त्रिपुरा का कायाकल्प: पर्यटन मानचित्र से गुम राज्य अब बन रहा उत्तर-पूर्व का चमकता सितारा

अगर कुछ वर्षों पहले किसी से पूछा जाता कि उत्तर-पूर्व भारत में पर्यटन के लिए कौन-सा राज्य प्रमुख है, तो शायद ही किसी की ज़ुबान पर त्रिपुरा का नाम आता। कभी पर्यटन के मानचित्र पर लगभग अदृश्य रहा यह राज्य अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘डबल इंजन सरकार’ के विकास मॉडल के तहत नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। हालिया आँकड़े बताते हैं कि त्रिपुरा में घरेलू पर्यटकों की संख्या में 64 प्रतिशत और विदेशी पर्यटकों में 36 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

पर्यटन में रिकॉर्ड वृद्धि

वर्ष 2023 से 2024 के बीच, घरेलू पर्यटक आगमन 3.66 लाख से बढ़कर 6.01 लाख तक पहुँच गया, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या 0.67 लाख से बढ़कर 0.91 लाख तक पहुँची। इस तेज़ी से हुई वृद्धि ने त्रिपुरा को सिक्किम के बाद उत्तर-पूर्व का दूसरा सबसे अधिक विदेशी पर्यटकों वाला राज्य बना दिया है।

राज्य के पर्यटन मंत्री सुशांत चौधरी के अनुसार, यह सफलता केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल, बेहतर बुनियादी ढांचे, सड़कों और पर्यटन स्थलों के विकास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि जिन स्थलों को वर्षों तक उपेक्षित रखा गया था, उन्हें अब विकसित कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जा रहा है।

डबल इंजन सरकार का असर

पिछली सरकारों के दौरान जिन परियोजनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया, अब वही स्थल पुनर्जीवित हो रहे हैं। मंत्री चौधरी ने बताया कि हाल ही में उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और DoNER मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से नई पर्यटन परियोजनाओं को लेकर मुलाक़ात की है, ताकि राज्य के पर्यटन विकास को और गति दी जा सके।

राज्य सरकार अब पर्यटक लॉजों और होमस्टे को आधुनिक रूप देने पर काम कर रही है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिलें।

नई परियोजनाएँ और अवसर

पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, त्रिपुरा में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी का मुख्य कारण बेहतर सड़क संपर्क, उन्नत आवास सुविधाएँ और सांस्कृतिक आकर्षणों का विकास है।
राज्य सरकार अब पुरातन मंदिरों के पुनरुद्धार, पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने और ईको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रही है।

एशियाई विकास बैंक (ADB) से 180 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का ऋण प्रस्तावित है, जिसका उपयोग राज्य के पर्यटन अवसंरचना को सशक्त बनाने और यात्रा को सुगम करने में किया जाएगा।

पर्यटन से स्थानीय रोजगार में बढ़ोतरी

त्रिपुरा में बढ़ती पर्यटक आवाजाही ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया जीवन दिया है। परिवहन संचालकों, हस्तशिल्प विक्रेताओं, स्थानीय भोजनालयों, गाइडों और होमस्टे संचालकों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं।

त्रिपुरा के प्रमुख पर्यटन स्थल

आज त्रिपुरा न केवल प्राकृतिक सुंदरता बल्कि सांस्कृतिक वैभव का भी प्रतीक बन चुका है। यहाँ के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल हैं –

​•​उज्जयंत पैलेस (अगरतला): राजसी वास्तुकला और संग्रहालय के लिए प्रसिद्ध।

​•​नीरमहल: रुद्रसागर झील के बीच स्थित यह ‘पूर्व का लेक पैलेस’ कहलाता है।

​•​त्रिपुरसुंदरी मंदिर (उदयपुर): शक्ति पीठों में से एक, धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र।
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•​जम्पुई हिल्स: ‘ऑरेंज हिल्स’ के नाम से प्रसिद्ध, यहाँ से सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य अद्भुत होता है।
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•​डुम्बुर झील: 48 द्वीपों वाली झील, जल क्रीड़ाओं और पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र।
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•​सेपाहिज़ाला वन्यजीव अभयारण्य: पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श स्थल।

नया त्रिपुरा, नया पर्यटन चेहरा

आज त्रिपुरा का नाम भारत और विश्व के पर्यटन मानचित्र पर चमक रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के ‘डबल इंजन’ विकास दृष्टिकोण के तहत यह राज्य न केवल उत्तर-पूर्व बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनकर उभरा है, जहाँ सुशासन, सांस्कृतिक गौरव और आर्थिक सशक्तिकरण का संगम देखने को मिलता है।

-(लेखिका आशिका सिंह का पत्रकारिता जगत में 18 वर्षों का अनुभव है, वर्तमान में वे प्रसार भारती न्यूज सर्विस के साथ जुड़ी हैं)