फिलीपींस में 6.9 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, पीएम मोदी ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बुधवार को फिलीपींस में आए शक्तिशाली भूकंप में जान गंवाने वालों के प्रति गहरा दुख जताया और भारत की एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि “फिलीपींस में आए भूकंप से जानमाल के नुकसान की खबर से गहरा दुख हुआ है। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। भारत इस कठिन समय में फिलीपींस के साथ खड़ा है।” यह भूकंप मंगलवार देर रात फिलीपींस के केंद्रीय हिस्से में सेबू द्वीप के तट पर आया, जिसकी तीव्रता 6.9 दर्ज की गई और गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी। वहीं बुधवार सुबह तक मौतों की संख्या बढ़कर 69 हो गई। फिलीपींस की क्षेत्रीय सिविल डिफेंस अधिकारी जेन अबापो ने बताया कि यह आंकड़ा स्थानीय आपदा एजेंसी के डाटा पर आधारित है और अभी सत्यापन जारी है। अधिकारियों के अनुसार यह पिछले एक दशक में देश में आया सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक है।

भूकंप के कारण कई इमारतें ढह गईं, बिजली आपूर्ति बाधित हुई और लोग अपने घरों से बाहर निकलने पर मजबूर हो गए। बोगो सिटी के अस्पताल में घायलों की भारी संख्या के कारण हालात बिगड़ गए, जिसके बाद तटरक्षक बलों ने डॉक्टरों और नर्सों की टीम तुरंत भेजी। राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत और बचाव का आश्वासन दिया और कहा कि “हम नुकसान और ज़रूरतों का आकलन कर रहे हैं, राहत कार्यों में तेजी लाई जाएगी।” फिलीपींस के भूकंप विज्ञान संस्थान (Phivolcs) ने बताया कि अब तक करीब 800 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए हैं, जिनमें से सबसे शक्तिशाली की तीव्रता 6 रही। हालांकि सुनामी का कोई खतरा नहीं है। प्रभावित इलाकों में लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

भूकंप में 100 साल पुराना एक चर्च भी ढह गया। सेबू द्वीप, जो फिलीपींस का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और लगभग 34 लाख लोगों का घर है, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। हालांकि मकटान-सेबू अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, जो देश का दूसरा सबसे व्यस्त हवाईअड्डा है, चालू रहा। फिलीपींस प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है, जहां ज्वालामुखी और भूकंप अक्सर आते रहते हैं। इस साल जनवरी में दो बड़े भूकंप आए थे लेकिन उनमें कोई हताहत नहीं हुआ था। 2023 में 6.7 तीव्रता का समुद्री भूकंप आठ लोगों की मौत का कारण बना था। सरकार और राहत एजेंसियां अभी भी मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रही हैं और बचाव कार्यों में तेजी लाई जा रही है।-(PIB)

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