साल 2025 भारत के लिए पर्यावरण संरक्षण और क्लाइमेट एक्शन के लिहाज़ से एक निर्णायक वर्ष के रूप में दर्ज हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में क्लीन एनर्जी, प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को राष्ट्रीय नीति के केंद्र में रखा गया। विकास और पर्यावरण के संतुलन (Development–Environment Balance) को साधने की दिशा में भारत ने ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाए। सरकार द्वारा इसी दृष्टिकोण को जन आंदोलन का स्वरूप देने में ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियान ने अहम भूमिका निभाई
जनभागीदारी और हरित चेतना: ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान
साल 2025 में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान ने विशेष भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई इस पहल ने पर्यावरणीय जिम्मेदारी को भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव से जोड़ते हुए वृक्षारोपण को व्यक्तिगत कर्तव्य के रूप में स्थापित किया।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नागरिकों, छात्रों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय निकायों की सक्रिय भागीदारी से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया। 2024 में शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक 140 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण हो चुके हैं।
इस अभियान ने न केवल हरित आवरण (Green Cover) बढ़ाने में योगदान दिया, बल्कि लोगों के बीच प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और दीर्घकालिक संरक्षण की भावना को भी मजबूत किया।
‘एक पेड़ मां के नाम’ ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता संकट के दौर में यह अभियान सांस्कृतिक मूल्य और पर्यावरणीय चेतना के संगम के रूप में उभरा।
क्लाइमेट एक्शन को मिली नई गति
2025 में भारत ने अपने Nationally Determined Contributions (NDCs) और Net Zero 2070 लक्ष्य की दिशा में ठोस प्रगति दर्ज की।
Ministry of Environment, Forest and Climate Change के नेतृत्व में क्लाइमेट रिसिलिएंस, अडेप्टेशन और ग्रीन फाइनेंस को नीति-निर्माण में प्रमुखता दी गई।
क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट, अर्ली वॉर्निंग सिस्टम और डिज़ास्टर प्रिपेयर्डनेस को मजबूत किया गया, जिससे बाढ़, हीटवेव और सूखे जैसी घटनाओं से निपटने की क्षमता में सुधार हुआ।
रोपित वनों, कृषि वानिकी और कार्बन अवशोषण में भारत की प्रगति
रोपित वनों, कृषि वानिकी और कार्बन अवशोषण के क्षेत्र में भारत ने 2025 में वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। अंतरराष्ट्रीय आकलनों और राष्ट्रीय वन रिपोर्टों के अनुसार, भारत अब एशिया के साथ-साथ दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है।
वन संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2025–26 के बजट में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के लिए 3,412.82 करोड़ रुपये का प्रावधान किया, जो यह दर्शाता है कि भारत की पर्यावरण नीति अब संरक्षण के साथ-साथ सस्टेनेबल उपयोग और क्लाइमेट एक्शन पर केंद्रित है।
बांस के बागानों के मामले में वैश्विक स्तर पर कुल 30.1 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में बांस संसाधन फैले हैं, जिनमें से 21.2 मिलियन हेक्टेयर (70 प्रतिशत) एशिया में हैं। भारत में 11.8 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में बांस के जंगल मौजूद हैं। वर्ष 1990 से 2025 के बीच बांस के जंगलों का वैश्विक क्षेत्रफल 8.05 मिलियन हेक्टेयर बढ़ा है, जिसमें भारत और चीन की भूमिका प्रमुख रही।
रबर बागानों में भारत लगभग 831 हजार हेक्टेयर क्षेत्र के साथ दुनिया में पांचवें स्थान पर है और वैश्विक रबर बागानों के कुल 10.9 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
कृषि वानिकी के क्षेत्र में भारत की स्थिति भी मजबूत रही। एशिया में कृषि वानिकी के अंतर्गत कुल क्षेत्र लगभग 39.3 मिलियन हेक्टेयर है, जबकि वैश्विक स्तर पर भारत और इंडोनेशिया मिलकर लगभग 70 प्रतिशत कृषि वानिकी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
