आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया है कि देशभर में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी दवाओं की गुणवत्ता जांच के लिए 108 प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी गई है। ये सभी लैब्स ड्रग्स रूल्स, 1945 के प्रावधानों के तहत स्वीकृत या लाइसेंस प्राप्त हैं।
मंत्री ने जानकारी दी कि 34 राज्य स्तरीय ड्रग टेस्टिंग लैब्स को उनके इंफ्रास्ट्रक्चर और कार्यक्षमता को मजबूत करने के लिए सहयोग दिया गया है। इसके साथ ही सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज के तीन क्षेत्रीय शोध संस्थानों को भी ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत मंजूरी मिली है।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं की निगरानी के लिए फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम लागू किया गया है, जो केंद्रीय क्षेत्र की योजना आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना (AOGUSY) के तहत संचालित होता है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय, मध्यवर्ती और परिधीय स्तर के केंद्रों के तीन-स्तरीय नेटवर्क के जरिए पूरे देश में काम करता है। इन केंद्रों की जिम्मेदारी है कि वे भ्रामक विज्ञापनों की निगरानी करें और संबंधित राज्य नियामक प्राधिकरणों को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट करें।
मंत्री ने बताया कि अब तक देशभर में 3,533 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे 3,18,575 लोग लाभान्वित हुए हैं। इस योजना का उद्देश्य आयुष दवाओं की गुणवत्ता पर नजर रखना, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाना, उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बिना प्रमाण वाले दावों के प्रसार को रोकना है।
इसके अलावा आयुष मंत्रालय आयुष उत्पादों के लिए विभिन्न प्रमाणन योजनाओं को भी बढ़ावा दे रहा है, जिनमें डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के अनुसार फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन और क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा दी जाने वाली गुणवत्ता प्रमाणन योजनाएं शामिल हैं।
AOGUSY योजना को 2021-22 से 2025-26 तक पांच वर्षों के लिए कुल 122 करोड़ रुपये के बजट के साथ लागू किया गया है। इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य आयुष फार्मेसी और ड्रग टेस्टिंग लैब्स को अपग्रेड कर उच्च गुणवत्ता मानकों तक पहुंचाना है।
-(इनपुटःएजेंसी)


