प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत 12 जुलाई 2026 तक 76.95 लाख स्ट्रीट वेंडरों ने 18,475 करोड़ रुपए से अधिक के 1.15 करोड़ से अधिक बिना गारंटी वाले ऋण का लाभ उठाया है। योजना का उद्देश्य शहरी स्ट्रीट वेंडरों को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है। आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने सोमवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
2020 में शुरू हुई थी योजना
पीएम स्वनिधि योजना 1 जून 2020 को शुरू की गई थी। योजना के जरिए शहरी स्ट्रीट वेंडरों को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराया जाता है। सरकार के अनुसार, योजना ने उन स्ट्रीट वेंडरों को संस्थागत ऋण व्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनकी औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहले सीमित या कोई पहुंच नहीं थी।
आईएसबी के अध्ययनों में सामने आया प्रभाव
योजना के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का आकलन हैदराबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) ने 2023 और 2025 में किए गए अध्ययनों के जरिए किया। 2023 का अध्ययन देशभर के 100 शहरी स्थानीय निकायों में 5,000 से अधिक लाभार्थियों को शामिल कर किया गया था। इसमें सामने आया कि 95% लाभार्थियों के लिए पीएम स्वनिधि बैंक से लिया गया पहला ऋण था और उन्होंने इस ऋण का इस्तेमाल अपने कारोबार के विस्तार के लिए किया।
दो साल में कारोबार की आय 20% बढ़ी
2025 के अध्ययन में देशभर के 99 शहरी स्थानीय निकायों के 5,000 से अधिक लाभार्थियों को शामिल किया गया। इनमें करीब 60% उत्तरदाता 2023 के अध्ययन के नमूने का हिस्सा थे। अध्ययन के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच पीएम स्वनिधि ऋण लेने वाले स्ट्रीट वेंडरों की औसत वार्षिक व्यावसायिक आय में करीब 20% की वृद्धि हुई।
क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में मिली मदद
अध्ययन में यह भी सामने आया कि सभी चरणों में करीब 30% उधारकर्ताओं ने पीएम स्वनिधि ऋण के अलावा अन्य ऋण होने की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, यह ऐसे स्ट्रीट वेंडरों के लिए क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में योजना की भूमिका को रेखांकित करता है, जिनकी औपचारिक ऋण तक पहले बहुत कम या बिल्कुल पहुंच नहीं थी।
डिजिटल भुगतान को मिला बढ़ावा
पीएम स्वनिधि के जरिए स्ट्रीट वेंडरों के बीच डिजिटल भुगतान को भी बढ़ावा मिला है। अध्ययन के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच स्ट्रीट वेंडरों के बीच डिजिटल भुगतान अपनाने में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। योजना के तहत डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए लाभार्थियों को 12 महीने तक प्रति माह अधिकतम 100 रुपए का कैशबैक दिया जाता है। इस तरह अधिकतम डिजिटल प्रोत्साहन 1,200 रुपए सालाना है।
875 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन
योजना की शुरुआत से मई 2026 तक 875 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए गए हैं। इस अवधि में स्ट्रीट वेंडर लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन के लिए कैशबैक प्रोत्साहन के रूप में 412 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। पुनर्गठित योजना के तहत कम से कम 2,000 रुपए की थोक खरीदारी पर डिजिटल लेनदेन करने के लिए चार तिमाहियों तक प्रति तिमाही अधिकतम 100 रुपए कैशबैक देने का भी प्रावधान है।
दूसरी और तीसरी किस्त का भी लाभ
योजना के तहत ऋण की समय पर अदायगी करने वाले स्ट्रीट वेंडरों को आगे की किस्तों में अधिक ऋण लेने का अवसर मिलता है। 12 जुलाई 2026 तक 29.71 लाख विक्रेताओं ने ऋण की दूसरी किस्त और 8.49 लाख विक्रेताओं ने तीसरी किस्त का लाभ उठाया है। सरकार के अनुसार, यह लाभार्थियों की ऋण चुकाने की क्षमता और बेहतर वित्तीय स्थिति की दिशा में प्रगति को दर्शाता है।
जीवन स्तर सुधारने में भी मदद
सरकार के अनुसार, पीएम स्वनिधि का प्रभाव केवल कारोबार बढ़ाने तक सीमित नहीं है। ऋण संबंधी बाधाओं को कम करने और परिवारों के नकदी प्रवाह को स्थिर करने से विक्रेता परिवारों को जीवन स्तर सुधारने, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और बच्चों की शिक्षा में सहायता मिली है।
‘स्वनिधि से समृद्धि’ से सामाजिक सुरक्षा
स्ट्रीट वेंडरों और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से पीएम स्वनिधि के तहत ‘स्वनिधि से समृद्धि’ घटक 4 जनवरी 2021 को शुरू किया गया। इसके जरिए लाभार्थियों को आठ केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की सुविधा दी जाती है। इनमें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जन धन योजना, बीओसीडब्ल्यू अधिनियम के तहत पंजीकरण, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना, एनएफएसए के तहत ओएनओआरसी पोर्टेबिलिटी लाभ, प्रधानमंत्री जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना शामिल हैं।
50.63 लाख लाभार्थियों की प्रोफाइलिंग पूरी
12 जुलाई 2026 तक पीएम स्वनिधि योजना के 50.63 लाख लाभार्थियों की सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग पूरी हो चुकी है। इन लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 1.56 करोड़ योजना स्वीकृतियां दी जा चुकी हैं। सरकार के अनुसार, इससे स्ट्रीट वेंडरों और उनके परिवारों को ऋण के साथ सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद मिली है। (इनपुट-पीआईबी)


