उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को ग्लोबल साउथ के देशों से तेजी से बदलती सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए निरंतर संवाद, आपसी सीख और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का जोरदार आह्वान किया। उन्होंने साफ कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी देश अकेले रहकर उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना नहीं कर सकता।
इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम (इन-स्टेप) के चौथे संस्करण के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने वर्तमान रणनीतिक माहौल की जटिलताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पारंपरिक सुरक्षा चिंताओं के साथ अब प्रौद्योगिकी, साइबरस्पेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति शृंखला जैसे मुद्दे भी गहराई से जुड़े हुए हैं।“
वैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें और सामंजस्य के साथ काम करें
”सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि इन-स्टेप कार्यक्रम वैश्विक घटनाक्रमों के दीर्घकालिक प्रभावों को समझने, व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने और सही प्रतिक्रियाएं तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कार्यक्रम की मूल भावना को तीन शब्दों में समेटा— “वैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें और सामंजस्य के साथ काम करें।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विमर्श को आकार देने में ग्लोबल साउथ की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इन देशों के विविध अनुभव और विकास प्राथमिकताएं लचीलापन, विकास, सुरक्षा, सुशासन और सहयोग के क्षेत्र में बहुमूल्य सीख देती हैं। भारत का ग्लोबल साउथ के साथ जुड़ाव आपसी सम्मान, साझा हितों, संप्रभु समानता और प्रत्येक देश की विकास व रणनीतिक प्राथमिकताओं के सम्मान पर आधारित है।
भ्रष्टाचार पर भी दी चेतावनी, वैक्सीन मैत्री का किया जिक्र
उपराष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार को ग्लोबल साउथ के देशों के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए इसे खत्म करने के लिए समन्वित प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिभागियों से हर स्तर पर भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था बनाने और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी व पारदर्शिता मजबूत करने का आग्रह किया। कोरोना महामारी के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति का लाभ पूरी मानवता को मिलना चाहिए। ज्ञान और नवाचार को सामूहिक हित के लिए साझा किया जाना चाहिए। यह भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’—एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य—की भावना के अनुरूप है।
22 देशों के 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल
कार्यक्रम के चौथे संस्करण में 22 देशों के 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों सहित कुल 38 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इनमें श्रीलंका, सेशेल्स, मंगोलिया, नेपाल, मॉरीशस, मालदीव, ओमान, गुयाना, चिली, अर्जेंटीना, फिलीपींस, थाईलैंड, आर्मेनिया, किर्गिस्तान, कतर, म्यांमार, उज्बेकिस्तान और ब्राजील समेत अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। दो सप्ताह का यह कार्यक्रम विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय द्वारा राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वरिष्ठ पेशेवरों को रणनीतिक, सुरक्षा और विकास संबंधी मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान तथा संस्थागत व पेशेवर संबंधों को मजबूत करने का मंच देना है। इसके पिछले संस्करण मार्च 2024, अक्टूबर 2024 और अक्टूबर-नवंबर 2025 में आयोजित हो चुके हैं। (इनपुट-एजेंसी)


