अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कहा है कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में हाल ही में सामने आए इबोला प्रकोप के जवाब में 112 मिलियन डॉलर की राशि जुटाई गई है और केन्या में एक विशेष क्वारंटीन सुविधा स्थापित की गई है।
अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि प्रकोप की सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर अमेरिकी प्रतिक्रिया शुरू कर दी गई थी। इस अभियान में कई संघीय एजेंसियां शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि केन्या में 50 बिस्तरों वाली एक क्वारंटीन सुविधा स्थापित की गई है, जो शुक्रवार से संचालन शुरू करेगी।
अधिकारी ने कहा, “हमने केन्या में एक सुविधा स्थापित की है, जिसका उपयोग उन अमेरिकी नागरिकों को क्वारंटीन में रखने के लिए किया जाएगा, जो इबोला वायरस के ग्लेंडो जियो वेरिएंट के संपर्क में आए हो सकते हैं।”
प्रशासन के अनुसार इस अभियान को दो चरणों में संचालित किया जा रहा है। पहले चरण में क्वारंटीन सुविधा स्थापित की गई है, जबकि दूसरे चरण में उन मरीजों के लिए बायोकंटेनमेंट और आइसोलेशन इकाइयां जोड़ी जाएंगी, जिनमें लक्षण विकसित होते हैं या जिनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है।
एक अधिकारी ने बताया, “हमने 30 से अधिक कमीशन कॉर्प्स अधिकारियों की एक टीम को वॉशिंगटन डीसी क्षेत्र में एकत्र किया। उन्होंने सोमवार, मंगलवार और बुधवार को प्रशिक्षण प्राप्त किया और बुधवार शाम को केन्या के लिए रवाना हो गए।”
अधिकारियों के अनुसार इन कर्मियों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE), क्वारंटीन प्रक्रियाओं और इबोला मरीजों की देखभाल से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से कई अधिकारी वर्ष 2014-15 में पश्चिम अफ्रीका में फैले इबोला प्रकोप के दौरान अमेरिकी प्रतिक्रिया अभियान में भी शामिल रहे थे।
अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि यह सुविधा पूर्व में उपयोग की गई मोनरोविया मेडिकल यूनिट की तुलना में मरीजों की देखभाल और क्वारंटीन व्यवस्था के लिहाज से अधिक सक्षम होगी।
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विदेशी सहायता निधि के माध्यम से दो सप्ताह से भी कम समय में 112 मिलियन डॉलर की राशि जुटाई गई है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में 80 मिलियन डॉलर की नई प्रतिबद्धताओं की घोषणा की गई है, जिसका उपयोग व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की खरीद, आपूर्ति, सीमा जांच, निगरानी, संपर्क खोज और जांच सामग्री उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि केन्याई सरकार ने इस सुविधा की स्थापना को मंजूरी दे दी है और अमेरिका इस संबंध में ब्रिटेन के साथ भी समन्वय कर रहा है।
एक अधिकारी ने कहा, “हमें इस सुविधा की स्थापना के लिए पूरी स्वीकृति प्राप्त है और इस विषय पर केन्या के राष्ट्रपति के साथ भी बातचीत हुई है।”
उच्च जोखिम वाले अमेरिकी नागरिकों को आवश्यकता पड़ने पर केन्या स्थित इस केंद्र में क्वारंटीन के लिए लाया जा सकेगा। जिन लोगों में इबोला के लक्षण दिखाई देंगे या जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव होगी, उनका उपचार पहले इसी केंद्र में किया जाएगा और बाद में उन्हें क्षेत्र के उन्नत चिकित्सा केंद्रों में स्थानांतरित किया जाएगा।
अधिकारी ने कहा, “ऐसी परिस्थितियों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। कम दूरी तय करने से मरीजों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।”
यह सुविधा केन्या के वाजिर एयर बेस में स्थापित की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों के परिवहन के लिए विमानों को भी तैयार रखा गया है।
प्रशासन ने यह भी बताया कि तीन आइसोलेशन इकाइयां तैयार की जा रही हैं, जिनमें प्रत्येक में चार मरीजों को रखा जा सकेगा। इसके अलावा दो बायोकंटेनमेंट इकाइयां भी स्थापित की जा रही हैं, जिनमें प्रत्येक में दो मरीजों के रहने की व्यवस्था होगी।
अधिकारियों के अनुसार इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उन्नत उपचार केंद्रों तक तेजी से पहुंचाना है।
-(इनपुटःएजेंसी)


