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ईरान युद्ध के बीच कुकिंग गैस पर निर्भरता घटाने की तैयारी, सरकार घरेलू इंडक्शन हीटर उत्पादन बढ़ाने पर कर रही फोकस

केंद्र सरकार कुकिंग गैस की खपत कम करने के लिए अब इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की योजना बना रही है। इस दिशा में शुक्रवार को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव, विद्युत सचिव और विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के महानिदेशक सहित शीर्ष अधिकारियों ने एक उच्चस्तरीय बैठक की।

इस बैठक में ईरान युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं को देखते हुए इंडक्शन हीटर और कुकिंग उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई, ताकि कुकिंग गैस की खपत कम की जा सके। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से इंडक्शन हीटर और अन्य इलेक्ट्रिक उत्पादों की मांग में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अगर यह युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो भारत को संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब सरकार लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की संभावना को देखते हुए आयात पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रही है। खासतौर पर तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात में बाधा को लेकर चिंता जताई जा रही है। सरकार पहले ही कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क कम कर चुकी है, ताकि सप्लाई बनी रहे और लागत का दबाव कम किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मुख्य फोकस जरूरी उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आयात पर निर्भरता कम करना है।

कतर में एक बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) प्लांट को नुकसान पहुंचने के बाद मध्य पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने की स्थिति में है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई गुजरती है। भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाई है और अब रूस के साथ-साथ नाइजीरिया और अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से ज्यादा कच्चा तेल खरीद रहा है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां अमेरिका से भी गैस की आपूर्ति ले रही हैं।

इस बीच, पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना अगले 2-3 हफ्तों तक ईरान पर ‘बेहद कड़ा प्रहार’ करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को ‘स्टोन एजेज यानी पाषाण युग’ (उनकी पुरानी स्थिति जहां वे असल में थे) में पहुंचा देगा।

इसके कुछ घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उस समय मध्य पूर्व में न तेल था और न ही गैस का उत्पादन होता था।”
ट्रंप ने यह चेतावनी ऐसे समय दोहराई है जब यह संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती जारी है। वहीं ईरान ने युद्धविराम और 15-सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए इसे ‘बेहद एकतरफा और अव्यवहारिक’ बताया है। (इनपुट-आईएएनएस)

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