केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने ई-ट्रक योजना का किया शुभारंभ

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने पीएम ई-ड्राइव पहल के अंतर्गत शुक्रवार को इलेक्ट्रिक ट्रकों (ई-ट्रकों) के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु एक अभूतपूर्व योजना शुभारंभ किया है। सरकार इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए प्रत्यक्ष सहायता प्रदान कर रही है, जिसका उद्देश्य देश में स्वच्छ, कुशल और दीर्घकालिक माल ढुलाई की गति को तेज़ करना है।

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने इस योजना के महत्व का उल्‍लेख करते हुए कहा कि डीज़ल ट्रक, कुल वाहनों की संख्या का केवल तीन प्रतिशत होने के बावजूद, परिवहन से संबंधित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 42 प्रतिशत का योगदान करते हैं और वायु प्रदूषण को काफ़ी बढ़ा देते हैं। यह योजना हमारे देश को स्थायी माल ढुलाई गतिशीलता, एक स्वच्छ भविष्य और 2070 तक हमारे शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य के अनुरूप, 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की ओर अग्रसर करेगी।

इस योजना में, केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सीएमवीआर) के तहत मांग प्रोत्साहन को एन2 और एन3 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों तक बढ़ाया जाएगा।

  • एन2 श्रेणी में 3.5 टन से अधिक और 12 टन तक सकल वाहन भार (जीवीडब्ल्यू) वाले ट्रक शामिल हैं।
  • एन3 श्रेणी में 12 टन से अधिक और 55 टन तक के सकल वाहन भार वाले ट्रक शामिल हैं।
  • आर्टिकुलेटेड वाहनों के मामले में, प्रोत्साहन केवल एन3 श्रेणी के पुलर ट्रैक्टर पर ही लागू होंगे।

इसकी विश्वसनीयता और प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए, योजना में व्यापक निर्माता-समर्थित वारंटी अनिवार्य है।

  • बैटरी पर पांच वर्ष या 5 लाख किलोमीटर (जो भी पहले हो) की वारंटी होनी चाहिए।
  • वाहन और मोटर की वारंटी पांच वर्ष या 2.5 लाख किलोमीटर (जो भी पहले हो) होनी चाहिए।
  • सामर्थ्य को बढ़ावा देने के लिए, प्रोत्साहन राशि इलेक्ट्रिक ट्रक के सकल वाहन भार (जीवीडब्ल्यू) पर निर्भर करेगी, जिसकी अधिकतम प्रोत्साहन राशि प्रति वाहन 9.6 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
  • ये प्रोत्साहन खरीद मूल्य में अग्रिम कटौती के रूप में दिए जाएंगे और पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर पीएम ई-ड्राइव पोर्टल के माध्यम से ओईएम को प्रतिपूर्ति की जाएगी।

आपको बता दें, इस योजना से देश भर में लगभग 5,600 ई-ट्रकों को लाने में सहायता मिलने की उम्मीद है। दिल्ली में पंजीकृत 1,100 ई-ट्रकों के लिए 100 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य राजधानी की गंभीर वायु गुणवत्ता चुनौतियों का समाधान करना है।

वहीं, इससे लाभान्वित होने वाले प्रमुख क्षेत्रों में सीमेंट उद्योग, बंदरगाह, इस्पात और रसद क्षेत्र शामिल हैं। वोल्वो आयशर, टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड जैसी कई प्रमुख ओईएम कंपनियां पहले से ही भारत में इलेक्ट्रिक ट्रकों के निर्माण में लगी हुई हैं, जिससे आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अंतर्गत स्वदेशी क्षमताओं में वृद्धि हो रही है।

 

 

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