी घटेगा। इसी साल अप्रैल में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत त्रिपुरा में 76.47 करोड़ रुपये के निवेश से कुल 84.352 किलोमीटर लंबी 25 सड़कों को भी मंजूरी दी गई है। इससे पहले 114.32 करोड़ रुपये की लागत से 118.756 किलोमीटर लंबी 42 सड़कों को मंजूरी दी गई थी। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) का लक्ष्य 18 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को कवर करना है।
पीएम-जनमन योजना को 3 वर्षों में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों और बस्तियों को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण तक बेहतर पहुंच, सड़क एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी, अविद्युतीकृत परिवारों का विद्युतीकरण और सतत आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए शुरू किया गया है।
-(लेखिका आशिका सिंह का पत्रकारिता जगत में 18 वर्षों का अनुभव है, वर्तमान में वे प्रसार भारती न्यूज सर्विस के साथ जुड़ी हैं।)


