उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को कहा कि पिछले दशक में भारत ने बड़ी आर्थिक उछाल लगाई, हम बहुत कमज़ोर स्थिति में थे, दुनिया में, पर एक बड़ी खुशखबरी है-आज भारत दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बना है। हमने किनको पीछे छोड़ा? हमने फ्रांस को छोड़ दिया, इंग्लैंड को छोड़ दिया, जापान को छोड़ दिया। किसकी बारी है? जर्मनी की और बहुत ही जल्दी भारत दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनने वाला है।
नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश में ‘कृषि उद्योग समागम’ के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने किसान को हर प्रकार की सहायता सीधा किसान के कहते में देने की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा “किसान की आमदनी में उत्थान आएगा जब हर सहायता किसान को सीधी मिलेगी। अमेरिका वो देश है जहां किसान परिवार की आय सामान्य परिवार की आय से ज़्यादा है, इसका एक आधार है कि किसान को सीधी सरकारी सहायता मिलती है। हमारे यहां खाद को लेकर बहुत बड़ी सब्सिडी है, अन्य भी बहुत बड़ी सब्सिडी हैं पर वो अप्रत्यक्ष है। यदि वो सब सीधी किसान को दी जाए तो मेरा आंकलन है एक आधार पर कि हर किसान को हर साल कम से कम 35,000 रुपए मिलेंगे। मैं मानकर चलता हूँ कि इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिसर्च इस पर ध्यान देगी, इस पर पूरी तरह से एक टिप्पणी का कागज निकालेगी ताकि किसान को ज़्यादा से ज़्यादा फायदा हो पाए….किसान को हर तरीके से सरकार मदद कर रही है – PM KISAN सम्मान निधि सीधा किसान के खाते में जाता है, पर अब आवश्यकता है कि बाकी सहायता जो किसान को मिल रही है, वो सीधी किसान के खाते में जाए, क्योंकि इससे किसान को बहुत बड़ा फायदा होगा।”
ऑपरेशन सिन्दूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “ आज पूरा देश राष्ट्र-भावना से ओत-प्रोत है, राष्ट्र को समर्पित है। आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पहलगाम का जवाब ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से लिया। उसका लोहा दुनिया ने माना है। विश्व के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि देश का प्रधानमंत्री बिहार से विश्व को एक संदेश देता है, जिन्होंने सिंदूर मिटाया है, उनको धरती पर रहने का अधिकार नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा के अंदर घुसकर बहावलपुर, मुरिदके -जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों पर क्या सटीक बमबारी हुई, नष्ट कर दिया। कोई प्रमाण नहीं मांग रहा है, कोई नहीं मांग रहा है, कारण जब कॉफ़िन ले जाए जा रहे थे, उनकी फौज खड़ी थी, उनके नेता खड़े थे, आतंकवादी खड़े थे। भारत को प्रमाण की आवश्यकता नहीं। जिनको चोट लगी है, उन्होंने यह प्रमाण विश्व के सामने दे दिया। भारत के प्रधानमंत्री का संकल्प एक लौह पुरुष की तरह है। अब हर-व्यक्ति राष्ट्र-भावना से, राष्ट्रहित से ओत-प्रोत है।”
वहीं, भारतीय सेना के पराक्रम की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “आज का भारत ये मानता है कि…. हमारी सेनाओं के पराक्रम ने हर भारतीय का सर ऊंचा कर दिया है। हम शान से कहते हैं, हम भारतीय हैं, भारत बदल चुका है, भारत अब आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। जो 70 साल में नहीं हुआ, वो कठोर निर्णय भारत ये प्रधानमंत्री ने लिया और पाकिस्तान का पानी बंद कर दिया और कहा खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा, ये बहुत बड़ा संदेश दिया है। जिनका सिंदूर उजड़ा उनकी लाज रखी है।”