कार्बन सिंक के रूप में भारत दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल है। वर्ष 2021 से 2025 के दौरान भारत के वन प्रतिवर्ष लगभग 150 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर रहे हैं।
ISFR 2023 के अनुसार, भारत का कुल वन आवरण 21.76 प्रतिशत है, जबकि मैंग्रोव वन लगभग 4,992 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं।
वायु प्रदूषण से निपटने में ठोस कदम
साल 2025 में National Clean Air Programme (NCAP) के तहत प्रदूषण नियंत्रण को और तेज़ किया गया। Central Pollution Control Board के अनुसार, 130 में से 103 NCAP शहरों में PM10 स्तर में गिरावट दर्ज की गई।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, BS-VI मानक, कंस्ट्रक्शन डस्ट कंट्रोल, बायोमास प्रबंधन और रियल-टाइम एयर मॉनिटरिंग से शहरी वायु गुणवत्ता में क्रमिक सुधार देखने को मिला।
रिन्यूएबल एनर्जी, EV और ग्रीन हाइड्रोजन पर फोकस
भारत की Renewable Energy Capacity 2025 में नई ऊँचाइयों तक पहुंची। सोलर और विंड एनर्जी के साथ-साथ National Green Hydrogen Mission ने गति पकड़ी। ग्रीन हाइड्रोजन को स्टील, फर्टिलाइज़र और रिफाइनरी सेक्टर से जोड़ने के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए, जिससे भारत क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन में आगे बढ़ा।
इसी के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EV) ने 2025 में तेज़ विस्तार दर्ज किया। फेम इंडिया फेज-II के तहत 11,500 करोड़ रुपये से ईवी की मांग और उत्पादन को प्रोत्साहन मिला, जबकि पीएलआई-ऑटो योजना (25,938 करोड़ रुपये) और ACC बैटरी पीएलआई योजना (18,100 करोड़ रुपये) ने घरेलू विनिर्माण और बैटरी क्षमता को मजबूती दी।
पीएम ई-ड्राइव योजना (2024–2028) के तहत 10,900 करोड़ रुपये के समर्थन और अग्रिम मूल्य छूट से ई-2W, ई-3W, ई-बस और ई-ट्रक को बढ़ावा मिला। साथ ही पीएम ई-बस सेवा-पीएसएम योजना से 38,000 से अधिक ई-बसों की तैनाती को समर्थन मिला। ईवी चार्जिंग को गैर-लाइसेंस गतिविधि घोषित किए जाने और नए दिशानिर्देशों के तहत 2,000 करोड़ रुपये के आवंटन से चार्जिंग नेटवर्क मजबूत हुआ और देश में 29,151 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए। फरवरी 2025 तक भारत में 389.77 मिलियन पंजीकृत वाहनों में से कुल 56.75 लाख इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत किए गए हैं।
नदियों, जल और वेटलैंड संरक्षण में प्रगति
Namami Gange Mission के तहत 2025 में सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता में विस्तार हुआ और गंगा की जल गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया। जल जीवन मिशन, अमृत सरोवर और वेटलैंड कंजरवेशन प्रोग्राम्स ने Water Security को पर्यावरणीय एजेंडा का अहम हिस्सा बनाया।
मिशन अमृत सरोवर का उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले में कम से कम 75 तालाबों का निर्माण या पुनरुद्धार करना है। प्रत्येक अमृत सरोवर का न्यूनतम क्षेत्रफल 1 एकड़ और जल संग्रहण क्षमता लगभग 10,000 घन मीटर तय की गई है। ये सरोवर जल संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें कई राष्ट्रीय नायकों और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2022 को इस मिशन की शुरुआत की थी। सरकार ने 15 अगस्त 2023 तक 50,000 सरोवरों का लक्ष्य रखा था, और अब तक 68,000 से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण/पुनरुद्धार कर लिया गया।
पर्यावरण संरक्षण के तहत प्रत्येक अमृत सरोवर पर नीम, बरगद, पीपल जैसे देशी पौधों का रोपण अनिवार्य है और अब तक लगभग 23 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। सभी पूर्ण अमृत सरोवरों पर एक सामान्य साइनबोर्ड लगाया गया है, जिसमें निर्माण योजना और स्थल से जुड़ी पूरी जानकारी दी जाती है। मिशन अमृत सरोवर आज जल संरक्षण और जनभागीदारी का एक सफल राष्ट्रीय मॉडल बन चुका है।
सर्कुलर इकॉनमी और वेस्ट मैनेजमेंट
