महिला सशक्तिकरण : आदिवासी और दलित महिलाओं की कहानियां आज समाज को कर रही प्रेरित

पिछले गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जब राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा की, तो पुरस्कारों की लिस्ट में जोरशोर से महिला शक्ति दिखी। ग्रामीण पृष्ठभूमि के बाबजूद समाज में बदलाव की लड़ाई लड़ती महिलाओं को पद्मश्री लिस्ट में शामिल किया गया। रही सही कसर तब पूरी हो गई जब परेड में पहली बार तीनों सेनाओं की एक महिला टुकड़ी ने मार्च किया। महिला सशक्तिकरण की दिशा में ये पहली तस्वीर थी। फिर पद्म पुरस्कारों की एक से बढ़कर एक कहानियों ने ध्यान खींचा कि ये महिलाएं कौन हैं ? मसलन, हाथी की परी नाम से मशहूर पारबती बरुआ तमाम रूढ़िवादी विचारों को पीछे छोड़ देश की पहली महिला महावत बनीं। पारबती ने वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हुए मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में डटकर काम किया। पारबती ने महज 14 वर्ष की आयु में अपने पिता से महावत बनने के गुर सीखने शुरू किए। जंगली हाथियों से निपटने और उन्हें पकड़ने में पारबती ने तीन राज्य सरकारों की मदद की।

उसी तरह सरायकेला की सहयोगी चामी मुर्मु झारखंड की रहने वाली पर्यावरण-वनरोपण के लिए तीन हजार से अधिक वृक्षारोपण के प्रयास को गति दी और तीन हजार महिलाओं के साथ पौधे लगाए। स्वयं सहायता समूह की मदद से 40 से ज्यादा गांवों की 30000 महिलाओं को सशक्त बनाया। ऐसे ही अंडमान की नारियल अम्मा ने 150 से अधिक किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। एक ओर पूर्वी सियांग की हर्बल मेडिसिन विशेषज्ञ यानंग जमोह लेगो ने आदि जनजाति के पारंपरिक उपचार प्रणाली को पुनर्जीवित किया। यानंग ने 10000 से अधिक रोगियों को चिकित्सा देखभाल प्रदान की और औषधीय जड़ी-बूटियों के बारे में 1 लाख व्यक्तियों को शिक्षित किया।

वहीं स्मृति रेखा चकमा त्रिपुरा की रहने वाली हैं और लोनलूम शाॅल बुकर हैं। दुसाध समुदाय की शांति देवी पासवान ने अपने पति शिवन पासवान के साथ गोदना चित्रकारी को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया। गोदना कलाकृति का प्रदर्शन किया और 20 हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया। ये सारी महिलाएं किसी एक राज्य के नहीं हैं। हलांकि इनमेंसे किसी ने भी सरकारी स्कीम के तहत प्रेरित नहीं हुई। सारी कहानियां बदलते भारत में महिलाओं के सुदृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए जैविक खेती, व्यवस्थित चावल गहनीकरण, जैविक खाद उत्पादन (गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग करके), वृक्षारोपण, वन अधिकार अधिनियम के लिए पैरवी और जनजातियों के लिए सामुदायिक वन जैसी गतिविधियां मुख्य फोकस रही हैं।

325 से अधिक आदिवासी महिलाओं को उनके ब्लॉक के ग्राम प्रतिनिधि, पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया है। 120,000 व्यक्तिगत वन भूमि के स्वामित्व उन महिलाओं को प्रदान किए गए हैं जो मुख्य प्राप्तकर्ता और स्वामी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से रोजगार सृजन में भी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं उड़ीसा में आदिवासी और दलित परिवारों के बीच 10.6 करोड़ व्यक्ति दिवस श्रम जुटाया है। इसके अलावा ‘अपना भोजन स्वयं उगाएं’ अभियान ने महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण सेवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। आदिवासी महिलाओं को अपने पर्यावरण-अनुकूल घर बनाने के लिए ब्लॉक ईंट बनाने और राजमिस्त्री कौशल का प्रशिक्षण दिया गया है। 5000 से अधिक आदिवासी महिलाओं को पर्माकल्चर और इकोविलेज डिजाइन शिक्षा में प्रशिक्षित किया गया है।

फिर भी ये कहना गलत होगा कि सरकार कुछ नहीं कर रही है। आये दिन लखपति दीदी और ड्रोन दीदी की चर्चा हम सुनते रहे हैं। पिछले कई वर्षों से मोदी सरकार रोजगार के अवसर प्रदान करने वाले पारंपरिक क्षेत्रों को सुदृढ़ कर रही है और साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष, ऑटोमेशन और रक्षा निर्यात जैसे नए क्षेत्रों में महिलाओं को भी बढ़ावा दे रही है। ड्रोन प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए रास्ते खोले जा रहे हैं इस क्षेत्र में महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा आगे बढ़ाने के लिए लाखों ड्रोन दीदियों को प्रशिक्षित कर रोजगार दिया जा रहा है। वंदे भारत जैसी ट्रेनों में महिला लोको पायलट आसानी से देखे जा सकते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत की महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके सम्पूर्ण स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा एवं रोजगार प्रशिक्षण के साथ सर्वांगीण विकास के लिए कार्यरत है। मंत्रालय “कुपोषण मुक्त भारत” के लिए अपनी प्रतिबद्धता और बच्चों के विकास के प्रति अपने समर्पण में एकजुट होकर प्रयासरत है, और न केवल महिलाओं के विकास के लिए, बल्कि वीमेन लेड डेवलपमेंट के माध्यम से विकसित राष्ट्र निर्माण की प्रेरक कहानियों में, सशक्त महिला नेतृत्व की भूमिका और योगदान का गौरवशाली इतिहास भी लिख रहा है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तीन मिशनों- महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मिशन शक्ति बच्चों के विकास और सुरक्षा के लिए मिशन वात्सल्य और कुपोषण के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के माध्यम से भावी भारत की तस्वीर में समता, सक्षमता और सहभागिता के विविध रंग भरने के लिए प्रयासरत है। सरकारी योजना मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं को जीवन के सभी चरणों में सशक्त बनाना है। यह कार्यक्रम ‘वीमेन लेड डेवलपमेंट’ के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है, जो जीवन के प्रत्येक चरण में महिलाओं को प्रभावित करने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें सक्षम बनाता है। इस मिशन का उद्देश्य महिलाओं को सार्वजनिक भागीदारी और रणनीतिक हस्तक्षेपों में शामिल करते हुए समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में समान योगदानकर्ता बनाना है।

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