प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नये त्रिपुरा’ के विज़न को साकार करते हुए राज्य ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। अब त्रिपुरा चिकित्सा सुविधाओं के मामले में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। गंभीर रोगों के उपचार से लेकर अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं आज राज्य के भीतर ही उपलब्ध हैं। यही कारण है कि राज्य से बाहर इलाज के लिए जाने वाले मरीजों की संख्या में एक तिहाई तक की कमी आई है। यह उपलब्धि न केवल त्रिपुरा की स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि आत्मनिर्भर त्रिपुरा की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम भी है।
राज्य सरकार ‘नए त्रिपुरा’ के निर्माण की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ी को किसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना न करना पड़े
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने कहा है कि राज्य सरकार ‘नए त्रिपुरा’ के निर्माण की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ी को किसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि आज अधिकांश महत्वपूर्ण चिकित्सकीय सेवाएं राज्य के भीतर ही उपलब्ध हैं।
बीते सात वर्षों में राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ है
मुख्यमंत्री साहा हपनिया स्थित त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज एवं डॉ. बीआरएएम टीचिंग हॉस्पिटल के 20वें स्थापना दिवस समारोह में विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बीते सात वर्षों में राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि “कई लोग अभी भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता से अनजान हैं और अनावश्यक रूप से भारी खर्च कर बाहर जाते हैं। इस संबंध में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारे पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), आधुनिक तकनीक और हाई-स्पीड इंटरनेट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारे पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), आधुनिक तकनीक और हाई-स्पीड इंटरनेट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, जिन्हें नवाचार और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए प्रयोग में लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज से अब तक 13 बैचों के एमबीबीएस छात्र स्नातक होकर निकल चुके हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में पूर्व छात्र और डॉक्टरों को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री साहा ने यह भी कहा कि “जब कोई योग्य व्यक्ति संस्थान का संचालन करता है तो संतोष होता है, लेकिन सरकारी क्षेत्र में लोग प्रायः जिम्मेदारी लेने से बचते हैं। आने वाले समय में स्वास्थ्य ढांचे का और विस्तार होगा, किंतु साथ ही मौजूदा ढांचे का रखरखाव और नवीनीकरण भी आवश्यक है।”
मुख्यमंत्री ने नशे की समस्या पर चिंता जताते हुए राज्य में इसके विरुद्ध जन आंदोलन की आवश्यकता बताई
नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए, मुख्यमंत्री (जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का प्रभार भी संभालते हैं) ने कहा कि राज्य में नशे के विरुद्ध जन आंदोलन की आवश्यकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि “सिरिंज के माध्यम से नशा करने पर एचआईवी संक्रमण और एड्स जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लोगों को इस बारे में जागरूक और सतर्क रहना होगा। आवश्यकता पड़ने पर परामर्श सत्र आयोजित किए जाएं और निगरानी भी रखी जाए।” उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में त्रिपुरा में तीन मेडिकल कॉलेज हैं जिनमें 400 एमबीबीएस सीटें हैं। राज्य सरकार सीटों की संख्या बढ़ाने और विशेष चिकित्सा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए प्रयासरत है।
-(लेखिका आशिका सिंह का पत्रकारिता जगत में 18 वर्षों का अनुभव है, वर्तमान में वे प्रसार भारती न्यूज सर्विस के साथ जुड़ी हैं)