2025 में Single-Use Plastic, E-Waste और Construction & Demolition Waste नियमों को और सख़्त किया गया। Extended Producer Responsibility (EPR) के प्रभावी क्रियान्वयन से रिसाइक्लिंग इकोसिस्टम को मजबूती मिली।
सर्कुलर इकॉनमी मॉडल ने यह स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल नियम नहीं, बल्कि आर्थिक अवसर भी बन रहा है।
जैव विविधता और वन संरक्षण
साल 2025 में भारत ने जैव विविधता संरक्षण और वन क्षेत्र के विस्तार को पर्यावरण नीति की अहम प्राथमिकता बनाए रखा। वन क्षेत्र बढ़ाने, मैंग्रोव संरक्षण और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर लगातार प्रयास किए गए, जिससे ईकोसिस्टम की स्थिरता को मजबूती मिली।
Project Tiger और Project Elephant जैसी योजनाओं के तहत बाघ और हाथी आवासों की सुरक्षा, वन्यजीव कॉरिडोर और मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही, मैंग्रोव मिशन के माध्यम से तटीय क्षेत्रों में प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया गया, जिससे चक्रवात, तटीय कटाव और समुद्र-स्तर वृद्धि के प्रभावों से निपटने में मदद मिली।
कम्युनिटी-आधारित संरक्षण (Community-based Conservation) मॉडल के जरिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाई गई। इससे न केवल वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा मजबूत हुई, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका और संरक्षण के बीच संतुलन भी स्थापित हुआ। 2025 में यह स्पष्ट हुआ कि जैव विविधता संरक्षण तभी प्रभावी हो सकता है, जब इसमें समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
क्लाइमेट टेक और इनोवेशन का उदय
साल 2025 में क्लाइमेट टेक (Climate Tech) भारत के पर्यावरणीय प्रयासों का एक अहम स्तंभ बनकर उभरा। देश में Climate Tech Startups की संख्या और गतिविधियों में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई, जिन्होंने जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों के लिए तकनीक-आधारित समाधान विकसित किए।
कार्बन कैप्चर, ग्रीन कूलिंग, सस्टेनेबल पैकेजिंग, ऊर्जा दक्षता और स्मार्ट एनर्जी सॉल्यूशंस जैसे क्षेत्रों में भारतीय नवाचारों ने न केवल घरेलू स्तर पर, बल्कि वैश्विक मंच पर भी ध्यान आकर्षित किया। इन स्टार्टअप्स ने उद्योग, शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र में कम उत्सर्जन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा दिया।
डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स के इस्तेमाल से पर्यावरण संरक्षण को डेटा-आधारित, मापनीय और स्केलेबल बनाया गया। इससे नीति निर्माण, कार्बन फुटप्रिंट ट्रैकिंग और संसाधन प्रबंधन में सुधार हुआ।
भारत की वैश्विक पर्यावरणीय भूमिका
साल 2025 में भारत ने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी मंचों की मेज़बानी कर वैश्विक जलवायु विमर्श में अपनी भूमिका को और मजबूत किया। नई दिल्ली में आयोजित World Sustainable Development Summit 2025 के दौरान क्लाइमेट एक्शन, एनर्जी ट्रांज़िशन, ग्रीन फाइनेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर व्यापक चर्चा हुई। इस मंच पर विकासशील देशों की चुनौतियों, क्लाइमेट फाइनेंस की ज़रूरत और तकनीक तक समान पहुंच जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
इसके अलावा, GreenCo Summit, India Water Impact Summit और अन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सर्कुलर इकॉनमी, जल संरक्षण, क्लीन टेक्नोलॉजी और उद्योगों के ग्रीन ट्रांज़िशन पर सहमति बनी। इन मंचों के माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नीति, निवेश, तकनीक और वैश्विक सहयोग का संतुलित मॉडल आवश्यक है।
कुल मिलाकर, 2025 में भारत न केवल वैश्विक पर्यावरणीय चर्चाओं का सक्रिय भागीदार रहा, बल्कि Global South की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी ढंग से सामने रखने वाले देशों में अग्रणी बनकर उभरा।
राज्यों की पहल: ज़मीनी स्तर पर पर्यावरणीय बदलाव
साल 2025 में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में राज्यों की भूमिका निर्णायक रही। केंद्र सरकार की नीतियों और मिशनों को राज्य-स्तरीय पहलों के माध्यम से ज़मीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया गया। यह वर्ष Cooperative Federalism के तहत पर्यावरणीय शासन (Environmental Governance) का सशक्त उदाहरण बना।
