वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी मजबूती, राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल लॉन्च

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल भी लॉन्च किया।

इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में नीति निर्माता, वन अधिकारी, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, तकनीकी विशेषज्ञ और संरक्षण क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हुए। इसमें मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को कम करने के उपायों पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष भारत के सामने संरक्षण और विकास से जुड़ी बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है। जंगलों के घटने, भूमि उपयोग में बदलाव और मानवीय गतिविधियों के विस्तार से इंसानों और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि इस समस्या को देखने का तरीका समाधान आधारित होना चाहिए और आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 7वीं बैठक में की गई घोषणा के तहत स्थापित यह उत्कृष्टता केंद्र शोध, नई तकनीक, नीति सहयोग और प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय केंद्र के रूप में काम करेगा।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि बाघ अभयारण्यों के बाहर मौजूद बाघों, तेंदुओं और हाथियों से जुड़े संघर्षों के समाधान के लिए विशेष रणनीति बनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने होंगे, ताकि वन्यजीवों से सामना होने की स्थिति में सही कदम उठाए जा सकें।

केंद्रीय मंत्री ने वन विभागों से मानव बस्तियों और फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पहले से तैयारी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि संघर्ष के बजाय सह-अस्तित्व और सामंजस्य पर्यावरण संतुलन का आधार होना चाहिए।

केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में सफलता के कारण कई जगह इंसानों और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ा है। ऐसे में संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यह उत्कृष्टता केंद्र अधिकारियों और समुदायों की क्षमता बढ़ाने के साथ आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के उपयोग को बढ़ावा देगा।

कार्यक्रम के दौरान शुरू किया गया राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल आंकड़ों के प्रबंधन, जानकारी साझा करने और बेहतर फैसले लेने में मदद करेगा।

कार्यशाला में मानव-हाथी संघर्ष, मानव-बड़ी बिल्ली प्रजाति संघर्ष और तकनीक आधारित समाधानों जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।

सरकार का कहना है कि यह पहल जैव विविधता संरक्षण के साथ लोगों के जीवन और आजीविका की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक और सामुदायिक प्रयासों को मजबूत करेगी।

(इनपुटः एजेंसी)