दिव्यांगजनों के लिए बजट में बढ़ोतरी का अमेरिकी एनजीओ ने किया स्वागत

अमेरिका में दिव्यांग अधिकारों के लिए काम करने वाली एक गैर-लाभकारी संस्था ने भारत के केंद्रीय बजट 2026 का स्वागत किया है। संस्था का कहना है कि कौशल, रोजगार और सहायक सुविधाओं से जुड़ी नई योजनाएं दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं।

दिव्यांग लोगों की आवाज उठाने वाली संस्था द वॉयस ऑफ स्पेशली एबल्ड पीपल (वीओएसएपी) ने कहा कि बजट में ऐसे कार्यक्रम शामिल किए गए हैं, जिनसे दिव्यांगजनों को देश की आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी। संस्था के संस्थापक प्रणव देसाई ने बताया कि दिव्यांगजनों के लिए उनकी दीर्घकालिक योजना ‘विजन 2047’ को बजट से नई मजबूती मिली है। इसके तहत दिव्यांग लोगों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए दो नई पहल शुरू की गई हैं।

वीओएसएपी के विजन 2047 का लक्ष्य यह है कि दिव्यांगजन भारत के लंबे समय के विकास में पूरी तरह शामिल हों। इसमें सम्मान के साथ जीवन, अवसरों की समानता और समाज में सक्रिय भागीदारी पर खास जोर दिया गया है। ग्रुप ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में दिव्यांगजन कौशल योजना और दिव्यांग सहारा योजना की घोषणा की है। इन योजनाओं का उद्देश्य दिव्यांगजनों को कौशल प्रशिक्षण देना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और सहायक तकनीक उपलब्ध कराना है।

संस्था ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026 में विशेष रूप से सक्षम लोगों द्वारा आर्थिक योगदान के लिए दो नए कार्यक्रम शुरू होने से दिव्यांगजनों के लिए विजन 2047 को एक बड़ा बढ़ावा मिला है।” ये दोनों योजनाएं दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी। दिव्यांगजन कौशल योजना के तहत उनकी जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी, जिससे नौकरी पाने की संभावना बढ़ेगी।

संगठन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को इसके लिए बधाई दी और कहा, “ये कदम विजन 2047 और विकसित भारत के लिए एक समावेशी इकोसिस्टम बनाने में मदद करेंगे, जहां गरिमा, पहुंच और अवसर प्रगति को परिभाषित करते हैं।”दिव्यांग सहारा योजना के जरिए सहायक उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि दिव्यांगजन अधिक स्वतंत्रता के साथ जीवन और काम कर सकें।

संस्था के अनुसार, ये योजनाएं सुलभ भारत अभियान के उद्देश्य से भी जुड़ी हैं। इनका मकसद कौशल, रोजगार और तकनीक से जुड़ी उन बाधाओं को कम करना है, जो अक्सर दिव्यांगजनों के सामने आती हैं। हालांकि, संस्था ने यह भी कहा कि योजनाओं को जमीन पर सही तरीके से लागू करना बहुत जरूरी होगा, तभी इसका वास्तविक लाभ दिव्यांगजनों तक पहुंच पाएगा। भारत में लाखों दिव्यांग लोग रहते हैं, जिन्हें शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुंच में आज भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।(इनपुट-आईएएनएस)

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