पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी 22 अप्रैल को है। इस बीच महाराष्ट्र के पुणे में पीड़ित परिवारों का दर्द एक बार फिर सामने आया है। इस हमले में जान गंवाने वाले संतोष जगदाले की पत्नी प्रगति जगदाले ने सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।
सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास किया
प्रगति जगदाले ने मंगलवार को समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास किया, जिसके लिए वे बेहद आभारी हैं। प्रगति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कम से कम एक बार मिलने की इच्छा जताई।” हालांकि इस आभार के साथ उनका दर्द भी साफ झलकता है। प्रगति जगदाले ने बताया कि घटना को एक साल बीत जाने के बाद भी वह उस भयावह दिन को भूल नहीं पाई है।
आज भी उन्हें बैसरन घाटी में हुए हमले की आवाजें, चीखें और अफरातफरी याद आती हैं
उन्होंने कहा कि आज भी उन्हें बैसरन घाटी में हुए हमले की आवाजें, चीखें और अफरातफरी याद आती हैं। धर्म की पहचान के आधार पर हमला किया गया था, जिसने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि वह हर दिन उसी घटना को जीती हैं और शायद इसे कभी भुला नहीं पाएंगी।
पहलगाम से जुड़ी यादें उनके जीवन की सबसे दर्दनाक स्मृतियों में शामिल
संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले ने भी अपने पिता को याद करते हुए भावुक बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि पहलगाम से जुड़ी यादें उनके जीवन की सबसे दर्दनाक स्मृतियों में शामिल हैं, जिन्हें वह अपनी आखिरी सांस तक नहीं भूल पाएंगी। असावरी ने बताया कि उनके पिता उनके लिए एक मजबूत सहारा थे, जो हमेशा उन्हें जीवन में सीखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे।
पिछला एक साल उनके परिवार के लिए बेहद कठिन रहा
असावरी ने कहा कि पिछला एक साल उनके परिवार के लिए बेहद कठिन रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन अन्य 25 परिवारों के लिए भी यह समय उतना ही दर्दनाक रहा होगा, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया। उनके अनुसार, यह एक ऐसा अनुभव रहा है जिसे वह “नरक जैसा” मानती हैं जहां एक ओर अपनों को खोने का दुख है, वहीं दूसरी ओर न्याय और सरकारी वादों को पूरा करवाने के लिए संघर्ष जारी है। (इनपुट-आईएएनएस)


