ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी मतदाताओं से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी सांसदों को चुनाव में बाहर करने की अपील की है। यह अपील ऐसे समय में की गई है जब अमेरिकी सैनिक पड़ोसी इराक में अपने बचे हुए सैन्य ठिकानों से हट रहे हैं। ईरान ने अमेरिकी सैनिकों की इस वापसी को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया है।
IRGC ने मंगलवार को 26 पन्नों का एक पत्र जारी किया, जिसमें अमेरिकी नागरिकों से युद्ध का विरोध करने और सैन्य हस्तक्षेप के समर्थन वाले मौजूदा नेताओं को सत्ता से हटाने की अपील की गई। पत्र में इजरायल के लिए अमेरिकी समर्थन को भी खारिज करने की अपील की गई है।
अमेरिकी सैनिकों की इराक से वापसी 23 साल बाद हो रही है। 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में सैन्य कार्रवाई के बाद सद्दाम हुसैन की सरकार गिराई गई थी। इसके बाद इराक में लंबे समय तक अस्थिरता रही और बाद में इस्लामिक स्टेट का उदय हुआ। सैनिकों की मौजूदा वापसी का समझौता 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में हुआ था।
ईरान के पत्र में अमेरिकी मतदाताओं से अपने राजनीतिक अधिकार का इस्तेमाल कर मौजूदा नेताओं को हटाने की अपील की गई है। हालांकि, रॉयटर्स के अनुसार, यह पत्र कितने अमेरिकी मतदाताओं तक पहुंचा है, यह स्पष्ट नहीं है। नवंबर में होने वाले अमेरिकी कांग्रेस चुनावों से पहले महंगाई, जीवन-यापन की लागत और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जैसे मुद्दे अमेरिकी राजनीति में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
ट्रंप ने 2024 के चुनाव अभियान में नए युद्धों से बचने, मौजूदा संघर्षों को खत्म करने और महंगाई कम करने का वादा किया था। रॉयटर्स/इप्सोस के 21 सितंबर के सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 17 प्रतिशत लोगों ने जीवन-यापन की लागत से निपटने के ट्रंप के तरीके को मंजूरी दी थी, जबकि 34 प्रतिशत ने ईरान पर अमेरिकी हमलों का समर्थन किया था।
इस बीच, कतर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के जरिए युद्ध खत्म कराने की कोशिश कर रहा है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है और कतर ऐसा साझा आधार तैयार करने की कोशिश कर रहा है जिससे संघर्ष के असर से बचने के लिए समझौता हो सके।
अमेरिका और ईरान के बीच सात महीने से जारी युद्ध के दौरान क्षेत्र में ईरान समर्थित हूती, हिजबुल्लाह और इराकी मिलिशिया भी सक्रिय रहे हैं। ईरान का कहना है कि उसका अंतिम लक्ष्य पूरे मध्य पूर्व से अमेरिकी सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करना है। तेहरान इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी को अपने सहयोगी सशस्त्र समूहों के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है।
दोनों देशों के बीच बातचीत और कई संघर्षविराम के बावजूद युद्ध खत्म करने का कोई स्थायी रास्ता अब तक नहीं निकला है। पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान बातचीत तेज हुई थी, लेकिन रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आवाजाही इसी मार्ग से होती थी।
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान एक शांति प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत सात दिन की समयसीमा के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और लड़ाई रोकने की बात कही गई थी। ट्रंप ने शनिवार को इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि अमेरिका ने मध्यस्थों के जरिए आधिकारिक तौर पर प्रस्ताव को खारिज करने की सूचना नहीं दी है।
ट्रंप ने कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और उनका मानना है कि युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा। उन्होंने ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना, पड़ोसी देशों पर हमले की उसकी क्षमता खत्म करना और ईरान में मौजूदा नेतृत्व को बदलने के लिए परिस्थितियां तैयार करना युद्ध के उद्देश्यों में शामिल बताया है।
ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश से इनकार करता है। उसका कहना है कि परमाणु अप्रसार संधि के तहत उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक विकसित करने का अधिकार है। दूसरी ओर, युद्ध के दौरान ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने के बावजूद उसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगियों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों की आवाजाही सीमित की है। इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
-(इनपुटः Reuters)


