अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले सप्ताह भारत की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचेंगे। इस दौरान वे मुंबई और गुजरात के जामनगर का दौरा करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यात्रा का मुख्य एजेंडा बेहतर ऊर्जा सहयोग, द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और व्यावसायिक अवसरों का विस्तार करना है। विदेश विभाग ने मीडिया नोट में जानकारी देते हुए कहा कि रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक उज्बेकिस्तान के समरकंद और भारत के मुंबई तथा जामनगर की यात्रा करेंगे। यह उनकी इस साल भारत की दूसरी आधिकारिक यात्रा होगी।
ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा
दौरे के दौरान विदेश मंत्री वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। बैठकों में अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने, क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान और ऊर्जा सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा रुबियो व्यापारिक नेताओं से भी मिलेंगे। विदेश विभाग ने कहा कि वे व्यावसायिक निवेश और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा देने पर फोकस करेंगे।
जामनगर क्यों चुना गया?
गुजरात का जामनगर रिलायंस इंडस्ट्रीज के विशाल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का केंद्र है, जो दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग हब में गिना जाता है। विदेश विभाग ने शहर के चयन का स्पष्ट कारण नहीं बताया, लेकिन ऊर्जा सहयोग पर जोर दिए जाने से यह जगह महत्वपूर्ण हो जाती है।
रूसी तेल खरीद और जुर्माने की समयसीमा के बीच दौरा
यह यात्रा 18 अक्टूबर की उस समयसीमा के ठीक आसपास हो रही है, जिसके तहत ग्राहम एक्ट के अंतर्गत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर ड्यूटी लगाने का प्रावधान है। भारत 2022 से रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल रहा है और यह मुद्दा वाशिंगटन के साथ लंबे समय से तनाव का कारण बना हुआ है।
मध्य एशिया के बाद भारत, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी साथ
भारत से पहले रुबियो समरकंद में सी5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेंगे। यह मंच अमेरिका और मध्य एशिया के पांच देशों—कजाकिस्तान, किर्गिज़ गणराज्य, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान तथा उज्बेकिस्तान—को एक साथ लाता है। वहां वे इन देशों के वरिष्ठ अधिकारियों से द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। विदेश विभाग के अनुसार, इस ऐतिहासिक यात्रा में रुबियो 200 से अधिक व्यापारिक नेताओं वाले अमेरिकी वाणिज्यिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इसका मकसद अमेरिका और मध्य एशिया के बीच मजबूत व्यावसायिक सहयोग का नया अध्याय शुरू करना है।
बताना चाहेंगे, मई में रुबियो ने भारत को ‘महान भागीदार’ बताया था और कहा था कि उनकी यात्रा ऊर्जा तथा क्वाड पर केंद्रित होगी। दोनों देश अपने संबंधों को रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा को कवर करने वाली व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखते हैं। (इनपुट-एजेंसी)


