भारत में हरित परिवहन और प्रदूषण घटाने के लिए केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी आगामी बुधवार को कोलकाता के अलीपुर स्थित क्षेत्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) टेस्टिंग सुविधा का वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये उद्घाटन करेंगे। यह नई सुविधा आधुनिक तकनीक से तैयार की गई है, जहां ईवी बैटरी और पुर्जों की कई तरह की जांच होगी। इसमें इलेक्ट्रिकल सुरक्षा, फंक्शनल सेफ्टी, टिकाऊपन, जलवायु आधारित टेस्ट (आईपी, यूवी, जंग), साथ ही सामग्री और यांत्रिक सुरक्षा से जुड़े टेस्ट शामिल हैं, जिनमें ज्वलनशीलता और ग्लो वायर जांच भी की जाएगी।
इस सुविधा से खास तौर पर पूर्वी भारत के ईवी बैटरी निर्माता लाभान्वित होंगे। उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त परीक्षण और प्रमाणन मिलेगा, जिससे उनके उत्पाद सुरक्षित, भरोसेमंद और नियमानुसार साबित होंगे। यह प्रयोगशाला राष्ट्रीय स्तर पर ईवी गुणवत्ता जांच का मानक बनेगी। इसके जरिए कंपनियां शुरुआती स्तर पर ही खामियां पकड़ सकेंगी, जिससे उत्पाद की विश्वसनीयता और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से उपभोक्ताओं का ईवी पर विश्वास बढ़ेगा और देश तेजी से हरित परिवहन की ओर बढ़ेगा। साथ ही, यह कदम घरेलू निर्माताओं को किफायती परीक्षण सेवाएं उपलब्ध कराकर आयात पर निर्भरता घटाने और मजबूत ईवी इकोसिस्टम बनाने में मदद करेगा।
नेशनल टेस्ट हाउस (एनटीएच) के जरिए भारत वैश्विक स्तर पर गुणवत्ता आश्वासन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और सतत परिवहन में सहयोगी साबित हो रहा है। फिलहाल भारत में ईवी का बाजार छोटा है और पैसेंजर वाहनों में इनकी हिस्सेदारी अभी एकल अंक (single digit) में है। लेकिन सरकार ने 2030 तक 30 प्रतिशत ईवी का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सख्त परीक्षण, सत्यापन और प्रमाणन बेहद जरूरी है, ताकि उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरें।
गौरतलब है कि ईवी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार फेम-II (FAME-II) योजना लागू की है, जिसकी लागत ₹11,500 करोड़ है, जून 2025 तक 16 लाख से ज्यादा ईवी को समर्थन दे चुकी है। इसमें ई-बसें, ई-टू-व्हीलर्स और ई-थ्री-व्हीलर्स शामिल हैं। इसके अलावा, ₹912.5 करोड़ की राशि से 9,332 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से लगभग 8,900 पहले से चालू हो चुके हैं।
इसी तरह उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के तहत ₹25,938 करोड़ उन्नत ऑटोमोटिव तकनीक और ₹18,100 करोड़ एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इन योजनाओं का लक्ष्य ईवी पुर्ज़ों का स्थानीयकरण करना और आयात पर निर्भरता घटाना है। ईवी को भविष्य का पर्यावरण-हितैषी परिवहन माना जा रहा है। ये न सिर्फ पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाते हैं बल्कि प्रदूषण को भी काफी हद तक कम करने में मददगार हैं। -(IANS)


