उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को स्पष्ट कहा कि भारत दुनिया की अग्रणी शक्ति बनना चाहता है, ताकि कोई देश उस पर अनुचित शर्तें न थोप सके। उन्होंने सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और किसी भी देश की सीमाओं का अतिक्रमण न करने पर जोर दिया।
एनडीसी में संबोधन: राष्ट्रीय रणनीति पर जोर
राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी) के 66वें पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय रणनीति ऐसी होनी चाहिए, जो देश के उद्देश्यों को ठोस कार्रवाई और परिणामों में बदल सके। राष्ट्रीय मूल्यों, हितों और उद्देश्यों के बीच समन्वय सुरक्षा और विकास के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारत के राष्ट्रीय हित उसके संवैधानिक मूल्यों—संप्रभुता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता—से जुड़े हैं। संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा, लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाए रखना और रणनीतिक-आर्थिक-सैन्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाना प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।
वसुधैव कुटुम्बकम् और वैश्विक सहयोग
उपराष्ट्रपति ने भारत की सभ्यतागत अवधारणा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय मूल्य दुनिया के साथ संबंधों को दिशा देते हैं। उन्होंने कोविड-19 के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’, आपदाओं में सहायता और जलवायु परिवर्तन से निपटने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में भारत की भूमिका का जिक्र किया। आतंकवाद, साइबर खतरे, महामारी, जलवायु परिवर्तन और सीमा पार अपराध जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। राष्ट्रीय हितों की रक्षा और साझा वैश्विक हित एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।
विकसित भारत-2047 और ग्लोबल साउथ
सी.पी. राधाकृष्णन ने विकसित भारत-2047 को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण को उपलब्ध संसाधनों और प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाना होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा में थल सीमाओं, हवाई क्षेत्र, समुद्री हितों और साइबर क्षेत्र की रक्षा के साथ सतत विकास भी शामिल है। उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया और कहा कि हर संप्रभु राष्ट्र बराबर है—चाहे बड़ा हो या छोटा। प्रौद्योगिकी, व्यापार, शिक्षा, नवाचार और क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। भ्रष्टाचार को ग्लोबल साउथ की बड़ी चुनौती बताते हुए इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। एनडीसी के 66वें पाठ्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं और मित्र देशों के 41 अधिकारियों सहित कुल 122 प्रतिभागी शामिल हैं। इस अवसर पर कमांडेंट एयर मार्शल मनीष कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे। (इनपुट-एजेंसी)


