सरकार ने सोमवार को कोहिमा स्थित नगा सॉलिडैरिटी पार्क में स्टेट-लेवल वाटरशेड महोत्सव 2025 और मिशन वाटरशेड पुनरुत्थान (PUNARUTTHAN) की शुरुआत की। इस मिशन का उद्देश्य पारंपरिक जलस्रोतों का पुनर्जीवन, बंजर भूमि का सुधार और पानी के संग्रहण तंत्र को मजबूत करना है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, यह प्रयास सामुदायिक भागीदारी और मनरेगा जैसे अन्य योजनाओं के साथ तालमेल के जरिए किया जाएगा।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए ग्रामीण विकास एवं संचार राज्यमंत्री डॉ. चन्द्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि “जल सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है”। उन्होंने कहा कि नागालैंड की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक समृद्धि इसे सामुदायिक आधारित जल प्रबंधन में अग्रणी बनाती है। उन्होंने बताया कि झरनों का पुनर्जीवन, जल संरचनाओं का नवीनीकरण और भूमि संसाधनों की बहाली आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
मंत्रालय के अनुसार, PM कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) और वाटरशेड विकास के तहत नागालैंड में अब तक:
– 14 परियोजनाएं स्वीकृत
– 140 करोड़ रुपये मंजूर, 80 करोड़ रुपये जारी
– 555 जल-संरचनाओं का नवीनीकरण
– 6,500 से अधिक किसानों को लाभ
– 120 झरनों का पुनर्जीवन किया जा चुका है
सरकार ने इसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों को जल-सुरक्षित और जलवायु-resilient बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि के अनुरूप, उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश की विकास यात्रा में प्राथमिकता दी गई है।
चंद्रशेखर ने कहा कि उत्तर-पूर्व राज्यों को सामान्य 60:40 के बजाय 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता मिलती है, जिससे जल संरक्षण और पर्यावरण बहाली के प्रयासों को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया के कुल नवीकरणीय मीठे पानी का केवल 4 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक आबादी का 18 प्रतिशत भारत में रहता है। ऐसे में PMKSY और वाटरशेड कार्यक्रमों ने किसानों की आय बढ़ाने, भूजल स्तर सुधारने और फसल चक्रों में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं।
-(इनपुटःएजेंसी)


