उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के 45 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित वैश्विक समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वभर में शांति, सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक जागरूकता के मूल्यों के प्रसार के लिए संगठन की सराहना की।
180 देशों में फैला आर्ट ऑफ लिविंग का नेटवर्क
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग आंदोलन ने महाद्वीपों, संस्कृतियों और पीढ़ियों के बीच लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि संगठन के केंद्र लगभग 180 देशों में सक्रिय हैं और यह आंदोलन करुणा, सहनशीलता तथा आनंद को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख मानवीय और आध्यात्मिक शक्ति बन चुका है।
मानवता के प्रति समर्पण ही सच्ची भक्ति
सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भक्ति केवल ईश्वर के प्रति समर्पण नहीं, बल्कि स्वयं, परिवार, समाज, राष्ट्र और पूरी मानवता के प्रति समर्पण है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता लोगों को शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाती है और जीवन को सार्थक बनाती है।
गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर की सराहना
श्री श्री रवि शंकर की प्रशंसा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि संघर्ष और अनिश्चितता से भरे वर्तमान दौर में गुरुदेव ज्ञान, शांति और सद्भाव के माध्यम से मानवता को प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरलता, विनम्रता और करुणा ने दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित किया है।
ध्यान, सेवा और शिक्षा से सामाजिक परिवर्तन
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान, सेवा, शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और अंतरधार्मिक संवाद के माध्यम से आर्ट ऑफ लिविंग ने सामाजिक परिवर्तन में आध्यात्मिकता की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा कि एकाग्र मन असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकता है।
युवाओं को जोड़ने वाली पहलें बनीं आकर्षण
उन्होंने रॉक सत्संग और भजन क्लबिंग जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जो दुनिया भर के युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने संगठन के नशामुक्त भारत अभियान की भी सराहना की।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना पर जोर
सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत आज वैश्विक स्तर पर आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी द्वारा योग, स्वास्थ्य, स्थिरता और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ जैसे मूल्यों पर दिया जा रहा जोर आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की विचारधारा से मेल खाता है।
स्वयंसेवकों को बताया “सेवा के मौन शिल्पकार”
उपराष्ट्रपति ने संगठन के स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए उन्हें “सेवा के मौन शिल्पकार” बताया। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का सकारात्मक परिवर्तन पूरे परिवार और समुदाय को सशक्त बनाता है।
स्मारक डाक टिकट भी जारी किया
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने आर्ट ऑफ लिविंग परिसर स्थित गणपति मंदिर में प्रार्थना की और आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन का स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। इस अवसर पर थावरचंद गहलोत, गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर, आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के सदस्य, देश-विदेश के गणमान्य व्यक्ति तथा हजारों स्वयंसेवक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। (इनपुट: पीआईबी)