उत्तर प्रदेश में नदी स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी पर्यावरण सुधार पर विशेष ध्यान दिया गया। Namami Gange से जुड़े प्रोजेक्ट्स, सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता में विस्तार और शहरी निकायों में वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने से जल गुणवत्ता और स्वच्छता में सुधार दर्ज किया गया। वृक्षारोपण महाअभियान-2025 के तहत एक दिन में 37 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
दिल्ली ने स्वच्छ हवा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी। इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन डस्ट कंट्रोल और रियल-टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग के जरिए शहरी प्रदूषण से निपटने के प्रयास तेज़ हुए।
गुजरात ने रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट में अग्रणी भूमिका निभाई। सोलर–विंड परियोजनाओं, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट्स ने राज्य को क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन का अहम केंद्र बनाया।
राजस्थान ने जल संरक्षण और सूखा प्रबंधन पर फोकस रहा। रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, पारंपरिक जल संरचनाओं के पुनर्जीवन और माइक्रो-इरिगेशन जैसी पहलों ने जल संकट से निपटने में सहायता की।
तमिलनाडु ने प्लास्टिक वेस्ट, ई-वेस्ट और सर्कुलर इकॉनमी के क्षेत्र में ठोस कदम उठाए। सख़्त नियमों और रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से शहरी वेस्ट मैनेजमेंट को मजबूती मिली।
केरल ने क्लाइमेट-रेज़िलिएंट डेवलपमेंट पर जोर दिया। बाढ़ और चरम मौसम की घटनाओं से निपटने के लिए अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, कोस्टल प्रोटेक्शन और डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन उपायों को मजबूत किया गया।
इन राज्य-स्तरीय पहलों ने यह स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय समाधान, प्रशासनिक क्षमता और जनभागीदारी के माध्यम से ही वास्तविक बदलाव संभव है।
साल 2025 में राज्यों की सक्रिय भागीदारी ने राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंडा को मजबूती दी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को ज़मीनी हकीकत में बदलने की दिशा तय की।
साल 2025 यह साबित करता है कि भारत में पर्यावरण संरक्षण अब केवल सरकारी नीतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकार, राज्यों और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी बन चुका है। क्लाइमेट एक्शन, क्लीन एनर्जी, प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और जैव विविधता से जुड़े कदमों ने यह दिखाया कि विकास और पर्यावरण को साथ लेकर चलना संभव है।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियानों ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया। इससे लोगों में यह समझ बनी कि प्रकृति की रक्षा करना सिर्फ सरकार का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। राज्यों की सक्रिय भागीदारी ने केंद्र सरकार की नीतियों को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाया।
रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लाइमेट टेक के क्षेत्र में हुई प्रगति ने भारत को क्लीन एनर्जी की दिशा में आगे बढ़ाया। वहीं बांस और रबर जैसे रोपित वनों के विस्तार से पर्यावरण संरक्षण को ग्रामीण आजीविका और रोजगार से जोड़ा गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Climate Justice और LiFE जैसे विचारों के साथ भारत की भूमिका मजबूत हुई।
“कुल मिलाकर, साल 2025 यह दिखाता है कि भारत पर्यावरण को विकास में बाधा नहीं, बल्कि विकास का मजबूत आधार मानकर आगे बढ़ रहा है। यह वर्ष Viksit Bharat @2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते भारत की पर्यावरणीय सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। ”


