उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने केन्याई संसदीय प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर

उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को केन्या की नेशनल असेंबली के स्पीकर मोसेस एम. वेटंगुला के नेतृत्व वाले केन्याई संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। भारत की द्विपक्षीय यात्रा पर आए प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में दोनों देशों के बीच संसदीय संबंधों, विकास साझेदारी, डिजिटल तकनीक, क्षमता निर्माण और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

संसदीय सहयोग बढ़ाने पर जोर

बैठक के दौरान उपराष्ट्रपति ने भारत और केन्या के बीच घनिष्ठ संसदीय संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने तकनीकी समाधानों और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में भारत के अनुभव को केन्या के साथ साझा करने की इच्छा जताई। इसमें कागजरहित संसद की दिशा में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को भी प्रमुखता दी गई।

गांधी की प्रतिमा के प्रस्ताव का स्वागत

राधाकृष्णन ने केन्या के संसदीय मित्रता समूह में भारतीय मूल के एक सांसद की मौजूदगी का उल्लेख किया। उन्होंने केन्या की नेशनल असेंबली परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित करने के प्रस्ताव की भी सराहना की। उन्होंने इसे दोनों देशों के ऐतिहासिक और जन-जन के संबंधों का प्रतीक बताया।

मोदी और रुटो की यात्राओं का किया जिक्र

उपराष्ट्रपति ने भारत और केन्या के बीच उच्चस्तरीय संपर्कों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में केन्या का दौरा किया था। इसके बाद 2023 में केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने भारत की यात्रा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के उच्चस्तरीय आदान-प्रदान से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिली है।

विकास साझेदारी में भारत का योगदान

केन्या के साथ भारत की विकास साझेदारी का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि अनुदान सहायता के तहत कई परियोजनाएं पूरी की गई हैं। इनमें नैरोबी विश्वविद्यालय की महात्मा गांधी ग्रेजुएट लाइब्रेरी का नवीनीकरण और मतोंग्वे स्थित केन्याई नौसेना बेस पर सीटी स्कैन से जुड़ी सुविधाओं का निर्माण शामिल है।

इबोला प्रकोप के दौरान भेजी चिकित्सा सामग्री

राधाकृष्णन ने इबोला वायरस के प्रकोप के दौरान भारत की ओर से केन्या को दी गई मदद को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उस दौरान भारत ने 4.5 टन चिकित्सा सामग्री की पहली खेप केन्या पहुंचाई थी। उन्होंने कहा कि संकट के समय सहयोग दोनों देशों के बीच भरोसे और मजबूत साझेदारी को दर्शाता है।

क्षमता निर्माण में लगातार सहयोग

उपराष्ट्रपति ने केन्या में क्षमता निर्माण के लिए भारत के निरंतर समर्थन पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की ओर से केन्या के लिए करीब 400 छात्रवृत्तियां उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें विभिन्न सरकारी मंत्रालयों के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी शामिल हैं। इसके अलावा केन्या के 20 राजनयिक भारत में क्षमता विकास का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

आईसीसीआर छात्रवृत्तियां बढ़ीं

उन्होंने बताया कि दीर्घावधि पाठ्यक्रमों के लिए भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की छात्रवृत्तियों की संख्या सालाना 80 से बढ़ाकर 100 कर दी गई है। इससे केन्याई छात्रों और पेशेवरों के लिए भारत में उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसरों का विस्तार होगा।

डिजी-लॉकर और गति शक्ति परियोजना पर चर्चा

बैठक में केन्या में डिजी-लॉकर के पायलट प्रोजेक्ट का भी उल्लेख हुआ। इस संबंध में समझौते पर नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। उपराष्ट्रपति ने बताया कि भारत और केन्या की टीमें केन्या के लिए गति शक्ति परियोजना पर भी काम कर रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र में समर्थन के लिए जताया आभार

राधाकृष्णन ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट पर भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए केन्या का आभार जताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए भी केन्या से समर्थन मांगा।

ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों का उल्लेख

दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत और स्वाहिली तट के बीच सदियों से पारस्परिक लाभ वाले व्यापारिक संबंध रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि केन्या अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस में भी शामिल होगा। उन्होंने कहा कि इन पहलों में सहयोग से दोनों देशों के बीच वैश्विक और पर्यावरणीय साझेदारी को और मजबूती मिल सकती है।

भारतीय मूल के लोगों के योगदान की सराहना

उपराष्ट्रपति ने भारत और केन्या के लोगों के बीच सदियों पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि केन्या में भारतीय मूल के लोगों को देश की 44वीं जनजाति के रूप में मान्यता दी गई है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों की अभिव्यक्ति बताया।

संसदीय सहयोग और गहरा होने की उम्मीद

बैठक के अंत में राधाकृष्णन ने भारत आने के लिए केन्याई संसदीय प्रतिनिधिमंडल का धन्यवाद किया। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के सुखद और लाभप्रद रहने की कामना की। उपराष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग और गहरा होगा तथा भारत-केन्या की व्यापक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी। (इनपुट: पीआईबी)