वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक्सपोर्टर्स के लिए नियमों को और आसान बना दिया है। अब एडवांस ऑथराइजेशन और EPCG स्कीम के तहत एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन डिस्चार्ज सर्टिफिकेट (EODC) के लिए आवेदन करते समय फिजिकल ड्यूटी पेमेंट चालान जमा करने की जरूरत नहीं रहेगी। इससे नियमों का पालन करने का बोझ कम होगा और एक्सपोर्टर्स की ट्रांजेक्शन कॉस्ट में बचत होगी।
1 अगस्त 2026 से लागू होगा नया नियम
मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि यह सुविधा 1 अगस्त 2026 को या उसके बाद किए गए स्वैच्छिक ड्यूटी पेमेंट पर लागू होगी। रिलीज में साफ कहा गया, “1 अगस्त 2026 को या उसके बाद किए गए स्वैच्छिक ड्यूटी पेमेंट के लिए, एक्सपोर्टर्स को अब ऑथराइजेशन बंद करने के लिए अपने एप्लीकेशन के साथ फिजिकल चालान जमा करने की जरूरत नहीं होगी।”
डिजिटल वेरिफिकेशन से आसान होगा काम
अब एक्सपोर्टर्स DGFT कस्टमर पोर्टल पर वेरिफाइड पेमेंट डिटेल्स देख सकेंगे। आवेदन फाइल करने से पहले वे यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि पेमेंट सही ऑथराइजेशन से जुड़ा है या नहीं। कस्टम्स/ICEGATE से मिले लाइसेंस-वाइज स्वैच्छिक ड्यूटी पेमेंट डेटा को DGFT के ऑनलाइन सिस्टम के साथ इंटीग्रेट कर दिया गया है। इससे संबंधित ऑथराइजेशन के मुकाबले पेमेंट का वेरिफाइड वेरिफिकेशन सीधे हो सकेगा।
मैनुअल प्रक्रिया खत्म, पारदर्शिता बढ़ेगी
वेरिफाइड पेमेंट रिकॉर्ड DGFT के रीजनल अधिकारियों के लिए भी बैक ऑफिस के जरिए उपलब्ध होंगे। इससे मैनुअल वेरिफिकेशन की जरूरत काफी कम हो जाएगी। मंत्रालय ने कहा कि मैनुअल सबमिशन और वेरिफिकेशन की जगह वेरिफाइड डिजिटल रिकॉर्ड आने से प्रोसेसिंग का समय घटेगा, डेटा की सटीकता सुधरेगी, इंसानी दखल कम होगा और क्लोजर प्रोसेस में पारदर्शिता बढ़ेगी।
API-बेस्ड सिस्टम से हुआ इंटीग्रेशन
यह सुविधा DGFT और ICEGATE के बीच API-बेस्ड डेटा एक्सचेंज के जरिए शुरू की गई है। इससे ड्यूटी पेमेंट डिटेल्स को कस्टम्स सिस्टम से सीधे DGFT के EODC प्रोसेसिंग वर्कफ्लो में इलेक्ट्रॉनिक रूप से ट्रांसफर किया जा सकेगा। सरकार का यह कदम एक्सपोर्टर्स को राहत देने और निर्यात प्रक्रियाओं को डिजिटल व पेपरलेस बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (इनपुट-एजेंसी)


