केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति विशेष सम्मान के प्रतीक के रूप में गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में एक पवित्र स्तूप समर्पित किए जाने को अत्यंत महत्वपूर्ण और सम्मानजनक कदम बताया। रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना को लगातार समर्थन दिया है और इसी सम्मान में उनके नाम पर स्तूप समर्पित किया गया है।
108 स्तूपों के निर्माण और अभिषेक समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व
किरेन रिजिजू ने रविवार को भूटान के राजा के नेतृत्व में आयोजित 108 स्तूपों के निर्माण और अभिषेक समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व किया। इस आयोजन को भारत और भूटान के बीच गहरे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
स्तूप बुद्ध के प्रबुद्ध मन का प्रतीक: रिजिजू
रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, “किसी व्यक्ति को एक पवित्र स्तूप समर्पित करना सामान्य बात नहीं है। यह अत्यंत पुण्यदायक, शुभ और आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। बौद्ध धर्म में स्तूप केवल एक स्मारक नहीं होता, बल्कि यह बुद्ध के प्रबुद्ध मन का प्रतीक होता है।” उन्होंने कहा कि वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में आयोजित इस पवित्र समारोह में शामिल होने का अवसर मिला। यह आयोजन ‘ल्हाबाब दुचेन’ के शुभ अवसर पर 108 स्तूपों के निर्माण और अभिषेक के लिए किया गया था। इस दौरान पारंपरिक दुंगचेन यानी लंबे धार्मिक वाद्य यंत्र भी बजाए गए।
एक ही दिन में हजारों स्वयंसेवकों ने बनाए 108 स्तूप
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अनुसार, 108 स्तूपों की इस परियोजना की परिकल्पना भूटान के राजा ने स्वयं की थी और इसके क्रियान्वयन का मार्गदर्शन भी उन्होंने ही किया। परियोजना के तहत हजारों स्वयंसेवकों ने एक ही दिन में 108 स्तूपों का निर्माण किया। प्रत्येक स्तूप की ऊंचाई 15 मीटर है और इन्हें एक-दूसरे से 108 मीटर की दूरी पर स्थापित किया गया है। ये स्तूप असम सीमा के पास गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में आई (माउ) नदी के किनारे 11.7 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में बनाए गए हैं।
वज्रयान बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होगा गेलेफू
इस परियोजना का उद्देश्य गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी को वज्रयान बौद्ध धर्म के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके साथ ही यह पहल भूटान की संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को भी प्रदर्शित करती है। गेलेफू परियोजना को भूटान के भविष्य के विकास और क्षेत्रीय सहयोग की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भूटान के राजा और प्रधानमंत्री से मिले किरेन रिजिजू
31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक की अपनी भूटान यात्रा के दौरान किरेन रिजिजू ने राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की। उन्होंने भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग टोबगे के साथ भी बातचीत की। मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत और भूटान के बीच विशेष मित्रता तथा विकास सहयोग की सराहना की। इस दौरान व्यापार, ऊर्जा, निवेश, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग पर भी चर्चा हुई।
गेलेफू परियोजना को भारत का समर्थन दोहराया
किरेन रिजिजू ने अपनी यात्रा के दौरान गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना के लिए भारत का समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल भूटान, बल्कि भारत के पड़ोसी क्षेत्रों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने भारत और भूटान के बीच मजबूत सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को दोनों देशों की विशेष मित्रता का महत्वपूर्ण आधार बताया। (इनपुट: आईएएनएस)


