उपराष्ट्रपति ने कोझिकोड में ‘नवरात्रि सर्गोत्सवम 2026’ का किया उद्घाटन

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को केरल के कोझिकोड में ‘नवरात्रि सर्गोत्सवम 2026’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विकास के पथ पर आगे बढ़ते हुए भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और विकास की आकांक्षाएं एक-दूसरे की पूरक हैं तथा देश की साझा सभ्यतागत विरासत उसकी स्थायी शक्ति है।

नवरात्रि साहस, न्याय और ज्ञान की विजय का संदेश देती है

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नवरात्रि ‘आदि पराशक्ति’ की दिव्य नारी शक्ति का उत्सव है, जो सृष्टि, शक्ति, ज्ञान और करुणा की शाश्वत स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि इस त्योहार का चिरस्थायी संदेश है कि साहस को भय पर, न्यायपरायणता को अन्याय पर और ज्ञान को अज्ञानता पर विजय प्राप्त करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ये शाश्वत मूल्य समाज को बेहतर भविष्य की ओर ले जाने के लिए निरंतर मार्गदर्शन करते हैं।

विविध परंपराओं के बीच साझा सभ्यतागत विरासत

भारत की विविध नवरात्रि परंपराओं का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि भाषाओं, परंपराओं और पूजा-पद्धतियों में विविधता के बावजूद देश अपनी साझा सभ्यतागत विरासत के माध्यम से एकजुट है। उन्होंने कहा कि यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को दर्शाता है और भारत की विविधता में एकता को मजबूत करता है।

‘विकास भी, विरासत भी’ पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के विजन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और विकास की आकांक्षाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। बरगद के पेड़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह एक पेड़ अपनी गहरी जड़ों से शक्ति ग्रहण करता है और अपनी शाखाओं का विस्तार करता है, उसी तरह भारत की परंपराएं और मूल्य देश को स्थिरता, पहचान तथा निरंतरता प्रदान करते हैं, जबकि देश आधुनिकता और प्रगति को अपना रहा है।

‘केसरी वीकली’ के योगदान की सराहना

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने ‘नवरात्रि सर्गोत्सवम’ के आयोजन के लिए ‘केसरी वीकली’ को बधाई दी। उन्होंने मलयालम पत्रकारिता, लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में इसके योगदान की सराहना की।

पुस्तक का विमोचन, कलाकार को ‘सर्ग केसरी पुरस्कार’

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने “संघ नूतनडिले अक्षरा मुद्राकाल” पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने ललित कला के क्षेत्र में योगदान के लिए पी. आर. राजेंद्रन को ‘सर्ग केसरी पुरस्कार’ भी प्रदान किया।

युवाओं और कलाकारों को प्रेरित करेगा उत्सव

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने आशा व्यक्त की कि ‘नवरात्रि सर्गोत्सवम’ युवाओं को प्रेरित करेगा, कलाकारों का हौसला बढ़ाएगा और नवाचार को अपनाते हुए भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के प्रयासों को मजबूत करेगा। देवियों का आशीर्वाद मांगते हुए उन्होंने आशा व्यक्त की कि समाज को अन्याय से लड़ने की शक्ति मिलेगी, वंचित वर्गों के साथ समृद्धि साझा करने की भावना विकसित होगी और ज्ञान का उपयोग ऐसे संवेदनशील समाज के निर्माण में किया जाएगा, जो सभी की चिंता करे।

केरल और तमिलनाडु के राज्यपाल समेत कई गणमान्य मौजूद

कार्यक्रम में केरल तथा तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर, नवरात्रि सर्गोत्सवम समिति की अध्यक्षा विधु-बाला, समिति के कार्यकारी अध्यक्ष ए.के. प्रशांत और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। (इनपुट: पीआईबी)