महिला किसान दिवस 2026: कृषि विकास और विकसित भारत में महिलाओं की भूमिका पर जोर

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित डॉ. बी.आर. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में महिला किसान दिवस 2026 मनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतिश चंद्र ने की। इस अवसर पर कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कृषि विकास और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया।

अतिश चंद्र ने कहा कि महिला किसान देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और कृषि विकास में अहम योगदान देती हैं। उन्होंने कृषि क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके तहत प्रत्यक्ष आय सहायता, सस्ती संस्थागत ऋण सुविधा, तकनीक का हस्तांतरण, कौशल विकास, कृषि मशीनीकरण और कृषि विपणन सुविधाओं तक बेहतर पहुंच जैसी पहलों पर जोर दिया गया।

महिला किसान दिवस 2026 की थीम “विकसित कृषि और विकसित भारत के निर्माण में महिला किसानों की भूमिका” रखी गई। इसमें कृषि उत्पादकता बढ़ाने, टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि में महिलाओं की भूमिका को प्रमुखता दी गई। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगतिशील महिला किसानों, कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिला किसानों को सम्मानित किया गया। उनके नवाचार, समर्पण, नेतृत्व क्षमता और ग्रामीण उद्यमिता में योगदान को सराहा गया। इस अवसर पर “भारत की महिला किसान: चुनौतियों से सफलता तक का सफर” नामक पुस्तक भी जारी की गई। इसमें महिला किसानों की प्रेरक सफलता की कहानियों के साथ उनके संघर्ष, उपलब्धियों और कृषि क्षेत्र में किए गए नवाचारों को शामिल किया गया है।

कार्यक्रम में महिला किसानों और कृषि विस्तार से जुड़े कर्मचारियों को अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी मिला। प्रतिभागियों ने खेती में आने वाली चुनौतियों, अपनी उपलब्धियों और कृषि विकास में योगदान के बारे में बताया। उनके अनुभवों ने बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने, ग्रामीण आजीविका मजबूत करने और अन्य महिलाओं को कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने में महिलाओं की भूमिका को सामने रखा।

महिला किसान फसल उत्पादन, पशुपालन, बीज संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, कटाई के बाद की गतिविधियों और कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ाने जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। उनका पारंपरिक ज्ञान, उद्यमशीलता और जलवायु के अनुकूल खेती के तरीकों को अपनाना भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और समावेशी बनाने में अहम है।

कृषि अधिकारी और विस्तार कार्यकर्ता भी कृषि अनुसंधान तथा किसानों के बीच की दूरी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षण, नई तकनीकों की जानकारी, जागरूकता और सरकारी योजनाओं के बारे में मार्गदर्शन के जरिए वे महिला किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने और संस्थागत सहायता हासिल करने में मदद करते हैं।

महिला किसान दिवस 2026 का आयोजन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा कृषि विस्तार शिक्षा संस्थानों, राज्य कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थानों और मैनेज में भी किया जा रहा है। इन आयोजनों में महिला किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों की भागीदारी रही। विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों की महिला किसानों की भागीदारी पर जोर दिया गया।
इस आयोजन ने एक बार फिर रेखांकित किया कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की पहुंच तकनीक, संसाधनों, प्रशिक्षण और संस्थागत सहायता तक बढ़ाना जरूरी है। कृषि से जुड़े निर्णयों और नेतृत्व में उनकी भागीदारी मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है। महिला किसानों को सशक्त बनाना, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, कृषि को विकसित बनाने और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अहम कदम है।

-(इनपुटः PIB)