मानवीय बुद्धिमत्ता के नेतृत्व में हो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, तभी विकसित भारत 2047 का सपना होगा साकार: डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को मानवीय बुद्धिमत्ता, नैतिकता और जवाबदेही के नेतृत्व में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई अब गवर्नेंस का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के समापन अवसर पर उन्होंने यह बात कही।

जयपुर घोषणापत्र 2026 को अपनाकर सम्मेलन का समापन

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का समापन ‘जयपुर घोषणापत्र 2026’ को अपनाने के साथ हुआ। “विकसित भारत 2047 : एआई-सक्षम, डेटा-संचालित और सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के नीति निर्माता, वरिष्ठ प्रशासक, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, शोधकर्ता और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

प्रौद्योगिकी नागरिकों को सशक्त बनाए, उनका स्थान नहीं ले

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का डिजिटल परिवर्तन मानव निर्णय प्रक्रिया को मशीनों से बदलने के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक संस्थानों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सक्षम बनाने के लिए है। उन्होंने कहा कि एआई को मानवीय उत्तरदायित्व का विकल्प नहीं, बल्कि शासन को मजबूत करने वाले साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना होना चाहिए, न कि उनकी जगह लेना।

2047 के भारत के लिए भविष्य की सोच जरूरी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को वर्तमान परिस्थितियों तक सीमित सोच के बजाय भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीकों के साथ सार्वजनिक संस्थानों और सिविल सेवाओं को भी लगातार विकसित होना होगा, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहे।

डिजिटल गवर्नेंस में भारत ने बनाई नई पहचान

जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की डिजिटल गवर्नेंस यात्रा अब केवल सेवाओं के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि एआई, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम के माध्यम से सार्वजनिक प्रशासन के नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने सीपीग्राम्स, भाषिणी के सहयोग से विकसित एआई आधारित बहुभाषी वॉयस चैटबॉट ‘दीदी’, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन (एनईएसडीए), इंडियाएआई मिशन, मिशन कर्मयोगी और विशेष अभियान 5.0 जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे शासन अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित बना है।

17 उत्कृष्ट पहलों को मिला राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार

सम्मेलन के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, जिला प्रशासन, ग्राम पंचायतों तथा शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों की 17 उत्कृष्ट डिजिटल गवर्नेंस पहलों को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया। सात श्रेणियों में दिए गए इन पुरस्कारों में 10 स्वर्ण पुरस्कार, छह रजत पुरस्कार और एक जूरी पुरस्कार शामिल रहे। उन्होंने कहा कि ये पहलें दर्शाती हैं कि नवाचार और प्रौद्योगिकी के माध्यम से नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

राजस्थान की डिजिटल पहल की सराहना

डॉ. जितेंद्र सिंह ने राजस्थान सरकार की डिजिटल गवर्नेंस पहलों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने नवाचार और प्रशासनिक सुधारों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। उन्होंने ‘राज-काज’ एकीकृत प्रशासनिक मंच का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे विभागों में कागजरहित, तेज और पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा मिला है।

मानव-नेतृत्व वाली एआई बनेगी भारत की पहचान

अपने संबोधन के समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का भविष्य जिम्मेदार, नागरिक-केंद्रित और नैतिक डिजिटल शासन पर आधारित होगा। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी शासन को गति दे सकती है, लेकिन उसे सही दिशा केवल मानवीय बुद्धिमत्ता ही दे सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि मानव-नेतृत्व वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने का सबसे प्रभावी माध्यम बनेगी। (इनपुट: पीआईबी)

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