उरुग्वे के विदेश मंत्री ने ब्रिक्स समिट की जमकर की तारीफ, कहा- “भारत की अध्यक्षता सफल रही”

उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने सोमवार को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की खुलकर तारीफ की। उन्होंने नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स समिट को सफल बताया और जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद ग्रुप के सदस्यों के बीच आम सहमति बनाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की सराहना की। 

“भारत को अपनी अध्यक्षता पर खुश होना चाहिए”

लुबेटकिन ने कहा, “मुझे लगता है कि भारत को अपनी अध्यक्षता पर खुश होना चाहिए, क्योंकि यह सफल रही। और सफलता पाना आसान नहीं था। अंतरराष्ट्रीय हालात बहुत जटिल हैं और ब्रिक्स अंतरराष्ट्रीय हालात का प्रतिनिधित्व करता है।” उन्होंने समिट में बनी आम सहमति को “बड़ी उपलब्धि” करार दिया। 

लुबेटकिन ने कहा, “शुरुआत में स्थिति आसान नहीं थी। इसी वजह से जब प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि आम सहमति बन गई है, तो यह एक बड़ी उपलब्धि है। प्रमुख देशों के बीच, जो मिलकर दुनिया की GDP का 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा हिस्सा बनाते हैं, किसी भी तरह की आम सहमति दिल्ली में हुई इस चर्चा की सफलता को साबित करती है।”

नई दिल्ली घोषणापत्र: हल्का-फुल्का नहीं, बल्कि ठोस दस्तावेज

उरुग्वे के विदेश मंत्री ने समिट के नतीजों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ कोई हल्का-फुल्का अंतिम दस्तावेज नहीं था, बल्कि एक वास्तविक और ठोस घोषणापत्र था जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मौजूद असली मुद्दों को संबोधित किया गया। 

लुबेटकिन ने कहा “अगर आप अंतिम घोषणापत्र को ध्यान से देखें, तो यह कोई हल्का-फुल्का घोषणापत्र नहीं है। यह असल मुद्दों और दुनिया के वास्तविक हालात को संबोधित करता है।”  उन्होंने आगे कहा कि भारत की अध्यक्षता ने वैश्विक माहौल और अंतरराष्ट्रीय हालात में “बहुत मजबूत योगदान” दिया है।

उरुग्वे की भागीदारी और ग्लोबल साउथ का संदेश

ब्रिक्स आउटरीच सेशन में उरुग्वे की भागीदारी पर बोलते हुए लुबेटकिन ने बताया कि उनका देश ब्रिक्स का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले साल रियो डी जनेरियो और इस साल नई दिल्ली में हुए समिट में शामिल होने का निमंत्रण मिला। उन्होंने कहा “पिछले साल राष्ट्रपति लूला ने और इस साल प्रधानमंत्री मोदी ने हमें बुलाया था। हमें बहुत खुशी है कि हमें यह निमंत्रण मिला।” 

ग्लोबल साउथ में उरुग्वे की भूमिका पर जोर देते हुए लुबेटकिन ने कहा, “हमारा संदेश साफ है: हम भारत और ब्रिक्स देशों के साथ बेहतर ढंग से काम करने के लिए तैयार हैं। ग्लोबल साउथ का दौर ऐसा है जिसे मजबूत करने की जरूरत है। हम ग्लोबल साउथ से आते हैं और हमें इसकी तरफ से भूमिका निभानी है।” उन्होंने सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन) और इनोवेशन (नवाचार) जैसे मुद्दों पर आम सहमति के महत्व को भी रेखांकित किया।

दिल्ली समिट का महत्व दुनिया तक पहुंचाना चुनौती

लुबेटकिन ने कहा कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और ग्लोबल साउथ में हो रहे घटनाक्रमों का महत्व बेहतर ढंग से समझना चाहिए। उन्होंने कहा “दूसरों को यह समझने की जरूरत है कि दिल्ली वीकेंड का क्या मतलब है। बातचीत की क्षमता और विकास की क्षमता विकसित करना, भविष्य के लिए दोस्ताना संबंध बनाना भी चुनौती का हिस्सा है।” उरुग्वे के विदेश मंत्री के इन बयानों से साफ है कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता और नई दिल्ली समिट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक और सफल माना जा रहा है। (इनपुट-एजेंसी)

RELATED ARTICLES

57 mins ago | banking sector

सरकार ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को दी मंजूरी

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के रणनीतिक पुनर्गठन को म...

1 hour ago | Anita Anand

प्रधानमंत्री मोदी से मिलीं कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद, व्यापार-तकनीक समेत कई मुद्दों पर चर्चा

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरा...